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सर्दियों में क्‍यों जरूरी है विटामिन सी, जानें इसके फायदे और नुकसान

स्वस्थ आहार By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 16, 2019
सर्दियों में क्‍यों जरूरी है विटामिन सी, जानें इसके फायदे और नुकसान

विटामिन सी एक विटामिन है। कुछ जीव अपना विटामिन सी स्‍वत: बना सकते हैं, लेकिन लोगों को भोजन और अन्य स्रोतों से यह विटामिन प्राप्त करना चाहिए। विटामिन सी के अच्छे स्रोत ताजे फल और सब्जियां हैं, खासकर खट्टे फल।

विटामिन सी एक विटामिन है। कुछ जीव अपना विटामिन सी स्‍वत: बना सकते हैं, लेकिन लोगों को भोजन और अन्य स्रोतों से यह विटामिन प्राप्त करना चाहिए। विटामिन सी के अच्छे स्रोत ताजे फल और सब्जियां हैं, खासकर खट्टे फल। विटामिन सी को एक प्रयोगशाला में भी बनाया जा सकता है। विटामिन सी को एस्कॉर्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए अति आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है।

यह पोषक तत्व फ्री रेडिकल्स से हमारी कोशिकाओं का बचाव करता है। साथ ही, शरीर में विटामिन ई की सप्लाई को पुनर्जीवित करता है और आयरन के अवशोषण की क्षमता को भी बढ़ाता है। यह एक एंटी एलर्जिक, एंटी ऑक्‍सीडेंट के रूप भी काम करता है। संतरा, टमाटर, आलू इत्यादि विटामिन सी के अच्छे स्रोत में संतरा, टमाटर, आलू इत्यादि शामिल हैं। सिटरस फ्रूट्स में भी विटामिन्स पाए जाते हैं। आइए जानें विटामिन सी के कार्य के बारे में

 

क्‍यों जरूरी है विटामिन सी 

  • विटामिन सी को खाद्य पदार्थों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। आमतौर पर विटामिन सी के अच्छे स्रोत आलू, टमाटर, संतरा हैं। इनके अलावा लाल मिर्च, अनानास, स्‍ट्रॉबेरी, सेब, खट्टे रसीले फल, कच्चे फलों और सब्जियों में भी विटामिन सी पाया जाता है। आंवला, नारंगी, नींबू, अंगूर, अमरूद, केला, बेर, कटहल, शलगम, पुदीना, मूली के पत्ते, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया, और पालक इत्यादि भी विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं।
  • विटामिन सी की कमी के कारण कई बीमारियां जैसे मोतियाबिंद, चर्म रोग, गर्भपात, रक्ताल्पता, भूख न लगना इत्यादि हो सकती हैं। विटामिन सी शरीर को कई बीमारियों से तो बचाता ही है, साथ ही सांस संबंधी बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं से भी निजात दिलाता है।
  • विटामिन सी न सिर्फ स्कर्वी नामक रोग से बचाता है बल्कि इससे कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है, और तो और मस्तिष्क के कार्य करने में भी ये सहायक है। विटामिन सी की मदद से हड्डियों को जोड़ने वाले कोलाजेन पदार्थ, रक्त वाहिकाएं, लिगामेंट्स, कार्टिलेज आदि अंगों का पूर्णरूप से निर्माण संभव है।
  • विटामिन सी मस्तिष्क में एक रसायन सेराटोनिन के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सेराटोनिन नामक रसायन हमारी नींद के लिए ज़रूरी है।  विटामिन सी कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित काबू में रखता है।
  • लौह तत्वों को भी विटामिन सी से ही आधार मिलता है। शरीर में विटामिन सी कई तरह की रासायनिक क्रियाओं को अंजाम देता है जैसे कोशिकाओं तक ऊर्जा प्रवाहित करना आदि।
  • विटामिन सी आंखों के रोग ग्लूकोमा से आंखों का बचाव करता है। विटामिन सी शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। इसकी कमी से कई रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। विटामिन सी संतुलित मात्रा में खाना फायदेमंद है।
  • विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों को गैस या अवन में पकाने या उबालने व अधिक समय तक स्टोर करके रखने से उनकी पौष्टिकता कम हो जाती है। इसलिए विटामिन  सी का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने के लिए कच्चे फल व सब्जियां ही खाएं।

विटामिन सी के नुकसान 

विटामिन सी का उपयोग ज्यादातर लोगों के लिए किया जाता है जिन्‍हें जरूरत होती है, खासकर तब जब त्‍वचा संबंधी समस्‍या होती है। जब मांसपेशियों में इंजेक्शन लगाया जाता है, और जब धमनियों में इंजेक्‍शन लगाया जाता है तब भी इसका प्रयोग किया जाता है। लेकिन कुछ लोगों में, विटामिन सी मतली, उल्टी, सीने में जलन, पेट में ऐंठन, सिरदर्द और अन्य दुष्प्रभावों का कारण हो सकता है। इन दुष्प्रभावों की संभावना अधिक विटामिन सी के खपत से होती है।

प्रतिदिन 2000 मिलीग्राम से अधिक की मात्रा संभवत: असुरक्षित होती है और इससे कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें गुर्दे की पथरी और गंभीर दस्त शामिल हैं। जिन लोगों में गुर्दे की पथरी होती है, उनमें प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में गुर्दे की पथरी दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है।

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