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World Heart Day 2019: भारत में सबसे ज़्यादा मौत का कारण बनता है Heart Attack, जानें इसकी 11 वजहें

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By शीतल बिष्‍ट , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 28, 2019
World Heart Day 2019:  भारत में सबसे ज़्यादा मौत का कारण बनता है Heart Attack, जानें इसकी 11 वजहें

World Heart Day 2019: विश्‍व हृदय दिवस के मौके पर हम आपको हृदय रोग के शुरूआती लक्षणों और हृदय रोग के खतरे से जुड़े कारणों के बारे में बताएंगे। क्‍योंकि हर साल भारत में सबसे ज्‍यादा मौत का कारण बनता है Heart Attack। 

हृदय रोग उन स्थितियों के समूह को कहते हैं जो हृदय और रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। दुनियाभर में एक वर्ष में होने वाली अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हृदय रोग है। वर्ष 2016 में दुनियाभर में लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हृदय रोग की वजह से होती है। "भारत के राज्यों में हृदय रोग और उनके जोखिम कारकों के बदलते पैटर्न रोग अध्ययन का वैश्विक बोझ 1990-2016" की रिपोर्ट के अनुसार हृदय रोग ने वर्ष 2016 में भारत में लगभग 2.8 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। जोवर्ष 1990 में 1.5 मिलियन हुई मौतों की तुलना में अधिक है।

इस अध्ययन के अनुसार भारत में मृत्युदर (272 प्रति 100,000) वैश्विक औसत (235 प्रति 100,000) से अधिक है। भारत में हृदय रोग काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है और हृदय रोग से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या में हर रोज बढ़ोत्‍तरी होती जा रही है। यह देखा गया है कि भारतीय पश्चिमी देशों की तुलना में ज्‍यादा प्रभावित हुए हैं। यहां अधिकतर लोगों में हृदय रोग दो प्रकार हैं 'इस्केमिक हृदय रोग' (जब दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती) और 'स्ट्रोक' (मस्तिष्क में धमनियों को प्रभावित करने वाली बीमारी) इन दो रूपों में होता है। इसलिए, उन कारकों को समझना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है जो हृदय रोग बढ़ाते हैं और आपको जोखिम में डाल सकते हैं साथ ही आप इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं। 

हृदय रोग के जोखिम

हृदय रोगों के विकास के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों को संशोधित किया जा सकता है (जिसके खिलाफ रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं) और गैर-परिवर्तनीय (जिसके खिलाफ निवारक उपाय नहीं किए जा सकते हैं)।इनमें से कुछ कारक निम्नलिखित हैं: -

परिवर्तनीय जोखिम कारक 

उच्चर क्तचाप- 

उच्च रक्तचाप को सिस्टोलिक दबाव के रूप में 140 या डायस्टोलिक रक्तचाप 90 से अधिक के रूप में परिभाषित किया गया है और इसका इलाज काफी जरूरी है। हालांकि, एक सिस्टोलिक बीपी 130 -139 मिमी एचजी और एक डायस्टोलिक दबाव 80-89 मिमी एचजी को सामान्य बीपी कहा जाता है और इसे आक्रामक जीवनशैली प्रबंधन द्वारा नियंत्रण में किए जाने की आवश्यकता है। सामान्य या इष्टतम रक्तचाप 90-120 मिमी एचजी सिस्टोलिक और 60-80 मिमी एचजी डायस्टोलिक की सीमा के भीतर है। 

धूम्रपान

जो लोग दिन में दो बार से ज्यादा धूम्रपान करते हैं, उन्हें हृदय रोग होने खतरा अधिक होता है। 

हाईकोलेस्ट्रॉल

उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन का हाई लेवल हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकता है।

डायबिटीज

डायबिटीज यानि मधुमेह और हृदय रोग के कुछ सामान्य जोखिम कारक हैं। मधुमेह से पीडि़त रोगी अक्सर एक समय के बाद हृदय रोग से पीडि़त हो जाते हैं। 

