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विश्व मोटापा दिवस : वजनी महिलाओं में गर्भधारण की संभावना रहती है कम, जानें कारण और इलाज

लेटेस्ट By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 11, 2018
विश्व मोटापा दिवस : वजनी महिलाओं में गर्भधारण की संभावना रहती है कम, जानें कारण और इलाज

अधिक वजनी महिलाओं को गर्भधारण में संतुलित वजन वाली महिलाओं की तुलना में एक साल से अधिक का समय लग सकता है।

अधिक वजनी महिलाओं को गर्भधारण में संतुलित वजन वाली महिलाओं की तुलना में एक साल से अधिक का समय लग सकता है। मोटापे से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात की आशंका भी दोगुनी से अधिक रहती है। शोध बताते हैं कि मोटापा मुख्य कारण तो नहीं है, लेकिन इनफर्टिलिटी (नि:संतानता) का महत्वपूर्ण कारण जरूर है। मोटापे के कारण एंड्रोजन, इंसुलिन जैसे हार्मोन का अत्यधिक निर्माण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं या अंडोत्सर्जन तथा शुक्राणु के लिए नुकसानदेह प्रतिरोधी हार्मोन बनते हैं। लिहाजा, स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाएं। इससे न सिर्फ आपकी प्रजनन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि आप फिट भी रह सकती हैं।

मोटापे के कारण आपके शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों में टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, हृदयरोग और यहां तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां भी उभर सकती हैं। आज युवाओं में मोटापे के मामले आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रहे हैं। एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठ कर लगातार वेब सीरीज देखते रहना आज युवाओं में एक नया चलन बन गया है और इस वजह से भी बचपन से ही लोग मोटापे का शिकार हो जाते हैं। हाल ही में एक अध्ययन बताता है कि अस्थमा से पीड़ित बच्चों में मोटापे का शिकार होने की संभावना अधिक रहती है, क्योंकि अपनी सेहत स्थिति के कारण वे व्यायाम करने से दूर रहते हैं और इनहेलर के तौर पर स्टेरॉयड लेने से उनकी भूख बढ़ती जाती है। लिहाजा, लोगों को सलाह है कि वे स्वस्थ भोजन लें, अपना बीएमआई संतुलित रखें और अपने लाइफस्टाइल में शारीरिक गतिविधियों को महत्व दें।”

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बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोइंट्रोलोजिस्ट, डॉ. जी.एस. लांबा के मुताबिक, “यदि आप तनाव में रहते हैं तो आप मोटापे का शिकार हो सकते हैं। तनाव कई तरीके से वजन बढ़ाने में योगदान कर सकता है। तनाव की वजह से हमारे शरीर में कई हार्मोन पैदा होते हैं जिनमें कोर्टिसोल भी एक है। यह हार्मोन फैट स्टोरेज और शरीर की ऊर्जा खपत प्रबंधित करने का काम करता है। कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने से भूख भी बढ़ जाती है। इस वजह से मीठा और वसायुक्त भोजन खाने की इच्छा बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा, “गंभीर तनाव की स्थिति में वसा के रूप में शरीर में ऊर्जा इकट्ठा होने लगती है और यह हमारे पेट पर सबसे ज्यादा असर करती और चर्बी बढ़ाता है। मोटापे के कारण हृदय रोग, डायबिटीज, ओस्टियो-अर्थराइटिस आदि जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इन सभी बीमारियों का रिस्क फैक्टर कम करने के लिए आपको रोजाना कम से कम एक घंटे तक कुछ शारीरिक व्यायाम करना और अपने खानपान में संतुलित आहार लेना जरूरी है। ज्यादा तनाव न लें और फिट एवं स्वस्थ रहने के लिए अपने व्यक्तिगत तथा प्रोफेशनल जीवन में संतुलन बनाए रखें।”

गर्भधारण टिप्स

  • अगर आप ज्यादा मोटी है और कंसीव करना चाहती है, तो आप अपना वेट कम करके आसानी से कंसीव कर सकती हैं। इसके लिए आपको पहले टेस्ट करवाना होगा कि कहीं आपको थायराइड तो नहीं है। और अगर आपको थायराइड है तो उसका इलाज भी साथ-साथ करवाना जरूरी है। और अगर आपको थायराइड नहीं है, तो आप अपना वेट कम करके कंसीव कर सकती है। मोटापा कम करने के लिये कभी भी ज्यादा डाइटिंग ना करें।
  • कंसीव करने के पहले आपको अपने शरीर के वजन के हिसाब से बॉडी वेट के हिसाब से पीरियड्स चेक करने होंगे। पीरियड्स साइकल से ओव्यूलेशन कैलेंडर को जानना आसान होगा। इसलिये वजन को कंट्रोल रखें।
  • मोटी होने के बावजूद आप कंसीव कर सकें इसके लिए फर्टिलटी आहार खाएं। ऐसा आहार खाएं जिसमें फोलिक एसिड पाया जाता हो, इससे आप आसानी से प्रेगनेंट हो सकती हैं। फोलिक एसिड सोया प्रोडक्टअ, बींस, अंडे की जर्दी, आलू, गेहूं का आटा, पत्ता गोभी, केला, शकरकंद, ब्रोकली और अंकुरित आनाज आदि में प्रचूर मात्रा में पाया जाता है।
  • अगर आप जरूरत से ज्यादा मोटी है और गर्भधारण करना चाहती है, तो अपना पीसीओएस जरूर चेक करवाएं। ऐसी मोटी महिलाएं जिनका हार्मोन बैलेंस नहीं रहता, या फिर जिनमें पीसीओएस की समस्या होती है, उनमें गर्भधारण करने में परेशानी आती है, और वह आसानी से गर्भधारण नहीं कर पाती।

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