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क्या पैसे कर देते हैं आपकी शादी को बरबाद

डेटिंग टिप्स By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 13, 2014
क्या पैसे कर देते हैं आपकी शादी को बरबाद

आपने अक्सर शादियों में पैसों की बर्बादी के बारे में लोगों को बात करते सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैसा आपकी शादी को भी बर्बाद कर सकता है।

भारत में शादियां किसी उत्‍सव से कम नहीं होतीं। यहां सभी मेहमान जमा होते हैं और विवाहोत्‍सव का आनंद उठाते हैं। लेकिन, इन शादियों पर होने वाला खर्च अक्‍सर चर्चा में रहता है। कई बार खर्च 'बर्बादी' की सीमा तक चला जाता है। लेकिन पैसा कई बार शादी को बरबाद भी कर सकता है। 

Will Money Destroy Your Marriage

 

अक्‍सर देखा गया है कि शादी में कई तामझाम किये जाने के बाद भी लोग चिंताग्रस्‍त रहते हैं कि कहीं कोई कमी न रह जाए। इस विषय पर काफी बातचीत हो चुकी है। हालांकि नयी पीढ़ी इस‍ विषय को लेकर सजग हो रही है, लेकिन शादी को लोग अपनी शान-ओ-शौकत दिखाने का जरिया मानते हैं और इस सोच में कोई बदलाव आता नजर नहीं आ रहा। लेकिन पैसा सिर्फ शादियों में होने वाला ही बर्बाद नहीं होता, यह आपकी शादी को भी बर्बाद कर सकता है। इस लेख में जानें कैसे।

 

बदलते समाज में शादियां जन्‍म-जन्‍मांतर का साथ नहीं रह गयी हैं। लोगों की प्राथमिकतायें बदल रही हैं। अब यदि रिश्‍ते में आपसी तालमेल कम हो जाए, तो लोग अधिक समझौता करने के स्‍थान पर अपनी राहें अलग करने का विकल्‍प चुनते हैं। शहरों में यह प्रवृत्ति अधिक देखी जाती है। इसके अलावा ऐसे भी मामले सामने आते रहते हैं जब शादी के इंतजामों में कमी होने के कारण कन्‍या पक्ष को उलाहना अथवा सामाजिक अपमान झेलना पड़ा हो।

 

इस चीज को हम कुछ इस प्रकार भी समझ सकते हैं। दो जोड़े एक ही तरह की कार खरीदते हैं। पहला जोड़ा अपनी गाड़ी की अच्छी देखभाल करता है और उसे बड़ी एहतियात से चलाता है। इसलिए उनकी कार खराब नहीं होती। वहीं दूसरा जोड़ा कार की देखभाल करने में न तो अपना समय लगाता है और न ताकत, यही नहीं वह उसे काफी लापरवाही से चलाता है। उनकी कार बंद हो जाती है और किसी काम की नहीं बचती। यहां गलती किसकी है। कार की या मालिक की? जाहिर सी बात है कि कार के खराब होने का सबसे बड़ा जिम्मेदार उसका मालिक है। ठीक यही चीज शादी पर भी लागू होती है।

 

शादी के मामले में भी यह सच है। हालांकि आज कई शादियां टूटने का सबसे बड़ा कारण है, 'पैसा'। जी हैं खासतौर पर भारत में शादियों में पैसे का बढ़ा लेन-देन चलता है। जिसे हम दहेज कहते हैं। यूं तो दहेज लेना और देन दोनो ही गलत है, और कानूनन अपराध भी लेकिन आज भी हमारे देश में धड़ल्ले से दहेज लिया और दिया जाता है। कई बार शादियों के इंतजाम में कोई खोट न होने के बावजूद भी शादियां बड़े खुशनुमा तरीके से होती हैं और कामयाब रहती हैं। लेकिन सच में शादी किसी कार की तरह होती है, जिसे सही-सलामत रखने के लिए लगातार देखभाल की जरूरत होती है।

 

निम्न कुछ पैसों से जुड़े कारण हैं जो आपकी शादी के लिए खतरा बन सकते हैं।

 

वित्त के बारे में बात न करना

हर काम का एक वक्त और जगह होती है, लेकिन पैसा एक ऐसी चीज है जिसके बारे में बार करने के लिए सही जगह और समय निकाल पाना काफी मुश्किल होता है। कई कपल तो एक दूसरे से पैसों के बारे में (कमाई, खर्च, सेविंग्स, इनवेस्तमेंट आदि) एक दूसरे से बात ही नहीं करते। लेकिन यह गलत है, आप दोनो को अपने पैसों के बारे में एक दूसरे से जानकारियां साझा करनी चाहिए। यह इतना ही जरूरी है जितना एक दूसरे के साथ किसी डेट पर जाना। वित्त के बारे में बात न करने से आपका एक दूसरे पर से विश्वास कम होता है, यही नहीं वित्त आपके बीच ऐसा रवैया आपकी शादी को बर्बाद करने का कारण बन सकता है। 