प्री डायबिटीज 

टाइप -2 डायबिटीज के बढऩे का जोखिम उन लोगों के लिए होता है जिनका ब्लड शुगर लेवल बिना कुछ खाए पिये 100 मिलीग्राम/डीएल से 125 मिलीग्राम/डीएल होता है। इस स्थिति को प्री-डायबिटीज के रूप में जाना जाता है और इससे पीडि़त लोगों को दिल की बीमारियां होने का अधिक खतरा होता है।

आलस या निष्क्रिय जीवन शैली

अगर आप किसी तरह की कोई एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

असामान्य वजन

वो लोग जो मोटापे और अधिक वजन के शिकार है, उन्हें हृदय रोग होने की संभावना ज्यादा होती है। इससे पाचन क्रिया पर नकारात्मक असर पड़ता है। भारत के में 23 या 23 से अधिक बीएम आई वाले लोगों को अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं अत्यधिक सक्रिय लोगों पर यह नियम लागू नहीं होता है।

कमर की चर्बी 

कमर के आस पास चर्बी का एकत्र होना भी हृदय रोग को बढ़ा सकता है। भारतीय पुरुषों में कमर की गोलाई 90 सेमी और भारतीय महिलाओं के कमर की गोलाई 80 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वो खतरनाक स्थिति में आता है।

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गैर-परिवर्तनीय जोखिम कारक

उम्र

जिन लोगों की उम्र 65 वर्ष या उससे ज्यादा हो जाती है, उन्हें हृदय रोग होने की ज्यादा होती है। 

परिवार का इतिहास

वहीं जिन लोगों के परिवार में पहले ही लोगों को हृदय रोग है, तो वहां भी हृदय रोग होने की स्थिति बनी रहती है। 

लिंग

हृदय से जुड़ी बीमारियां महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा होती हैं। महिलाओं में इस तरह की स्थिति पुरुषों के मुकाबले 10 साल के बाद दिखाई देती हैं। 

हृदय रोग से जुड़े लक्षण क्या हैं?

आमतौर पर हृदय रोग की शुरुआत के साथ देखे जाने वाले कुछ सामान्य लक्षण हैं- 

आईएचडी हार्ट

  • छाती में दर्द
  • बाहों, कोहनी, जबड़े, पीठ या बाएं कंधे में तकलीफ
  • सांस लेने में तकलीफ 
  • चक्कर आना
  • सिर में हल्का दर्द रहना
  • बेहोशी
  • दिल की धड़कन का भी तेज और कम होना

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सीएडी मस्तिष्क

  • इस्कीमिक अटैक

पीवीडी

  • शरीर के विभिन्‍न अंगों में दर्द, विशेष रूप से पैर और जांघों में



हृदय रोग से बचने के उपाय

हृदय रोग को शुरुआत में रोकने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा जाना जरूरी है-

  • रोगियों को धूम्रपान और तंबाकू के सेवन को सीमित करने की सलाह दी जाती है।
  • दिल को स्वस्थ रखने के लिए 30 मिनट का नियमित व्यायाम महत्वपूर्ण है।
  • स्वस्थ और पौष्टिक आहार खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है, जिससे हृदय रोग की संभावना कम हो जाती है।
  • अधिक वजन वाले या मोटे लोगों को वजन कम करने की दिशा में काम करना चाहिए क्योंकि यह ट्राइग्लिसराइड्स और ब्‍लड प्रेशर के स्तर को कम करने में काफी मदद कर सकता है।
  • शरीर और अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए उचित नींद बेहद जरूरी है।
  • ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना चाहिए।

यह लेख डॉक प्राइम डॉटकॉम की मेडकिल टीम से सीनियर कंसलटेंट डॉ.बिनिता प्रियंबदा से बातचीत पर आधारित है। 

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