World Brain Day 2020: ब्रेन कमजोर होने के पीछे छिपे हैं ये कारण, जानें आप तो नहीं कर रहे ये छोटी-छोटी गलतियां

Updated at: Jul 22, 2020
World Brain Day 2020: ब्रेन कमजोर होने के पीछे छिपे हैं ये कारण, जानें आप तो नहीं कर रहे ये छोटी-छोटी गलतियां

टीवी पर हम अक्सर लोगों को ब्रेन ट्यूमन, स्ट्रोक जैसी बीमारियों से मरते हुए देखते हैं लेकिन क्या आपने जानने की कोशिश की है कि ऐसा क्यों होता है। 

Jitendra Gupta
अन्य़ बीमारियांWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 22, 2020

जब भी कभी आप टीवी पर कोई कार्यक्रम या फिर बड़े पर्दे पर फिल्में देखते हैं तो आपको कहीं न कहीं किसी की मां, पिता या फिर भाई को ब्रेन सर्जरी, ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक (पक्षाघात) और अचानक भूलने की बीमारी जैसी कुछ दिखाई पड़ती है। आप उस सीन को देखते हैं और चंद मिनटों में भूल भी जाते हैं और हमारा ज्ञान वहीं तक सीमित रह जाता है। ये गंभीर बीमारियां जितनी छोटी दिखाई जाती है उतनी है नहीं क्योंकि ये किसी भी व्यक्ति की मौत का कारण बन सकती हैं। यही कारण है कि मस्तिष्क स्वास्थ्य के विषय को ज्यादातर अनदेखा किया जाता है।

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वक्त की जरूरत है कि मस्तिष्क स्वास्थ्य की जागरूकता को बढ़ाया जाए। हमारे खान-पान और जीवनशैली का हमारे मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। साथ ही, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के शुरुआती लक्षणों के बारे में जानना भी जरूरी है ताकि शुरुआती उपचार शुरू किया जा सके। इन शुरुआती संकेतों को जानकर व्यक्ति की जान तक बचाई जा सकती है। हालांकि हमें अपने जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की जरूरत है ताकि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। 

मस्तिष्क के स्वास्थ्य के साथ रखें भोजन का ख्याल

ये कहावत बरसों से चली आ रही है "आप जैसा खाते हैं वैसा ही दिखते हैं। और यह कहावत मस्तिष्क स्वास्थ्य के मामले में बिल्कुल फिट बैठती है। कुछ लोग मानते हैं कि डाइट में ड्राई फ्रूट्स का सेवन बढ़ाने से ही आप हेल्दी हो सकते हैं इसलिए इन्हीं चीजों की आवश्यकता है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। आपको एंटीऑक्सिडेंट युक्त खाद्य पदार्थों जैसे अंगूर, नीली जामुन, शकरकंद, हरी सब्जियां, मछली आदि की खपत को बढ़ाने की आवश्यकता है, जो मस्तिष्क के विकास में मदद करते हैं। गौर करने वाली बात ये है कि, 60 प्रतिशत मस्तिष्क फैट से बना होता है, इसलिए अपने दैनिक भोजन में हेल्दी फैट शामिल करें, और ओमेगा 3 फैटी एसिड भी मस्तिष्क की कोशिकाओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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नियमित रूप से एक्सरसाइज करें 

मस्तिष्क स्वास्थ्य किसी भी मायने में शारीरिक स्वास्थ्य से अलग नहीं है। नियमित रूप से एक्सरसाइज करना ब्लड प्रेशर और बेहतर ब्लड सर्कुलेशन को बनाए रखने में मदद करता है जो मस्तिष्क के समुचित कार्य के लिए आवश्यक है। योग और ध्यान भी मस्तिष्क के कामकाज को बढ़ावा देता है।

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शारीरिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क

हालांकि हर बीमारी या शारीरिक रूप से कोई भी परेशानी हमारे मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से पीड़ित होना हमारे मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रमुख रूप से प्रभावित कर सकता है। क्योंकि ब्लड प्रेशर इन दो रोगों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसका घटने व बढ़ने के परिणामस्वरूप स्ट्रोक, मस्तिष्क रक्तस्राव आदि हो सकता है। दरअसल हमारा रक्त हमारी रक्त वाहिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क तक जाता है इसलिए उचित दवा लें और अपने बीपी की जांच कराते रहें। 

कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी हैं जिनके बारे में लोगों को अधिक जानकारी होनी चाहिए जैसेः 

पार्किंसंस रोग

यह एक डिजेनेरेटिव विकार का रूप है और इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। साल दर साल इसके लक्षणों में प्रगति होती रहती है। 

• ऐंठन के साथ कठोरता

• सुस्ती या बोलचाल की भाषा में बदलाव। 

• पोश्चर में दिक्कत आना, छोटे-छोटे कदम रखना और असंतुलन होना। 

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अल्जाइमर रोग

रोजाना के जीवन में हाल ही की घटनाओं को भूलना इसका एक प्रारंभिक लक्षण है। यह एक प्रकार का पागलपन है जो धीरे-धीरे शुरू होता है और धीरे-धीरे बढ़ता है। इस बीमारी की शुरुआत में पहचान बीमारी की गति को मंद कर सकती है।

ब्रेन ट्यूमर

यह मूल रूप से मस्तिष्क की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि है जो मस्तिष्क पर अपनी संख्या और आकार के विकास के साथ दबाव बनाना शुरू कर देती है। बार-बार उल्टी के साथ सिरदर्द होना इसका संकेत है। 

स्वाद और गंध महसूस न होना

स्वाद की भावना खोने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द डिस्ग्यूसिया है और स्वाद की हानि को एनोस्मिया कहा जाता है। अब विडंबना यह है कि दोनों ही कोविड के प्रारंभिक लक्षण भी हो सकते हैं।

सिरदर्द

सिरदर्द एक प्रारंभिक लक्षण हो सकता है और कोविड संक्रमण की चिंता / भय के कारण सिरदर्द हो सकता है।

स्ट्रोक

ऐसा देखा गया है कि कोविड रोगियों का रक्त गाढ़ा हो जाता है जिससे ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। पश्चिमी देशों में, युवा रोगियों को स्ट्रोक होते देखा जाता है। स्ट्रोक के किसी भी मरीज को 4.5 घंटे के भीतर इलाज करना होता है। पहले से ही स्ट्रोक, बीपी की समस्या और मधुमेह से पीड़ित रोगी डॉक्टरों के संपर्क में रहें और नियमित दवाएं निर्धारित रूप से लेते रहें।

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