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उम्र बढ़ने के साथ घटने लगती है नींद: शोध

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 24, 2016
उम्र बढ़ने के साथ घटने लगती है नींद: शोध

अक्‍सर बुजुर्ग लोग कम नींद की शिकायत करते हैं, एक तिहाई से एक चौथाई बुजुर्ग नींद न आने से परेशान रहते हैं! ऐसा क्‍यों होता हैं आइए इस हेल्‍थ न्‍यूज के माध्‍यम से जानें।

अक्‍सर बुजुर्ग लोग कम नींद की शिकायत करते हैं, एक तिहाई से एक चौथाई बुजुर्ग नींद न आने से परेशान होते हैं। कई बार बीमारियों की वजह से उनके लिए सो पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन, कई बुजुर्ग लोग सेहतमंद होने के बावजूद ठीक से नहीं सो पाते। ऐसा क्‍यों होता हैं आइए इस हेल्‍थ न्‍यूज के माध्‍यम से जानें।

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हालांकि लंबे वक्‍त तक ठीक से ना सो पाने पर सेहत पर कई तरह से बुरा असर पड़ता है। इससे बीमारियों से लड़ने की हमारी ताकत कमजोर पड़ती है। हम अच्छा नहीं महसूस करते। इसलिए हमारी अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद जरूरी है। मगर, जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, नींद की हमारी जरूरत कम होती जाती है। इसलिए अगर बुढ़ापे में कम नींद आती है, तो ज्‍यादा परेशान होने की जरूरत नहीं।


रूस में रिसर्च करने वाले अर्केडी पुतिलोव का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ गहरी नींद लाने वाली दिमाग की तरंगें कमजोर पड़ जाती हैं। जिसके कारण बुजुर्गों का सोना मुश्किल होने लगता है। इसी तरह बुजुर्गों की सिर्केडियन रिदम, या शरीर की घड़ी की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है। क्योंकि शरीर का तापमान कम हो जाता है। साथ ही मेलाटोनिन नाम का हार्मोंन भी कम निकलता है।


अमेरीका की मिशीगन यूनिवर्सिटी की एन आर्बर ने दुनिया भर के करीब पांच हजार लोगों के सोने की आदत पर सर्वे किया। इसमें एक ऐप की मदद ली गई। इसके नतीजों से पता चला कि युवाओं में कुछ जल्दी उठने वाले थे तो कुछ देर रात तक जागने वाले, वहीं बुजुर्गो में आमतौर पर सोने की आदत एक जैसी पाई गई।


ज़्यादातर उम्रदराज लोग सुबह जल्दी उठने वाले थे। वो रात में जल्दी सो भी जाते थे। इस सर्वे में ये भी पता चला कि चालीस की उम्र के लोग सबसे कम सो पा रहे थे। इससे पता चलता है कि बुजुर्गों की बॉडी क्लॉक में बदलाव की वजह से वो कम सो पाते हैं। मगर इसका ये मतलब नहीं कि उन्हें कम नींद की जरूरत होती है। साथ ही दिन के वक्‍त की नींद उतनी अच्छी नहीं होती, जितनी रात की नींद। ऐसे में रात की नींद अच्छी नहीं आई, तो दिन में लोग आलस और नींद महसूस करते रहते हैं।


2008 में अमरीका के ब्रिंघम वुमेन हॉस्पिटल में कुछ लोगों को दिन में 16 घंटे सोने का मौक़ा दिया गया। 60 से 72 साल की उम्र के लोगों ने औसतन साढ़े सात घंटे की नींद ली। वहीं 18 से 32 साल की उम्र वालों ने नौ घंटे की नींद का मजा लिया। आप इसका मतलब निकाल सकते हैं कि जवानों को ज़्यादा नींद की ज़रूरत थी। लेकिन ये भी हो सकता है कि वो ज़्यादा थके थे इसलिए उन्हें ज़्यादा नींद आई।


मगर, सर्वे करने वालों की इसी टीम ने जब इंग्लैंड की सरे यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर तजुर्बा किया तो उसके दूसरे ही नतीजे निकले। एक बार फिर बुजुर्ग, नींद के लिए जूझते पाए गए। उन लोगों पर ख़ास निगरानी रखी गई। रात में जैसे ही उन्हें नींद आने लगती, रिसर्च करने वाले शोर या रोशनी करके उनकी नींद में खलल डालते। अगले दिन ये थके हुए बुजुर्ग, जवान लोगों की ही तरह आराम से दिन में ऊंघते नज़र आए। मतलब ये कि बुजुर्गों के शरीर को भी जब नींद की ज़रूरत हुई तो वो सो सके।


अमरीका का नेशनल स्लीप फाउंडेशन कहता है कि वयस्कों को सात से नौ घंटे की नींद चाहिए। वहीं 65 बरस से ज़्यादा उम्र के लोगों को 7 से 8 घंटे की नींद की ज़रूरत होती है। इससे ये मतलब मत निकालिए कि बुजुर्गों को कम नींद की ज़रूरत होती है। हां, रात में देर तक जागने के बाद सुबह उठकर थकान महसूस करना बहुत बुरा है। ये आपकी सेहत ख़राब कर सकता है। इसको गंभीरता से लेकर सोने से जुड़ी आदतें बदलने की कोशिश करनी चाहिए. वरना आपकी सेहत और बिगड़ सकती है।

Image Source : Getty

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