बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए दादा-दादी निभाते हैं अहम भूमिका, जानें इन दो पीढ़ियों का साथ क्यों है ज़रूरी

Updated at: Sep 30, 2020
बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए दादा-दादी निभाते हैं अहम भूमिका, जानें इन दो पीढ़ियों का साथ क्यों है ज़रूरी

अपने बच्चों को समय न दे पाना मजबूरी है। लेकिन इससे उनकी परवरिश पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बुजुर्गों का साथ होना बेहद जरूरी है। जानें क्यों...

Garima Garg
परवरिश के तरीकेWritten by: Garima GargPublished at: Sep 30, 2020

ऑफिस में काम करने वाले अभिभावकों को अक्सर एक चिंता सताती है। उनके बच्चे घर पर क्या कर रहे होंगे? उन्होंने खाना खाया होगा भी या नहीं? अगर वह अकेले बाहर निकल गए तो क्या होगा? इतना ही नहीं बचपन से ही अकेले रहने वाले बच्चों की परवरिश पर भी गलत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अभिभावक की पहली प्राथमिकता है बच्चों को अच्छी परवरिश देना। लेकिन अति व्यस्तता के कारण ऐसा मुमकिन नहीं हो पाता। ऐसे में दादा दादी की भूमिका बहुत अहम होती है। उनके साथ बच्चे न केवल खुश रहते हैं बल्कि सुरक्षित भी महसूस करते हैं। दूसरी तरफ आप भी ऑफिस में मन लगाकर काम करते हैं। आजकल रोजगार के लिए लोग छोटे शहरों को छोड़कर महानगरों की तरफ जा रहे हैं। आज की युवा बुजुर्ग माता-पिता को अपने पुराने घर में छोड़कर बड़े शहरों में नई दुनिया बना रही है। शुरुआत में यह सब दिल को बेहद खुशी देता है लेकिन बाद में जब नई पीढ़ी का आगमन होता है तो जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं। तब उन्हें एहसास होता है कि बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए ग्रैंडपेरेंट्स का साथ होना कितना जरूरी है। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि इन दोनों पीढ़ियों के लिए एक दूसरे का साथ कितना जरूरी है। पढ़ते हैं आगे...

  stay with grandparents
 

दूर होता है बच्चों का अकेलापन

आजकल केवल पुरुष ही नहीं स्त्रियां भी कामकाजी होती हैं। ऐसे में दादा-दादी या नाना-नानी का साथ न केवल बच्चों का अकेलापन दूर करता है बल्कि पेरेंट्स भी तनाव मुक्त होकर अपने ऑफिस में मन लगाकर काम करते हैं।

संस्कारों की पकड़ हो मजबूत

परिवार के बुजुर्ग परंपरा और संस्कृति से जुड़े होते हैं। ऐसे में वह अपने पोते-पोती को भी वही संस्कार देना चाहते हैं जो उन्हें उनके माता-पिता या दादा-दादी द्वारा दिए गए थे। दादा-दादी के साथ रहने पर बच्चे छोटी उम्र से ही मंत्र, श्लोक आदि से परिचित रहते हैं। चूंकी स्त्रियां अपने बच्चे को चाह कर भी कुछ नहीं सिखा पाती हैं इसलिए बुजुर्ग बच्चों में आई उस कमी को कमी को पूरा करते हैं।

परवरिश में प्यार जरूरी

हमें लगता है कि नाना-नानी या दाद-दादी के लाड प्यार से बच्चे बिगड़ जाते हैं, पर ऐसा नहीं है। वर्षों से चली आ रही यह प्रचलित धारणा गलत है, पुराने समय में शायद ऐसा होता होगा पर आज के बुजुर्ग जागरूक हैं। साथ ही वे अनुशासन की अहमियत को ना केवल समझते हैं बल्कि बच्चों को समझाते भी हैं। इसलिए वे उन्हें मनमानी करने की छूट नहीं देते हैं। वे भी बच्चों की हर गतिविधि में उनका साथ देते हैं। वे उनके साथ बातें करने में, खेलने में, शाम को पार्क में घूमने में आदि में साथ निभाते हैं ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों का रिश्ता और गहरा होता है।

बुजुर्गों के लिए कुछ जरूरी बातें

  • दादा-दादी अक्सर प्यार में अपने बच्चों की गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं पर ऐसा करना गलत है। उन्हें अपने बच्चों की आदतों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही गलती करने पर उन्हें डांटना भी चाहिए।
  • आज के समय में नवजात शिशु का लालन-पालन अलग तरीकों से किया जाता है। ऐसे में समझे ना कि रोक-टोक लगाएं।
  • अगर मां-बाप अपने बच्चे को डांट रहे हैं तो उनके बीच में ना बोलें। इससे वे अनुशासन की गंभीरता को समझ नहीं पाते।
  • अगर आपके पोता या पोती टीनएजर हैं तो उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखें। इसके अलावा उन्हें पर्सनल स्पेस भी दें।
  • जरूरी नहीं हर बात को उपदेश के रूप में बताया जाए कभी-कभी उदाहरण या रोचक तरीके से इस बात को समझाने की कोशिश करें।

Read More Articles On Parenting in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK