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World Heart Day: हार्ट अटैक से ज्‍यादा खतरनाक है 'साइलेंट हार्ट अटैक', एक्‍सपर्ट से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 29, 2019
World Heart Day: हार्ट अटैक से ज्‍यादा खतरनाक है 'साइलेंट हार्ट अटैक', एक्‍सपर्ट से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

World Heart Day 2019: साइलेंट हार्ट अटैक का शिकार होना एक और हार्ट अटैक होने की आशंका को कई गुना तक बढ़ा देता है, जो आपके लिए काफ़ी घातक सिद्ध हो सकता है।

Silent Heart Attack: आमतौर पर जब किसी को हार्ट अटैक (Heart Attack) आता है, तो उसे इसके लक्षण दिखायी पड़ते हैं और उसे सीने में दर्द अथवा सांस लेने में तकलीफ होती है। दूसरी ओर, साइलेंट हार्ट अटैक (Silent Heart Attack) के दौरान किसी भी अहम लक्षण का पता नहीं चलता है। दूसरे शब्दों में, इसके लक्षण गंभीर किस्म के नहीं होते हैं और ऐसे में पीड़ित व्यक्ति इन लक्षणों की आसानी से अनदेखी कर देता है। साइलेंट हार्ट अटैक का पता उस वक्त चलता है, जब मायोकार्डियल इंफ़ार्कशन (हार्ट अटैक) के सबूत हार्ट अटैक से कभी पीड़ित नहीं होने वाले व्यक्ति पर किये गये इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के दौरान दिखायी देते हैं। अक्सर इसका पता उस वक्त चलता है, जब कोई मरीज़ किसी और ही बीमारी की जांच के लिए डॉक्टर के पास जाता है, जिसका हार्ट अटैक से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता है। 

एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist) डॉ. संतोष कुमार डोरा ने बिना किसी लक्षण के हावी होनेवाली इस जानलेवा समस्या पर रौशनी डाली, आइए विस्‍तार से जानते हैं इसके बारे में:

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साइलेंट हार्ट अटैक के कौन-कौन से लक्षण होते हैं?

  • सिर का घूमना
  • सांस लेने में तक़लीफ़ होना
  • जी मचलना
  • उल्टियां होना
  • अपचन
  • ज़रूरत से ज़्यादा थकान महसूस करना
  • शरीर के ऊपरी हिस्सों में दर्द महसूस होना- जैसे कि एक या फिर दोनों हाथों में दर्द, पीठ, गर्दन, जबड़े अथवा पेट में दर्द होना आदि साइलेंट हार्ट अटैक के चंद लक्षण हैं।

क्या हैं साइलेंट हार्ट अटैक के कारण?

कई लोग किसी अहम लक्षण का पता लगने से पहले ही 'साइलेंट हार्ट अटैक' का शिकार होते हैं, जिसके कई कारण हैं। कुछ लोगों में दर्द सहने की शक्ति अधिक होती है। ऐसे में वे इन लक्षणों को आसानी से समझ नहीं पाते हैं। कुछ स्थिति में तो मधुमेह और किडनी की बीमारी से लम्बे समय से ग्रसित लोगों की दर्द सहनेवाली नब्ज़ प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे में व्यक्ति को हार्ट अटैक संबंधी लक्षणों का एहसास नहीं होता है। (हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्‍ट में क्‍या है अंतर? एक्‍सपर्ट से जानें इन स्थितियों में बचाव के टिप्‍स)

साइलेंट हार्ट अटैक के वक्त क्या कुछ करना चाहिए?

पूरी तरह से साइलेंट रहने वाले हार्ट अटैक के बारे में कतई पता नहीं चलता है। इसका पता अमूमन तब चलता है, जब मरीज़ किन्हीं और वजहों से डॉक्टर के पास जाता है और आम ईसीजी अथवा एकोकार्डियोग्राम के ज़रिए पुराने हार्ट अटैक के बारे में पता चलता है। अगर आपको ऐसे ग़ैर-मामूली लक्षणों का आभास हो, तो आप फ़ौरन अपने डॉक्टर से मिलिए और उनसे फ़ौरी तौर पर अपनी जांच कराइये।

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साइलेंट हार्ट अटैक से किस तरह से बचा जा सकता है?

जीवनशैली में बदलाव और स्वस्थ रहने पर हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। अगर आपको किसी तरह के ख़तरे का आभास हो, तो आप उ‌न ख़तरों का आकलन कर लें और फिर उन ख़तरों को कम करने के लिए अपना इलाज कराएं। 

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किन बातों से साइलेंट हार्ट अटैक का ख़तरा अधिक होता है?

साइलेंट हार्ट अटैक और लक्षण दर्शानेवाले हार्ट अटैक के खतरे एक समान होते हैं। जिन चीज़ों से साइलेंट हार्ट अटैक का ख़तरा होता है, उनमें धूम्रपान करना अथवा तंबाखू का सेवन, व्यायाम न करना, मोटा होना या अधिक वज़नी होना, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, बुढ़ापा और परिवार के लोगों में हृदय संबंधी बीमारियां से जुड़े किसी इतिहास होना आदि शामिल हैं।

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