 

प्‍यार खरीदा नहीं जा सकता

यदि आप ऐसा सोचते हैं कि अपनी पत्नी के लिए एक हीरे की अंगूठी खरीद कर आप उसे जीत सकते हैं, तो जनाब अपनी सोच पर एक बार फिर गौर करें। क्योंकि इस तरह के उपहार आपके रिश्ते को कुछ पलों, कुछ दिनों या कुछ महीनों की खुशी तो दे सकते हैं, लेकिन जीवन भर की नहीं। ऐसे उपहार आदि देना गलत नहीं लेकिन, ऐसी सोच कि आप पैसे के बल पर अपने साथी को जीत सकते हैं, गलत है। आपको पैसे के अलावा अपने साथी को प्यार, समय और विश्वास देना जरूरी है।

पैसे को विभाजित करने के तरीके पर सहमत न होना

भले ही आपके जोइंट या सेपरेट अकाअंट्स हों, या फिर दोनों तरह के ही अकाअंट्स हों, इसके कोई खास फर्क नहीं पड़ता। फर्क इस बात से पड़ता है कि आपने अपनी शादी के लिए इसकी एक सही वित्तीय योजना बनाई है या नहीं। यह पति या पत्नी के खर्च करने के तरीकों में भिन्नता की वजह से होता है। कई बार पति पत्नी के बीच खर्च को लेकर विवाद हो जाता है, जो आगे गंभीर परिणामों का कारण भी बनता है। इसलिए यदि एक अलग अकाअंट रखा जाए तो रिश्ते के लिए बेहतर होता है।

एक साथ अपने पैसे आनंद न ले पाना

पैसा हमेशा तनाव या संघर्ष का एक स्रोत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। यह आपके रिश्ते को और मजबूत और खुशनुमा बना सकता है। बशर्ते इस पैसे को अपने संबंध के साथ सकारात्मक तरीके से उपयोग किया जाए। पति-पत्नि के रिश्ते में कई ऐसे यादगार पल होते हैं जो बिना पैसे के कभी पूरे नहीं हो सकते हैं। लेकिन अहम बात ये है कि इसका आनंद साथ और सही प्रकार लिया जा रहा है या नहीं। अध्ययन भी यह बताते हैं कि यदि पैसे का उपयोग साथ में और नए और कारगर तरीकों से किया जाए तो शादियां कही ज्यादा मजबूत होती हैं।
 

जो इंसान जो सिर्फ इस बारे में सोचता है कि उसे अपने रिश्ते से क्या मिल रहा है और क्या नहीं, वह कभी खुश नहीं रह सकता फिर चाहे वह कितनी ही बार शादी क्यों न कर ले। जब दोनों एक-दूसरे की जरूरत पूरी करने पर ध्यान देंगे तभी शादी कामयाब होगी।आपने अपनी शादी के लिए इसकी एक सही वित्तीय योजना बनाई है या नहीं। यह पति या पत्नी के खर्च करने के तरीकों में भिन्नता की वजह से होता है। कई बार पति पत्नी के बीच खर्च को लेकर विवाद हो जाता है, जो आगे गंभीर परिणामों का कारण भी बनता है। इसलिे यदि एक सेपरेट अकाअंट रखा जाए तो रिश्ते के लिए बेहतर होता है।

 

एक साथ अपने पैसे आनंद न ले पाना

पैसा हमेशा तनाव या संघर्ष का एक स्रोत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। यह आपके रिश्ते को और मजबूत और खुशनुमा बना सकता है। बशर्ते इस पैसे को अपने संबंध के साथ सकारात्मक तरीके से उपयोग किया जाए। पति-पत्नि के रिश्ते में कई ऐसे यादगार पल होते हैं जो बिना पैसे के कभी पूरे नहीं हो सकते हैं।
लेकिन अहम बात ये है कि इसका आनंद साथ और सही प्रकार लिया जा रहा है या नहीं। अध्ययन भी यह बताते हैं कि यदि पैसे का उपयोग साथ में और नए और कारगर तकीकों से किया जाए तो शादियां कही ज्यादा मजबूत होती हैं।


जो इंसान जो सिर्फ इस बारे में सोचता है कि उसे अपने रिश्ते से क्या मिल रहा है और क्या नहीं, वह कभी खुश नहीं रह सकता फिर चाहे वह कितनी ही बार शादी क्यों न कर ले। जब दोनों एक-दूसरे की जरूरत पूरी करने पर ध्यान देंगे तभी शादी कामयाब होगी।

 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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