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आखिर क्‍यों बढ़ रही हैं रेप की घटनाएं? एक्‍सपर्ट से जानें रेपिस्‍ट की मनोदशा

Updated at: Dec 13, 2019
विविध
Written by: अतुल मोदीPublished at: Dec 13, 2019
आखिर क्‍यों बढ़ रही हैं रेप की घटनाएं? एक्‍सपर्ट से जानें रेपिस्‍ट की मनोदशा

देश बढ़ती रेप की घटनाओं पर बवाल मचा है। आइए जानते हैं कि, आखिर क्‍यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं और इसका मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से क्‍या संबंध है।

16 दिसंबर 2012 की रात, जब दिल्‍ली में एक जघन्‍य अपराध हुआ था। 23 साल की एक युवती के साथ क्रूरतापूर्वक गैंगरेप कर उसे चलती बस से फेंक दिया गया था। घटना के कुछ ही दिन बाद उसने दम तोड़ दिया था। यह बलात्‍कार के उन मामलों में से एक है, जिसने देश और दुनिया का ध्‍यान आकर्षित किया और भारत के कानून में कई बदलाव किए गए। मगर ऐसी घटनाओं का सिलसिला आज भी जारी है। हाल ही में, 6 दिसंबर को हैदराबाद की वेटनरी डॉक्‍टर के साथ दुष्‍कर्म और मर्डर ने, दोबारा 16 दिसंबर के जख्‍म को हरा कर दिया। 

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दुष्कर्म के 2043 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2017 में 2059 और 2016 में दुष्कर्म के 2065 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं पिछले साल छेड़छाड़ के 3175, 2017 में 3275 और 2016 में 4032 मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस के अनुसार, दुष्कर्म के अधिकतर मामलों के आरोपी पीड़ित के करीबी थे। 

ये आंकड़े सिर्फ देश की राजधानी दिल्‍ली के हैं। अगर हम पूरे भारत में दुष्‍कर्म और यौन उत्‍पीड़न के आकड़ों पर नजर डालेंगे, तो ये आंकड़े काफी डरावने होंगे! मगर, आज हम यहां आंकड़ों की बात नहीं करेंगे। हम बात करेंगे रेपिस्‍ट की उस सोच की जो उनके दिमाग में चल रहा होता है। हम बात करेंगे उन लोगों की जो इस तरह के कुकृत्‍य करने से पहले एक बार भी नहीं सोचते कि, वह जो कर रहे हैं उसका क्‍या परिणाम होगा?

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लगातार बढ़ते दुष्‍कर्म की घटनाओं पर OnlyMyHealth ने कई मनोवैज्ञानिकों से बात की, उन्‍होंने हमें विस्‍तार से उन जटिल सवालों को सुलझाने का प्रयास किया कि, क्‍या रेप करने वाले लोग किसी मानसिक समस्‍या से ग्रसित होते हैं?

क्‍या मानसिक रोग है रेप का कारण? 

गौतमबुद्ध युनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलॉजी के विभागाध्‍यक्ष डॉक्‍टर आनंद प्रताप सिंह कहते हैं, "जहां तक मनोवैज्ञानिक कारणों की बात है, रेप करने वालों में इस प्रकार की समस्‍या तो होती ही है। उनमें दो-तीन तरह की विशेषताएं होती हैं, जो मुख्‍य हैं। इसके पीछे साइकोपैथिक (मनोरोग) ट्रेट्स होते हैं जो असामाजिक होते हैं, जो आपराधिक मानसिकता के होते हैं। कुछ में बायोलॉजिकल कारण भी हो सकते हैं, कई बार मस्तिष्‍क में संरचनात्मक अंतर के कारण भी साइकोपैथिक ट्रेट्स और एंटी-सोशल बिहैवियर बढ़ जाते हैं। इसके अलावा ऐसे लोग जिनकी फैमिली डिस्‍टर्ब होती है, जो बचपन से ही पैथालॉजिकल फैमिली के भागीदार रहे हैं। ऐसे लोगों लर्निंग ऐसी हो जाती है जिसके कारण उनमें असामाजिक व्‍यवहार की संभावना बढ़ जाती है। ये सभी फैक्‍टर्स 'प्री डिस्‍पोजिंग' होते हैं। ये सभी फैक्‍टर घटना को निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं"  

डॉक्‍टर आनंद आगे कहते हैं कि, अगर किसी का चाइल्‍ड एब्‍यूज हुआ हो या बचपन में किसी अपने पेरेंट्स के अवैध रिश्‍ते देखे हो, घर में लड़ाई-झगड़े होते रहे हों, घरेलू हिंसा होते होते हों, एल्‍कोहॉलिक फैमिली हो, इकोनॉमिकली कंप्रोमाइज्‍ड फैमिली हो जैसी स्थितियां असामाजिकता की ओर धकेलती है, जिसके कारण व्‍यक्ति में रेप जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

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...तो शादीशुदा मर्द क्‍यों करते हैं ऐसा?

