आयुर्वेद के अनुसार मानसून में दही खाने से सेहत को हो सकते हैं कई नुकसान, जानें इनके बारे में

आयुर्वेद के मुताबिक मानसून के सीजन में खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, इस दौरान दही का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है।

Prins Bahadur Singh
स्वस्थ आहारWritten by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jul 30, 2021
Updated at: Jul 30, 2021
आयुर्वेद के अनुसार मानसून में दही खाने से सेहत को हो सकते हैं कई नुकसान, जानें इनके बारे में

मानसून का सीजन भले ही भयंकर गर्मी और उमस से राहत देने वाला होता है लेकिन इसके आते ही कई प्रकार की सेहत से जुड़ी समस्याएं भी शुरू होने लगती हैं। मानसून शुरू होते ही लोगों के मन में चाय-पकोड़े और गर्मागर्म चीजों के खाने का सवाल आता है लेकिन इसी मानसून के दौरान खानपान में की गयी जरा सी लापरवाही सेहत पर भरी पड़ सकती है। मानसून के सीजन में विशेष रूप से खानपान को लेकर बहुत सतर्क रहना चाहिए। आयुर्वेद के मुताबिक मानसून के सीजन में कुछ चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। सभी लोग जानते हैं कि दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स सेहत के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में दही और छाछ का सेवन खूब किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है की मानसून के सीजन में दही का सेवन करना सेहत के लिए फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि दही में कैल्शियम, प्रोटीन और विटमिन्स प्रचुर मात्रा में होते हैं और इसका सेवन पाचन तंत्र से लेकर पूरी सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक दही का सेवन मानसून के दौरान करने से कई नुक्सान भी हो सकते हैं, आइये जानते हैं इनके बारे में।

बरसात (मानसून) में दही का सेवन (Having Curd During Monsoon)

आयुर्वेद में खानपान को लेकर कई सरे नियम बताये गए हैं। शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाने के लिए इनका पालन करना लाभदायक होता है। मानसून के सीजन में दही के सेवन को लेकर दिल्ली स्थिति अजय आयुर्वेद क्लिनिक के आयुर्वेदाचार्य डॉ अजय पाल का कहना है कि, आयुर्वेद में शरीर के वात, पित्त और कफ की स्थिति के हिसाब से खानपान के नियम हैं। इन्हीं के आधार पर आयुर्वेद में किन चीजों का सेवन कब और कितना करना चाहिए? इस बारे में जानकारी दी गयी है। आयुर्वेद के मुताबिक मानसून यानि बारिश के मौसम में दही का सेवन स्वास्थ्य के हानिकारक हो सकता है। क्योंकि इस दौरान दही का सेवन शरीर वात बढाने का काम करता है। इस दौरान दही खाने से शरीर में बुखार और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा बारिश के मौसम में दही का अधिक मात्रा में सेवन गले में खराश और कफ की समस्या का कारण भी होता है।

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मानसून यानि बारिश के मौसम में दही खाने के नुकसान (Side Effects of Curd During Monsoon)

प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद में आहार और जीवनशैली के नियमों को ऋतुओं (मौसम) के आधार पर बनाया गया है। आयुर्वेद के मुताबिक सावन और भादों यानि भाद्रप्रद के महीने में शरीर में वात बढ़ जाता है और इस मौसम में शरीर में पित्त भी बढ़ने लगता है। इसलिए मानसून यानि बारिश के मौसम में खानपान में लापरवाही सेहत पर भरी पड़ती है। इस दौरान आयुर्वेद के अनुसार कई चीजों का सेवन वर्जित होता है। मानसून में दही का सेवन करने से वात और पित्त बढ़ता है जिसकी वजह से शरीर में कई समस्याओं का खतरा रहता है।

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1. मानसून में दही का सेवन करने से इंफेक्शन का खतरा 

मानसून यानि बारिश के मौसम में दही का सेवन करने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में दही, छाछ जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। दही की तासीर ठंडी होती है इसलिए भी इसका सेवन बारिश के मौसम में नही करना चाहिए।

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2. पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक

आयुर्वेद के अनुसार मानसून में दही का सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि दही का सेवन आमतौर पर पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है लेकिन मानसून के दौरान इसका सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है की आयुर्वेद में मानसून के दौरान इसका सेवन न करने की सलाह दी जाती है।

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3. मानसून में दही का सेवन करने से कफ और बलगम की समस्या 

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक मानसून के सीजन में दही का सेवन करने से पित्त और वात दोष बढ़ जाते हैं। इस दौरान दही का सेवन करने से गले में खराश की समस्या भी हो सकती है। मानसून में दही खाने से कफ और बलगम बढ़ने लगता है जिसकी वजह से ये समस्याएं होती हैं।

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4. मानसून में दही खाने से बढ़ सकता है जोड़ों का दर्द

आयुर्वेद का मानना है कि मानसून के सीजन में दही का सेवन करने से जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है। चूंकि दही की तासीर ठंडी होती है इसलिए बारिश के मौसम में इसका सेवन जोड़ों के दर्द की समस्या को बढ़ा सकता है। जो लोग पहले से जोड़ों के दर्द की समस्या से ग्रसित हैं उन्हें बारिश के मौसम में दही का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।

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5. मानसून में दही खाने से हो सकती हैं एलर्जी की समस्या 

आयुर्वेद के नियमों के मुताबिक मानसून के सीजन में दही का सेवन शरीर में एलर्जी की समस्या का कारण बन सकता है। आयुर्वेद का मानना है कि मानसून के दौरान डेयरी प्रोडक्ट्स में अतिरिक्त बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। इनकी वजह से दही का सेवन करना नुकसानदायक होता है। इस दौरान दही का सेवन करने से इंफेक्शन और खुजली की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। कुछ एक्सपर्ट्स का ये मानना है कि बारिश के मौसम में हरा चारा खाने वाले पशुओं के दूध से बनी दही का सेवन इन समस्याओं का कारण होता है। चूंकि बारिश के दौरान हरे चारे और पत्तियों में संक्रमण हो जाता है जिसकी वजह से इस चारे का सेवन करने वाले जानवरों के दूध से बनी दही का नहीं करना चाहिए।

क्या कहता है मेडिकल साइंस? 

मानसून के मौसम में दही के सेवन को लेकर मेडिकल साइंस की राय आयुर्वेद से बिलकुल अलग है। मेडिकल साइंस के मुताबिक बारिश के मौसम में दही का सेवन शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। मेडिकल साइंस का मानना है कि मानसून के मौसम में दही खाने से इसमें मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया पेट और आंत की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस में भी मानसून के दौरान दही के सेवन को लेकर हिदायत दी गयी है। बारिश के मौसम में मेडिकल साइंस के मुताबिक ताज़ी और स्वच्छ दही का ही सेवन करना चाहिए। हालांकि आयुर्वेद में भी इस बात का जिक्र है कि साफ और ताजी दही का सेवन ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

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हमें उम्मीद है कि मानसून यानि बारिश के मौसम में दही के सेवन को लेकर दी गयी यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यह जानकारी आयुर्वेद के नियमों पर आधारित है। आयुर्वेद में मानसून यानि बारिश के सीजन में खानपान से जुड़े कई नियम बताये गए हैं। हालांकि आधुनिक मेडिकल साइंस इन बातों की पुष्टि नहीं करता है। बारिश या मानसून के दौरान इन चीजों का सेवन करने से पहले आप अपने डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं।

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