युवा उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? एक्सपर्ट से जानें इसका कारण और बचाव के लिए जरूरी उपाय

Updated at: Sep 11, 2020
युवा उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? एक्सपर्ट से जानें इसका कारण और बचाव के लिए जरूरी उपाय

आजकल हार्ट अटैक के मामले आजकल बहुत कम उम्र में देखने को मिलने लगे हैं। दिल के डॉक्टर से जानें इसका कारण और इसे रोकने के उपाय।

Anurag Anubhav
हृदय स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Anurag AnubhavPublished at: Sep 11, 2020

हार्ट अटैक को सबसे घातक बीमारियों में गिना जाता है और भारत में मृत्युदर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 5 में से एक पुरुष और 8 में से एक महिला दिल की बीमारियों के चलते अपनी जान गंवाते हैं। हार्ट फेल्योर रक्त वाहिकाओं की धमनी में वसा की परत जमने के कारण होता है। इसके लिए जीवनशैली की आदतें, धूम्रपान, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च-रक्तचाप और डायबिटीज़ को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है।

एक समय में हार्ट अटैक केवल बुढ़ापे से संबंधित हुआ करता था। लेकिन वर्तमान हालात ऐसे हैं कि 20, 30 और 40 की उम्र वाले लोग भी दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं। आमतौर पर आनुवंशिकता और पारिवारिक इतिहास सबसे आम और नियंत्रित न हो पाने वाले कारक माने जाते हैं। लेकिन आज, इनके अलावा कई कारणों से भारतीय युवा हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं। इन कारणों में खराब जीवनशैली, तनाव, कम सोना आदि शामिल हैं। इन कारणों से हार्ट में इंफ्लेमेशन होता है और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाती है। गतिहीन जीवनशैली के साथ धूम्रपान से युवा पीढ़ी में हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है। मैक्स हॉस्पिटल, साकेत, दिल्ली के डॉक्टर बलबीर सिंह (चेयरमैन, कार्डियक साइंसेस) से जानें युवाओं में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं और इसे रोकने के लिए युवा क्या कर सकते हैं।

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हर दिन 9000 लोग मरते हैं हार्ट अटैक से

डॉ. बलबीर बताते हैं कि हर दिन लगभग 9000 लोग दिल की बीमारियों से मरते हैं, जिसका मतलब है हर 10 सेकेंड में एक मौत। उनमें से 900 लोग 40 साल से कम उम्र के युवा होते हैं। भारत में हृदय रोगों की महामरी को रोकने का एकमात्र तरीका जनता को शिक्षित करना है अन्यथा अगले कुछ सालों में हालात बद से बदतर हो जाएंगे।

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दरअसल, भारत के अस्पतालों में हर साल लगभग 2 लाख मरीजों की ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, जिसकी संख्या प्रति वर्ष 25% की दर से बढ़ रही है। लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद हार्ट अटैक के मामलों में कमी नहीं आई है। ये सभी सर्जरी समस्या के मूल कारण पर केंद्रित होने के बजाए केवल दर्द से राहत देती हैं। समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए दिल की बीमारी और इसके जोखिम कारकों के बारे में शिक्षत करना आवश्यक है।

क्या हैं लक्षण?

कोरोनरी हार्ट डिजीज़ (सीएचडी) के सभी मरीजों में लक्षण और सीने का दर्द एक समान हो, ऐसा जरूरी नहीं है। लक्षण शून्य से गंभीर तक भिन्न हो सकते हैं। कई मरीजों को अपच की समस्या हो सकती है तो कइयों को गंभीर दर्द, भारीपन या कसाव महसूस हो सकता है। यह दर्द आमतौर पर सीने के बीचों-बीच होता है, जो हाथों, गर्दन, जबड़ा और पेट तक फैल सकता है। इसके साथ ही घबराहट और सांस लेने में मुश्किल हो सकती है।

