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विधुर जीते हैं अधिक सेहतमंद जीवन

लेटेस्ट By अन्‍य , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 27, 2013
विधुर जीते हैं अधिक सेहतमंद जीवन

क्या विधवा या विधुर जीवन बिताना मुश्किल है? एक ताजा शोध में यह बात सामने आयी है कि विधवा या विधुर अपनी जिंदगी का वास्तव में आनंद लेते हैं।

widowers live happy lifeक्या विधवा या विधुर जीवन बिताना मुश्किल है? विधवा या विधुर अपनी जिंदगी का वास्तव में आनंद लेते हैं, जबकि अकेला इंसान अपनी निजी रिश्ते, घर और सुरक्षा के मामले में परेशानी झेलता है।

 
नेशनल ऑस्ट्रेलियन बैंक वेलबीइंग इंडेक्स के हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक विधवा-विदुर शादीशुदा लोगों की अपेक्षा सेहतमंद जिंदगी जीते हैं। ऑस्ट्रेलिया में 2,100 लोगों पर कराए गए शोध से पता चला कि 18 से 29 साल की महिलाएं दुखी रहती हैं, जबकि विधवा-विदुर अच्छी जिंदगी जीते हैं।



एनएबी के अर्थशास्त्री के मुताबिक, ''उसी तरह, शादीशुदा जोड़ों की अपेक्षा ऐसे लोग मानसिक रूप से स्वस्थ, समुदाय का हिस्सा और सेहतमंद महसूस करते हैं।'' अध्ययन में यह भी पाया गया है कि जिनके बच्चों नहीं होते वे भी खुशहाल रहते हैं, जबकि निम्न आय की अपेक्षा उच्च आय वाले ज्यादा खुश रहते हैं।
छोटे शहरों के लोग बड़े शहरों व ग्रामीण इलाकों की अपेक्षा ज्यादा खुश रहते हैं।

विधुर अपने जीवन में अधिक सुखी और स्‍वस्‍थ रहते हैं, वहीं 18 से 29 वर्ष की आयु के बीच की महिलायें सबसे अधिक दुखी रहती हैं। ऐसा एक ताजा सर्वे में सामने आया है।

ऑस्‍ट्रेलिया में पिछले तीन महीनों में लोगों में खुशी के स्‍तर में करीब एक फीसदी की गिरावट आयी है। यह साल के आखिरी तीन महीनों में 63.5 के स्‍तर पर था, जबकि उससे पिछले तीन महीनों में यह आंकड़ा 64.4 पर था। यह आंकड़ा नेशनल ऑस्‍ट्रेलिया बैंक वेलबीइंग इंडेक्‍स में दिखाया गया है।

जहां का शादीशुदा के स्‍तर की बात है, विधवायें और विधुर सेहतमंद जिंदगी बिताने के मामले में सबसे आगे थे, वहीं सिंगल इसमें सबसे पीछे थे। इस सर्वे में 2100 लोग शामिल थे।

जहां तक बेहतर मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की बात है, विधुरों में स्‍वयं को समाज का हिस्‍सा समझना और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य शादीशुदा लोगों के मुकाबले बेहतर स्थिति में पाया गया।   लोगों की अच्‍छी सेहत का राज था।

निसंतान दंपतियों का स्‍वास्‍थ्‍य भी बच्‍चों वाले दंपतियों से बेहतर पाया गया। वहीं अधिक कमाई करने वाले भी अधिक सेहतमंद थे।

छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के भी गांवों और बड़े शहरों में रहने वालों के मुकाबले अधिक खुश और सेहतमंद होने की बात सामने आयी। अगर उम्र की बात की जाए तो 18 से 29 वर्ष की आयु की महिलाओं में प्रसन्‍नता और सेहत का स्‍तर सबसे कम कपाया गया। वहीं 50 वर्ष से ऊपर की आयु की महिलाओं में यह स्‍तर सबसे अधिक था।

स्‍वास्‍थ्‍य और खुशी के लिए सबसे जरूरी चीजें निजी संबंध, आपका घर और निजी सुरक्षा आदि हैं।

 

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