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सर्दियों में भी जरूरी है सनस्क्रीन, जानें कितना होना चाहिए एसपीएफ

फैशन और सौंदर्य By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 17, 2018
सर्दियों में भी जरूरी है सनस्क्रीन, जानें कितना होना चाहिए एसपीएफ

घर से बाहर निकलते वक्त सनस्क्रीन क्रीम या लोशन का इस्तेमाल ज़रूर किया जाए।

सौंदर्य सनस्क्रीन कितनी तरह की होती है? उसका एसपीएफ कितना होना चाहिए? किस स्किन पर कौन-सी सनस्क्रीन लगाना सही रहेगा, इन सभी बातों की जानकारी अनिवार्य है। आपके लिए कौन-सी सनस्क्रीन बेस्ट है, ये सवाल लगभग हर व्यक्ति का होता है। क्योंकि हम सनस्क्रीन तो लगाते हैं लेकिन हमारी स्किन के हिसाब से कौन सी लगानी चाहिए ये बहुत कम लोगों को पता होता है। मौसम चाहे कोई भी हो, यूवी किरणों का प्रभाव हमारी त्वचा पर पड़ता है। कई बार धूप से बचने के साधारण उपाय अपनाने के बाद भी त्वचा प्रभावित हो जाती है। इससे बचने का एक ही उपाय है कि घर या घर से बाहर निकलते वक्त सनस्क्रीन क्रीम या लोशन का इस्तेमाल ज़रूर किया जाए। जानें, इससे जुड़ी कुछ जानकारियों के बारे में।

झुर्रियों के लिए जिम्मेदार है धूप

एक शोध के अनुसार, उम्र से पहले त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियां, फाइन लाइंस, त्वचा का फटना, रंगत पर प्रभाव, झांइयों का सबसे बड़ा कारण यूवी किरणें होती हैं। ज़्यादा देर तक धूप में रहने से न सिर्फ त्वचा पर कालापन आ जाता है, बल्कि त्वचा के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। सनस्क्रीन लोशन का चुनाव करते समय उसमें मौज़ूद सन प्रोटेक्शन फैक्टर यानी एसपीएफ की मात्रा की सही जानकारी होना ज़रूरी हो। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के एक्सपर्ट मानते हैं कि चाहे गर्मी हो या सर्दी हो, कम से कम एसपीएफ 15 की मात्रा वाली सनस्क्रीन लगाना बेहतर रहता है। लेकिन बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के दौरान एसपीएफ 15 से लेकर एसपीएफ 30 वाले सनस्क्रीन लोशन ज्य़ादा प्रभावी होते हैं।

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जानें एसपीएफ नंबर

यूवीबी किरणों की वजह से होने वाले सनबर्न से बचने के लिए आमतौर पर एसपीएफ का इस्तेमाल किया जाता है। सनस्क्रीन में एसपीएफ की मात्रा जितनी ज्य़ादा होगी, त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट बी किरणों से होने वाला नुकसान उतना कम होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके सनस्क्रीन में एसपीएफ की मात्रा 15 है तो त्वचा को 15 गुना ज्य़ादा सन प्रोटेक्शन मिलता है। वहीं अगर आप सनस्क्रीन का इस्तेमाल किए बगैर तेज़ धूप में निकलती हैं तो त्वचा झुलसने की आशंका 15 गुना तक बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, सनस्क्रीन या सनब्लॉक क्रीम का इस्तेमाल नहीं करने पर 20 मिनट के भीतर ही त्वचा झुलस सकती है। वहीं अगर आप सनस्क्रीन लगाकर बाहर निकलती हैं तो चार से पांच घंटों तक बिना किसी परेशानी के तेज़ धूप में घूम-फिर सकती हैं।

सनस्क्रीन बनाम सनब्लॉक

यूवीए किरणें ज्य़ादा खतरनाक होती हैं क्योंकि ये त्वचा पर लंबे समय तक असर छोड़ती हैं। यूवीबी किरणें सनबर्न और फोटो एजिंग के लिए जि़म्मेदार होती हैं। 7 शेड्स सलॉन की ब्यूटी एक्सपर्ट पुनीति चौधरी के मुताबिक, सनस्क्रीन यूवीबी किरणों को मामूली रूप से फिल्टर करती है, जबकि सनब्लॉक में जि़ंक ऑक्साइड होता है, जो दोनों तरह की किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। 

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ऐसे करें अप्लाई

सनस्क्रीन का चुनाव अपनी त्वचा के अनुसार ही करें। अधिकतर लोगों की शिकायत होती है कि सनस्क्रीन लगाने के बाद त्वचा की रंगत डार्क और चेहरा चिपचिपा हो जाता है, इसलिए वे सनस्क्रीन नहीं लगाते। सनस्क्रीन लगाने के बाद त्वचा चिपचिपी लगे तो समझें कि आपने गलत सनस्क्रीन का चुनाव किया है। आइए जानते हैं स्किन टाइप के हिसाब से कैसे लगाएं सनस्क्रीन—

  • नॉर्मल स्किन टाइप वालों की त्वचा से ऑयल नहीं निकलता और वह साफ नज़र आती है। ऐसी स्किन पर क्रीम बेस्ड सनब्लॉक लगाना सही रहता है। 
  • कील-मुंहासे युक्त त्वचा के लिए ऑयल फ्री सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करना बेहतर होगा, यानी एसपीएफ 50 युक्त ऑयल फ्री सेंसिटिव सनस्क्रीन। इसमें एवोबेंज़ोन और ऑक्सिबेंज़ोन नामक केमिकल होते हैं।
  • ऑयली त्वचा पर जेल या अक्वा बेस्ड एसपीएफ फॉर्मुलेशन का चुनाव करना चाहिए या ऑयल फ्री सनस्क्रीन यूज़ करें। 
  • अगर त्वचा ड्राई है तो मॉयस्चराइज़र बेस्ड सनस्क्रीन लगाना ही बेहतर रहता है। अगर यह न मिले तो पहले मॉयस्चराइज़र लगाएं और फिर सनस्क्रीन अप्लाई करें। 
  • अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो इस पर हाइपोएलर्जेनिक द्रव्य से युक्त सनस्क्रीन इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रखें कि ये खुशबूदार न हो। टाइटेनियम डाइऑक्साइड व जि़ंक ऑक्साइड नाम के खनिज अल्ट्रावॉयलेट ए और बी किरणों का मुकाबला कर त्वचा की रक्षा करते हैं। 

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