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विश्व कैंसर दिवस : भारत में लगातार बढ़ रहे हैं कैंसर के मरीज, जानें क्या है आकड़ा

कैंसर By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 04, 2019
विश्व कैंसर दिवस : भारत में लगातार बढ़ रहे हैं कैंसर के मरीज, जानें क्या है आकड़ा

कैंसर एक ऐसी खौफनाक और जानलेवा बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं।

कैंसर एक ऐसी खौफनाक और जानलेवा बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं। इसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति लगभग जीने की उम्मीद ही छोड़ देता है। 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनान का मकसद लोगों में कैंसर के प्रति जागरुकता फैलाना है। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि ये बहुत ही दुख की बात है कि वर्तमान समय में भारत कैंसर के मामलों में होने वाली संभावित वृद्धि का सामना कर रहा है। हमारे देश में लगातार कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वर्ष 2025 के अंत तक भारत में कैंसर रोगियों की संख्या वर्तमान मरीजों की संख्या से 5 गुनी हो जाएगी। दुख की एक बात यह भी है कि कैंसर की चपेट में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक आ रही हैं। आज हम आपको भारत में कैंसर का आंकड़ा बता रहे हैं। 

हर साल बढ़ रहे हैं 12.5 लाख मरीज

भारत में साल दर साल कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहरी लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान की वजह से पिछले सालों में भारत में कैंसर के रोगियों की संख्या में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसमें भी भारतीय महिलाओं में कैंसर की बीमरी पुरुषों की तुलना में अधिक बढ़ी है। भारत में हर साल कैंसर के 12.5 लाख नए मामले सामने आते हैं। जिसमें सात लाख मरीज महिलाएं होती हैं।

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कैंसर का हर नया मरीज है भारतीय

एनसीआई यानि कि नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, विश्व में कैंसर का हर 13वां नया मरीज भारतीय है। साथ ही स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा तेजी से हमारे देश में फैल रहा है। हर साल कैंसर के कारण 3.5 लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। एक्सपर्ट्स की आशंका है कि 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 4.5 लाख तक हे सकता है।

1 करोड़ मरीज और 2000 कैंसर स्पेशलिस्ट

हमारे देश में इस समय 1 करोड़ से ज्यादा कैंसर रोगियों की देखभाल के लिए सिर्फ 2000 कैंसर स्पेशलिस्ट हैं। देश की स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही बुरी अवस्था में हैं, यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है। ये हैरान करने वाली बात है कि हर साल भारत में सिर्फ एक नया गाइनेकोलॉजिकल ओंकोलॉजिस्ट (स्त्रियों में होने वाले कैंसर का विशेषज्ञ डॉक्टर) तैयार होता है जो कि केवल गर्भाशय, ओवरी और योनि में होने वाले कैंसर का इलाज करते हैं।

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यह है देश की स्वास्थ्य वर्तमान स्थिति

  • देश में प्रति 10,000 लोगों पर 9 हॉस्पिटल बेड हैं।
  • पैरामेडिकल स्टाफ और लैब टेक्नीशियन आदि की भारी कमी है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 300 से ज्यादा कैंसर अस्पतालों में से 40 फीसदी में जरूरी सुविधाओं और उपकरणों की कमी है।
  • ऐसे में कैंसर से लड़ने के लिए 600 नए कैंसर स्पेशलिटी अस्पतालों की जरूरत है।

2020 तक 20% तक होगी वृद्धि

अगर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों की मानें, तो वर्ष 2020 तक कैंसर के मामलों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। इसे कम करना तभी संभव है, जब बड़े स्तर पर इसके लिए कदम उठाए जाएं और मेडिकल कॉलेजों में सीटों को बढ़ाया जाए। क्योंकि कैंसर कोई एक बीमारी नहीं है और ये कई तरह की होती है। कैंसर 200 से भी ज्यादा तरह की बीमारियों का समूह है और इन सारे तरहों के कैंसर के इलाज के लिए हमारे पास सीटें बहुत कम हैं। 

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