डॉक्‍टर आनंद के अनुसार, दुष्‍कर्म कोई यौन संतुष्टि नहीं है। हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि शादीशुदा पुरुष रेप नहीं करेगा। यह एक अलग स्थिति है। इनमें एक मनोवैज्ञानिक कारण होता है, जैसे मेनिया की स्थिति। ऐसा होने पर व्‍यक्ति में सेक्‍स की इच्‍छा काफी बढ़ जाती है, और वह सामाजिक तौर पर अपने व्‍यवहार को नियंत्रित नही कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में दुष्‍कर्म करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। हालांकि, मेनिया में इस तरह की इच्‍छाएं पुरुष और महिला दोनों में बढ़ जाती है।

वहीं, फोर्टिस हेल्थकेयर के निदेशक व मनोचिकित्‍सक (मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार विज्ञान विभाग), डॉक्‍टर समीर पारिख कहते हैं, "सहानुभूति का अभाव, पश्चाताप की कमी, दर्द की समझ की कमी और कुछ व्यवहार संबंधी कारक हैं जो इसके साथ जुड़े हो सकते हैं, लेकिन मैं इस तथ्य का समर्थन नहीं करता कि यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। किसी को मानसिक स्वास्थ्य को इस विषय से दूर रखना चाहिए क्योंकि यह मानसिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से बढ़ाता है।"

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डॉ. निमेश देसाई, डायरेक्टर ( इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाईड साइंस ) कहते हैं कि, "शराब पीना, तेज गति से गाड़ी चलाना, यौन संकीर्णता... इस तरह का व्यवहार समूहों में रहकर लोग ज्‍यादा करते हैं।"

डॉ. देसाई रेपिस्‍ट के मनोविज्ञान वर्गीकृत करने को लेकर सजग हैं। वह कहते हैं कि "मेरी चिंता यह है कि इस तरह के कृत्‍यों को अपराधी के मनोविज्ञान से जोड़कर हम अनजाने में उसे सम्मान देते हैं और उस एक्ट को पवित्र और उचित ठहराते हैं। डॉ. देसाई ने कहा कि अपराध के घटित होने के संदर्भ को देखना बहुत जरूरी है और वह विचार करने के लिए तीन कारकों की सलाह देते हैं। मैक्रो (macro), मीसो (miso) और माइक्रो (micro) फैक्टर्स। मैक्रो फैक्टर हिंसा, सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन, तेजी से शहरीकरण और इसके साथ बेरोजगारी सहित सभी सामाजिक पद्धितियों में बदलाव करता है। मीसो लेवल में सहकर्मी अहम भूमिका निभा सकते हैं। माइक्रो लेवल में व्यक्तिगत मानसिकता के साथ खेला जाता है।"

जिसने एक बार बलात्कार किया, क्या वह हमेशा एक बलात्करी रहेगा?

डॉ. देसाई कहते हैं कि "अपराध को दोहराने की संभावना अधिक होती है ये साबित करने के लिए यह पर्याप्त अध्ययन है। जब व्यक्ति वास्तव में अच्छी सुधार प्रणाली से नहीं गुजरता तो वह उसे यादगार बनाने के लिए फिर से अपराध करता है। जबकि मैं नागरिकों और बालात्कार पीड़ित परिवारों की चिंताओं को समझता हूं, एक स्वभाव, उद्देश्य विश्लेण, दंडात्मक प्रणाली के रूप में शायद ही कभी अच्छी तरह से काम करते हैं। मैं एक बार अपराधी को दोहराने वाला अपराधी बनने से रोकने के लिए सुधारवादी न्यायप्रणाली में विश्वास करता हूं। लेकिन जाहिर है कम गंभीर अपराधों के लिए।" 

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...तो क्‍या इसका इलाज संभव है या इसका निदान किया जा सकता है? 

डॉक्‍टर आनंद कहते हैं कि, "इलाज और निदान सिर्फ मानसिक समस्‍याओं से ग्रसित व्‍यक्तियों का ही हो सकता है। अगर मानसिक विकार आपराध को बढ़ाता है तो उसका इलाज कर अपराधों को रोक सकते हैं; और इन समस्‍याओं से बचने के लिए जरूरी है कि, जिस प्रकार से हम समय-समय पर बॉडी चेकअप कराते हैं, उसी तरह मेंटल हेल्‍थ की जांच भी साल में एक बार जरूरी करानी चाहिए। इसके अलावा, सरकार भी मेंटल हेल्‍थ से जुड़े जागरूकता प्रोग्राम चलाने चाहिए, जिसके तहत लोगों को अपने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में पता चल सके।" 

डॉ पारिख ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जोर दिया है, जिससे इस तरह की समस्‍याओं का समाधान मिल सके:  

  • डॉक्‍टर पारिख के मुताबिक, स्कूल से कॉलेजों तक ही हमें बच्‍चों को लैंगिक समानता, लिंग संवेदीकरण (gender sensitisation) पर ध्यान देने की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित करना है कि जेंडर के बीच के सम्मान हमारी प्रणाली का हिस्सा बन जाए और हमें ऐसे किसी भी कृत्यों के प्रति जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। 
  • हमें एक अच्‍छे व्यवहार करने के लिए समाज में रोल मॉडल की आवश्यकता है, जिसमें सिनेमा, मीडिया आदि को अपनी जिम्‍मेदारी निभाने की आवश्‍यकता है। 
  • हमें समाज द्वारा में सकारात्‍मक बदलाव लाने के लिए एक निरंतर प्रयास की आवश्यकता है जहां एक व्यक्ति दूसरे व्‍यक्ति के प्रति सहिष्‍णुता और विश्‍वास बढाए ताकि सामाजिक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिले।

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