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1 साल से छोटे शिशु को कभी न खिलाएं शहद, इस खतरनाक बैक्टीरिया के कारण हो सकती है जानलेवा बीमारी

नवजात की देखभाल By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 07, 2019
1 साल से छोटे शिशु को कभी न खिलाएं शहद, इस खतरनाक बैक्टीरिया के कारण हो सकती है जानलेवा बीमारी

1 साल से छोटे बच्चों को शहद खिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। शहद में मौजूद एक खास बैक्टीरिया के कारण शिशु को जानलेवा बीमारी हो सकती है। जानें क्या है ये बीमारी और इसके लक्षण।

कुछ भारतीय घरों में ये परंपरा है कि शिशु के जन्म के बाद उन्हें शहद चटाया जाता है। कुछ लोग इसे नए जीवन के लिए शगुन का रूप मानते हैं, तो कुछ लोग शिशु को स्वस्थ रखने के लिए एक तरह का घरेलू नुस्खा। मगर ज्यादातर लोग यह नहीं सोचते हैं कि नन्हे शिशु के लिए शहद कितना सुरक्षित है। विज्ञान के अनुसार 1 साल से छोटे बच्चों को शहद खिलाना खतरनाक हो सकता है। इसका कारण शहद में मौजूद एक खास बैक्टीरिया है, जो बच्चे की सेहत खराब कर सकता है।

इंसानों ने शहद का प्रयोग 5000 साल पहले ही शुरू कर दिया था। तब से लेकर आज तक शहद को एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है, जो प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। शहद खाने के ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ हैं, जिनके कारण आयुर्वेद में इसे बहुत गुणकारी खाद्य माना जाता है। मगर 1 साल से छोटे बच्चों के लिए शहद का सेवन खतरनाक हो सकता है। आइए आपको बताते हैं इसका कारण।

शहद में होता है खतरनाक बैक्टीरिया

शिशुओं के लिए शहद इसलिए हानिकारक होता है क्योंकि इसमें एक खास बैक्टीरिया होता है, जिसे 'क्लॉस्ट्रीडियम या सी. बॉट्यूलीनियम' कहते हैं। ये एक ऐसा बैक्टीरिया है, जो तेजी से बढ़ता है और एक खास तरह का टॉक्सिक (जहरीला) पदार्थ बनाता है, जिसे 'बॉट्यूलीनियम' कहा जाता है। चूंकि छोटे शिशुओं का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) विकसित नहीं होता है, इसलिए नन्हें शिशुओं का शरीर इस बैक्टीरिया के खिलाफ नहीं लड़ सकता है। एक बार शिशु के पाचनतंत्र में पहुंच जाने पर ये बैक्टीरिया शरीर को काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

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जानलेवा हो सकता है शिशु के लिए शहद

शहद में मौजूद ये हानिकारक बैक्टीरिया शिशु के पाचनतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके कारण उन्हें infant botulism नाम की बीमारी हो सकती है। कई बार ये बीमारी इतनी खतरनाक हो सकती है कि शिशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है या उसका शरीर कमजोर हो सकता है। गंभीर स्थितियों में ये बीमारी शिशु की जान भी ले सकती है।

क्या हैं इंफैंट बॉट्युलिज्म के लक्षण (Symptoms of Infant Botulism)

आमतौर पर इस बीमारी के बैक्टीरिया से प्रभावित होने के बाद सबसे पहला लक्षण कब्ज का दिखाई देता है। यानी शिशु को टॉयलेट नहीं होता है। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी इस बीमारी का संकेत बता सकते हैं-

  • शिशु का हर समय रोना और प्रयास के बाद भी चुप न होना।
  • शिशु के पेट में दर्द की समस्या। ऐसा होने पर शिशु अपना हाथ बार-बार पेट पर ले जाएगा और लगातार रोएगा।
  • बच्चा दूध नहीं पीता है और स्तन में मुंह लगाए रखने के बाद भी दूध नहीं खींचता है।
  • बच्चे का शरीर तेजी से कमजोर होने लगना और वजन लगातार घटने लगना।
  • गंभीर स्थिति में शिशु की पलकें गिरने लगती हैं और आंखें धंसने लगती हैं।
  • शिशु गंभीर रूप से थका हुआ और कमजोर दिखाई देता है।

1 साल के बाद दे सकते हैं शहद

आमतौर पर नए जन्मे शिशु का अपना प्रतिरक्षा तंत्र विकसित होने में 1 साल का समय लगता है। 1 साल से पहले शिशु के शरीर की रक्षा मां का दूध करता है। शिशु के शरीर के लिए मां का दूध इम्यून सिस्टम की तरह ही काम करता है और हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और इंफेक्शन से उसे बचाता है। इसीलिए डॉक्टर्स का मानना है कि कम से कम 6 माह तक शिशु को सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए। इसके अलावा कोई भी बाहरी आहार उसे नहीं देना चाहिए। 1 साल की उम्र के बाद शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र विकसित हो जाता है, तब आप उसे शहद दे सकते हैं। मगर यह ध्यान रखें कि 3 साल से छोटे बच्चों को बहुत ज्यादा मात्रा में शहद नहीं देना चाहिए।

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