धमनियों के पूरी तरह ब्लॉक होने पर हार्ट अटैक हो सकता है, जिसके कारण दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। हार्ट अटैक के कारण होने वाला दर्द और असुविधा एंजाइना के समान होता है लेकिन अक्सर अधिक गंभीर होता है। इसमें पसीना आना, उलझन, जी मिचलाना, सांस लेने में मुश्किल आदि समस्याएं होती हैं। यह डायबिटीज़ के मरीजों में आम है। हार्ट अटैक का सही समय पर इलाज न करने पर यह घातक साबित हो सकता है।   

जांच कराना है बेहद जरूरी

एक संदिग्ध सीएचडी के मरीज में बीमारी की पहचान के लिए चिकित्सा और पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली का आंकलन और रक्त परीक्षण शामिल हैं। इसके अलावा सीएचडी की पहचान में प्रत्येक हार्ट वॉल्व की संरचना, मोटाई और हलचल की पहचान के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी), दिल, फेफड़ों और सीने में दिखाई देने वाले लक्षणों को देखने के लिए एक्स-रे, एक्सरसाइज़ के दौरान दिल पर पड़ने वाले असर की पहचान के लिए ट्रेडमिल टेस्ट, कार्डियोवस्कुलर कार्टोग्राफी हार्ट फ्लो मैपिंग, सीटी एंजियोग्राफी और ब्लॉकेज की गंभीरता की पहचान के लिए इनवेसिव कोरोनरी एंजियोग्राफी आदि जैसे नॉन इनवेसिव टेस्ट शामिल हैं।

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हृदय रोगों की रोकथाम

हालांकि, कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ को पूरी तरह से ठीक करना संभव नहीं है लेकिन इसका इलाज लक्षणों के नियंत्रण, दिल की कार्यप्रणाली में सुधार और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं के खतरे को कम करने आदि में सहायक होता है। इसमें जीवनशैली में बदलाव, दवाइयां और नॉन-इनवेसिव इलाज शामिल हैं। इनवेसिव और सर्जरी की जरूरत केवल गंभीर मामलों में पड़ सकती है। अधिकतर मामलों में इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं, जहां मरीज अपने जीवन को पुन: सामान्य रूप से शुरू कर पाता है। 

जीवनशैली में कुछ आसान बदलावों की आवश्यकता पड़ती हैं जैसे कि पौष्टिक व संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता, नियमित व्यायाम, धूम्रपान बंद करना और कोलेस्ट्रॉल और शुगर के स्तर को नियंत्रित करना आदि। ये बदलाव सीएचडी, स्ट्रोक और कमज़ोर याददाश्त के खतरे को कम करते हैं।

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सीएचडी के इलाज के लिए कई दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। कोलेस्ट्रॉल, उच्च-रक्तचाप और डायबिटीज़ को भी दवाइयों की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। अन्य दवाइयां दिल की धड़कन को धीमा करने, रक्त को पतला करके खून के थक्कों की रोकथाम करने में काम आती हैं। इनमें से कुछ दवाइयों से सिरदर्द, सिर चकराना, कमज़ोरी, बदन दर्द, त्वचा पर रैशेज़ होने के साथ याददाश्त और सेक्स की इच्छा प्रभावित हो सकती है। यदि किसी दवाई को लंबे समय से लिया जा रहा है तो ऐसे में समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट विशेषकर किडनी और लिवर के कार्यों पर केंद्रित होता है।

हालांकि, दिल की विफलता खतरनाक मालूम होती है लेकिन उचित निदान और देखभाल के साथ इसका इलाज संभव है। मोटापा, डायबिटीज़ और उच्च-रक्तचाप को बढ़ावा देने वाले आहार और जीवनशैली में बदलाव ही दिल की विफलता की रोकथाम का सबसे आसान तरीका है।

दिल की विफलता या कार्डियो वस्कुलर डिजीज़ यह दर्शाता है कि आपका हृदय सामान्य रूप से काम नहीं कर पा रहा है। स्वस्थ हृदय के लिए इसकी देखभाल करना आवश्यक है। सबसे अच्छी बात यह है कि आप इस बीमारी को स्वस्थ जीवनशैली के साथ रोक सकते हैं।

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