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इंडियन टॉयलेट वेस्‍टर्न टॉयलेट से क्‍यों है बेहतर, जानें वैज्ञानिक तथ्‍य

विविध By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 13, 2018
इंडियन टॉयलेट वेस्‍टर्न टॉयलेट से क्‍यों है बेहतर, जानें वैज्ञानिक तथ्‍य

हम इंडियन टॉयलेट का उपयोग धीरे-धीरे बंद करते जा रहे हैं। हालांकि, यह हमारी सबसे बड़ी गलतियों में से एक है। इस पर अक्‍सर बहस होती है कि इंडियन टॉयलेट और वेस्‍टर्न टॉयलेट में कौन ज्‍यादा बेहतर है। इस शं

Quick Bites
  • भारतीय शौचालय पश्चिमी शौचालयों की तुलना में अधिक स्वच्छ हैं
  • भारतीय शौचालयों में यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) का जोखिम कम है
  • भारतीय शौचालयों में हमारे शरीर की स्थिति शरीर से कचरे को पूरी तरह से निकालने में मदद करती है

लंबे समय से भारतीय पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित रहें हैं। वहां का पहनावा, रहन-सहन और संस्‍कृति भार‍तीयों को बहुत ज्‍यादा आकर्षित करती है। लेकिन क्‍या पश्चिमी सभ्‍यता को अपनाने के फेर में कहीं हम अपनी परंपराओं को खो तो नहीं रहे? ये एक बड़ा प्रश्‍न है। बिना किसी नुकसान की फिक्र किए हुए हम अपनी जीवन शैली में पश्चिमी तौर तरीकों को तेजी से अपनाते जा रहे हैं। जिनमें वेस्‍टर्न टॉयलेट (पश्चिमी शौचालयों) का उपयोग भी शामिल है। हम इंडियन टॉयलेट का उपयोग धीरे-धीरे बंद करते जा रहे हैं। हालांकि, यह हमारी सबसे बड़ी गलतियों में से एक है। इस पर अक्‍सर बहस होती है कि इंडियन टॉयलेट और वेस्‍टर्न टॉयलेट में कौन ज्‍यादा बेहतर है। इस शंका समाधान करने के लिए हम आपको इस लेख में इसके वैज्ञानिक तथ्‍यों के बारे में बता रहे हैं। इसके बाद आप स्‍वयं तय करें कि आपको क्‍या करना चाहिए। 

 

इंडियन टॉयलेट ज्‍यादा स्‍वच्‍छ 

यह आप सभी के लिए आश्चर्यजनक हो सकता है, लेकिन भारतीय शौचालय पश्चिमी शौचालयों की तुलना में अधिक स्वच्छ हैं। इस प्रकार, सार्वजनिक शौचालयों में शौचालयों के लिए जाना हमेशा बेहतर होता है। भारतीय शौचालयों में शौचालय की सीट के साथ आपके शरीर का कोई सीधा संपर्क नहीं है। इस प्रकार, यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) का जोखिम कम है। हालांकि, पश्चिमी शौचालयों में, हमारी त्वचा टॉयलेट सीट के साथ लगातार संपर्क में रहती है। इसके अलावा, पश्चिमी शौचालय का उपयोग करने वाले लोग खुद को साफ करने के लिए पेपर टॉयलेट रोल पसंद करते हैं। दूसरी तरफ, भारतीय शौचालयों में पानी का इस्‍तेमाल किया जाता है। इस प्रकार भारतीय शौचालय अधिक स्वच्छ और स्वस्‍थ हैं।

शौच के साथ एक्‍सरसाइज भी 

भारतीय शौचालयों का उपयोग करना एक तरह का व्यायाम है। यह एक प्रकार का स्क्वाट व्यायाम है जिसे हम हर सुबह कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में बैठना हमारे पैरों को मजबूत करता है और उन्हें गति में भी लाता है। भारतीय शौचालय शरीर में बेहतर रक्त परिसंचरण का कारण बनता है। इस प्रकार, किसी जिम को करे बिना हम रोजाना व्यायाम कर सकते हैं। पश्चिमी शौचालयों की बात करें तो उसमें कुर्सी पे बैठने जैसा है। यहां आप कोई भी एक्टिविटी नहीं कर रहे होते हैं। 

पाचन क्रिया को करे मजबूत 

भारतीय शौचालयों का उपयोग करने से पाचन की प्रक्रिया मजबूत होती है। एक स्क्वाट स्थिति में बैठने से भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद मिलती है। यह बाउल मूवमेंट पर भी दबाव डालता है ताकि अपशिष्ट ठीक से निकल जाए। दूसरी ओर, पश्चिमी शौचालयों में, निचले शरीर पर कोई दबाव नहीं है जो बाउल मूवमेंट को प्रोत्साहित कर सकता है।

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भारतीय शौचालय कब्ज को रोकते हैं

भारतीय शौचालयों में हमारे शरीर की स्थिति शरीर से कचरे को पूरी तरह से निकालने में मदद करती है। यह एक अच्छी मात्रा में दबाव देता है और इस प्रकार हमारा आंत पूरी तरह से साफ हो जाता है। डॉक्टरों द्वारा किए गए प्रयोगों और शोध के अनुसार, उन्हें एक दिलचस्प तथ्य मिला। उन्होंने पाया कि भारतीयों की तुलना में पश्चिमी शौचालयों में पेट से संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक है। हालांकि, यह मानव शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन के खिलाफ भी जाता है जो विभिन्न ऊतकों और मांसपेशी आंदोलन के बारे में बात करता है।

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प्रयोग में आसान होते हैं इंडियन टॉयलेट

इंडियन टॉयलेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका प्रयोग आसानी से किया जा सकता है, और कहीं बाहर होने पर भी (पब्लिक टॉयलेट) आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जबकि पब्लिक वेस्‍टर्न टॉयलेट के ज़रा से गंदे होने पर भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। 

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Written by
Atul Modi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागDec 13, 2018

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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