• shareIcon

    बार-बार पलकों का झपकना इस बीमारी के हैं संकेत, जानें कारण और बचाव

    आंखों के विकार By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 12, 2018
    बार-बार पलकों का झपकना इस बीमारी के हैं संकेत, जानें कारण और बचाव

    पलकों का झपकना आंखों के लिए अच्छा माना जाता है लेकिन अगर पलकें बार-बार झपकने लगें तो यह सामान्य नहीं है। यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

    अगर आपकी पलकें एक सेकंड में कई बार झपकती हैं या फिर आंखों में खुजली होती है या आंखें चौधिंया जाती हैं। जबड़ा भिंचना या मुंह खोलना जैसे चीजें आपके साथ हो रही हैं, तो समझ जाइए आपके अंदर ब्लेफेरोस्पाज्म बीमारी के लक्षण हैं।

    सामान्य व्यक्ति प्रति मिनट 12 बार पलकें झपकाता है। इस हिसाब से एक दिन में दस हजार बार और एक साल में (10,000,000) एक करोड़ बार पलकें झपकाता है।
    eye problem

    क्या है ब्लेफेरोस्पाज्म

    इस बीमारी में पलकों को बार-बार झपकने से न केवल दर्द होता है, बल्कि आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ जाती है, जिसके कारण नेत्रहीनता का भी खतरा भी हो सकता है। ब्लेफेरो का मतलब पलक और स्पाज्म का मतलब अनियंत्रित मांसपेशियों की सिकुड़न होता है। मांसपेशियों के सिकुड़न के कारण पलकें पूरी तरह बंद हो सकती हैं और इस वजह से आंखें और नजरें पूरी तरह सामान्य होने के बाद भी व्यावहारिक नेत्रहीनता उत्पन्न हो सकती है।

    इसे भी पढ़ें: स्क्रीन वाले गैजेट्स के इस्तेमाल से हो सकता है ग्लूकोमा, ये हैं इसके लक्षण

    इलाज

    आम तौर पर ब्लेफेरोस्पाज्म का इलाज ब्लेफेरास्पाज्म मूवमेंट डिसऑर्डर विशेषज्ञों (न्यूरोलॉजी सब-स्पेशिएलिटी) द्वारा किया जाता है। हालांकि आई स्पेशलिस्ट भी इसका इलाज कर सकते हैं। अगर पीडि़त 12 साल या इससे अधिक उम्र का है, तो उसका इलाज आसानी से किया जा सकता है।

    healthy eyes

    आंखों के व्यायाम

    • दाएं हाथ के अंगूठे को सीधा तानकर रखते हुए अन्य अंगुलियों से मुट्ठी बंद कर लें। दाएं हाथ को कंधों की ऊंचाई तक सीधा सामने की ओर उठाकर रखें। अब दृष्टि को बिना पलक झपकाए सामने के अंगूठे पर केन्द्रित करें। थोड़ी देर बाद पलक बंदकर आंखों को आराम दें। यह क्रिया 3 से 4 बार दोहराएं।
    • अब दाएं हाथ को सामने से हटाकर धीरे-धीरे दायीं ओर ले जाएं, उस समय दृष्टि भी अंगूठे पर केन्द्रित रखते हुए दांयी ओर ले जाएं। किन्तु ध्यान रहे कि चेहरे को सामने की ओर स्थिर रखते हुए केवल पलकों को ही दायीं ओर ले जाना है। यही क्रिया बाएं हाथ से बांयी ओर भी करें। इसके बाद आंखों को हल्की बंद कर पलकों को विश्राम दें।
    • चेहरे को सामने की ओर स्थिर रखकर आंख की पुतलियों को ज्यादा से ज्यादा ऊपर की ओर ले जाएं। पलकों को बिना झपकाए पुतलियों को तब तक ऊपर रखें, जब तक आंखों में जलन के साथ पानी न निकलने लगे। यही क्रिया चेहरे को सामने की ओर स्थिर रखते हुए पुतलियों को नीचे, दायीं तथा बायीं ओर करें। इसके बाद, पुतलियों को घड़ी की सुई की दिशा तथा घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में घुमाकर भी करें। आंखों को थोड़ी देर के लिए बंद कर आराम दें।
    • आंखों को ढीली बंद कर दोनों हथेलियों को कसकर तब तक रगडिए जब तक वे अच्छी तरह गरम न हो जाएं। हथेलियों को गरम कर उन्हें बंद आंखों पर सहजता से रख दें। दो-तीन बार इस क्रिया को करने के बाद आंखों को पर्याप्त विश्राम मिल जाता है।
    • आंखों को ढीली बंद कर चेहरे को तनाव रहित कर दें। अब मन को अनन्त आकाश पर केन्द्रित करें। कल्पना करें कि सामने आकाश है। मन को उसी पर एकाग्र करने का प्रयास करें। थोड़ी देर के लिए सोचना-विचारना बंद कर दें।

    ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

    Read More Articles On Eye Diseases In Hindi

    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

    This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK