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सर्दियों में क्‍यों बार-बार जाना पड़ता है वॉशरूम

किडनी फेल्योर By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 25, 2015
सर्दियों में क्‍यों बार-बार जाना पड़ता है वॉशरूम

क्‍या कभी आपने इस बात को नोटिस किया है कि सर्दियों में आपको बार-बार वॉशरूम जाने की जरूरत क्‍यों होती है? आइए इस आर्टिकल के माध्‍यम से इस सवाल का जवाब को जानने की कोशिश करते हैं।

क्‍या कभी आपने इस बात को नोटिस किया है कि ठंडे कमरे में रहने पर सर्दियों में आपको बार-बार वॉशरूम जाने की जरूरत क्‍यों होती है? हालांकि
यह पूरी तरह से सामान्‍य घटना हैं और इसे कोल्‍ड डाययूरेसिस (सर्दी के कारण बार-बार यूरीन आने की समस्‍या) के रूप में जाना जाता है।

 

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कोल्‍ड डाययूरेसिस

ठंड के मौसम में, शरीर अपने भीतर भाग को गर्म रखने के लिए रक्‍त वाहिकाओं में बाधा और त्‍वचा के लिए रक्‍त प्रवाह को कम करके की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया को वाहिका संकीर्णन कहा जाता है। ऐसा करना इसलिए आवश्‍यक होता है क्‍योंकि इस मौसम में त्‍वचा की गर्मी कम होने के कारण आपका शरीर आगे के भाग विशेष रूप से पैर और हाथों की उंगालियों से रक्‍त के प्रवाह को कम करने लगता है।

संकीर्ण रक्‍त वाहिकाओं के कारण रक्‍तचाप में वृद्धि होने लगती है, क्‍योंकि रक्‍त की सामान राशि को प्रवाह के लिए कम जगह मिलती है। इसलिए अपने रक्‍तचाप को निय‍ंत्रित करने के लिए, किडनी रक्त से अधिक तरल पदार्थ में से कुछ को फिल्‍टर कर देती है। ब्लैडर में अतिरिक्‍त तरल पदार्थ के भरने पर आपको यूरीन महसूस होने लगता है। एक भरा हुआ ब्‍लैडर आपके शरीर की गर्मी को कम करने का एक और तरीका है, इसलिए तुरंत यूरीन आपके शरीर के अंदर की गर्मी को बनाये रखने में मदद करता है।

गर्मियों में इसका उल्‍टा होता है

यह पूरी प्रक्रिया गर्मियों में उलट हो जाती है, और इसे वाहिका प्रसरण के रूप में जाना जाता है। आपका शरीर त्‍वचा के माध्यम से खुद को गर्मी में ठंडा रखने के, पसीने जैसी परिचित प्रक्रिया का सहारा लेता है। जैसे-जैसे बाहरी तापमान बढ़ता है, आपकी रक्‍त वाहिकाएं चौड़ी होने लगती है जिसके कारण रक्‍त का प्रवाह बढ़ जाता है। और रक्‍त त्‍वचा की सतह के साथ संपर्क में आने पर खून में मौजूद  अतिरिक्‍त पानी वाष्‍प बनाकर उड़ जाता है और आपकी त्‍वचा ठंडा महसूस करने लगती है।

 

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प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

शरीर को स्‍वयं को ठंडा या गर्म कराने वाला कोई निश्चित तापमान नहीं होता है। समय के हर बिंदु पर, मानव शरीर समस्थिति को बनाये रखने की कोशिश करता है। इस अवस्‍था में शरीर का तापमान, पीएच और पोषण जैसे कारक स्थिर रहते हैं। इसलिए गर्म महसूस होने पर आपका शरीर खुद ही ठंडा होने की कोशिश करता है और ठंडा महसूस होने पर शरीर गर्मी को बनाये रखने की कोशिश करता है। हालांकि इस प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों में आयु, लिंग, शरीर रचना, आहार और एक्‍सरसाइज शामिल है। और यह कारक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में भिन्‍न-भिन्‍न भी होते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार सर्दी में अधिक यूरीन आने की समस्‍या से बचने के लिए आप एक्‍सरसाइज की मदद ले सकते हैं।

Image Courtesy : Getty Images

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