देसी घी या वेजिटेबल ऑयल, क्या है दिल की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद? बता रही हैं डायटीशियन स्वाती बाथवाल

स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है कि खाने में सही तेल का इस्तेमाल किया जाए, वरना स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकते हैं।

Meena Prajapati
स्वस्थ आहारReviewed by: स्वाती बाथवाल, इंटरनैशनल स्पोर्ट्स डायटीशियनPublished at: Feb 11, 2021Written by: Meena Prajapati
Updated at: Feb 11, 2021
देसी घी या वेजिटेबल ऑयल, क्या है दिल की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद? बता रही हैं डायटीशियन स्वाती बाथवाल

तन-मन को खुश और स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि खाने में सही तेल का इस्तेमाल हो, लेकिन टीवी पर चलते विज्ञापन के झांसे में आकर हम कोई भी तेल बाजार से खरीदकर ले आते हैं। पर यह ध्यान नहीं देते कि यह तेल हमारे शरीर के लिए ठीक है या नहीं। बहुत बार लोग इस कन्फ्यूजन में भी होते हैं कि खाना बनाने के लिए और खाने के स्वाद को बढ़ान के लिए कौन सा वनस्पति तेल (Vegetable oil) इस्तेमाल करें। तो वहीं, सेहत अच्छी रहे उसके लिए वेजिटेबल ऑयल इस्तेमाल करें या घी इस्तेमाल करें। आजकल खानपान में कई तरह के तेल जैसे मक्के का तेल, कनोला तेल, सूरजमुखी का तेल, ऑलिव आइल, तिल का तेल आदि इस्तेमाल किए जाते हैं। अब लोग कन्फ्यूज होते हैं कि इन वेजिटेबल ऑयल्स का इस्तेमाल किया जाए या घी का। तो अब आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आपके सवालों के जवाब और तेल या घी में से  कौन अच्छा, इसके बारे में बता रही हैं डायटिशियन स्वाति बाथवाल।

इन ऑयल्स को कहें न

कैनोला, सोया, सूरजमुखी, बिनौला तेल (cottonseed oil), कुसुम तेल (safflower oil), अंगूर के बीज का तेल आदि खराब तेलों में गिने जाते हैं। इन ऑइल्स का इस्तेमाल खाने को गर्म करने या तलने में नहीं करना चाहिए। ये वेजिटेबल ऑयल मेटाबॉलिज्म को दिक्कत करते हैं। तो वहीं, इनमें से कुछ तेल ट्रांस फैटी भी होते हैं। दरअसल वेजीटेबल ऑयल में  हीट सेंसटिव पॉलीअसैच्युरेटिड वसा होती है, जो गर्म होने पर जहरीले कंपाउंड्स में बदल जाती है, जिसे ट्रांस फैट कहा जाता है।

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इन तेलों को अपनाएं

स्वाति बाथवाल का कहना है कि वे तेल जो लंबे समय तक गर्म रह सकते हैं, उन्हें कुकिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, तिल का तेल, बटर, घी, एक्सट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल आदि का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जा सकता है। तो वहीं, घी और मूंगफली के तेल को शैलो फ्राई और डीप फ्राई करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मोनोअनसैच्यूरेटिड फैट जैसे मकडैमिया, एवोकाडो और ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल सलाद, डिप्स और पके हुए खाने में फ्लेवर जोड़ने के लिए किया जा सकता है। पर खाना बनाने में नहीं।

क्या होता है जब हम खराब तेल का इस्तेमाल करते हैं?

स्वाति बाथवाल के मुताबिक हमारे टिशुज में ऑक्सीडेंट्स हेल्दी मॉलिक्यूल्स को दोबारा बनाने का काम करते हैं। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि ये फंक्शनेबल आर्टरीज को अनफंक्शनल आर्टरीज में बदल देते हैं। ये मेटाबॉलिक फंक्शन के साथ इंटरफेयर करते हैं। वनस्पति तेल में फूड्स को तलने से कई ऑक्सीडेंट्स हमारे ऊतकों में जाते हैं जिनमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी होती है।

अपने छुपे हुए बैड फैट (Bad fat) को पहचानें

स्वाति बाथवाल के मुताबिक रोजमर्रा में जो खाना हम खा रहे हैं उसमें हमें ऑयल दिखता है तो हम फैट समझ लेते हैं, लेकिन इसके अलावा भी हम कई रूपों में फैट को कंज्यूम कर रहे होते हैं। नमकीन, समोसा, पैकेट के स्नैक्स आदि। इन सभी में वसा होती है जिसे हम देख नहीं पाते। फ्रेंच फ्राइज में भी फैट होता है। कुछ रेस्टूरेंट्स में देखा गया है कि कर्मचारी एक बार के इस्तेमाल किए हुए तेल को कई बार इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के तेल स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं।

 तेल की गुणवत्ता जांचें

पहले के समय में ज्यादातर घरों में घी और देसी तेलों का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जाता था। आज भी इनका इस्तेमाल होता है लेकिन आजकल इन पदार्थों में मिलावट ज्यादा देखने को मिलती है इस वजह से इनका इस्तेमाल ध्यानपूर्वक करना चाहिए। बाथवाल के मुताबिक, अगर आप भी इनका यूज कर रहे हैं तो ध्यान रहे कि ये कोल्ड-प्रेस्ड हों। वसा पदार्थों को प्लास्टिक के कंटेनर में न रखें। जब आप ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें तो ध्यान रखें कि ये कोल्ड-प्रेस्ड हो और कांच की बोतल में रखा गया हो। 

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कच्ची घानी तेल का करें इस्तेमाल

कच्ची घानी का तेल कोल्ड-प्रेस्ड होता है। इसके उलट वेजिटेबल ऑयल्स में मैन्यूफैक्चरर अलग-अलग तरह से प्रोसेस करते हैं जिससे वह खाने लायक नहीं रहता। 

ट्रेडिशनल रेसिपिज बनाएं

आधुनिक जीवन और उपकरणों की बढ़ती भरमार के चलते सबकुछ बहुत फास्ट हो रहा है। यही वजह है कि जीवन में मशीन का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ा है। पहले हम जिस परंपरागत तरीके से खाना बनाते थे वो ज्यादा पौष्टिक खाना होता था बजाए आज के मॉडर्न कुकिंग के। अब टेफ्लॉन, नॉन-स्टिक पैन्स आदि में खाना पकाया जाता है। तो वहीं तेल की क्वालिटी गिरती जा रही है जिससे स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है। 

हेल्दी डेसर्ट खाएं

डायटिशियन स्वाति बाथवाल के मुताबिक अगर स्वस्थ रहना है तो हेल्दी डेसर्ट को खाएं। ग्रिल किया हुआ अनानास, क्रीम के साथ स्ट्रॉबेरी, फ्रोजन अंगूर, डार्क चॉकलेट (70 फीसद से ज्यादा) आदि पौष्टिक डेसर्ट हैं। इसके अलावा हमारे ट्रेडिशन मिठाइयां जैसे गुडके बने लड्डे, बादाम, संदेश, गुड के साथ मूंगफली चिक्की आदि हेल्दी मिठाइयां हैं। इनका सेवन किया जा सकता है।  

स्वस्थ भोजन स्वस्थ जीवन की कमान होता है। खाने में तेल ऑक्सीजन की तरह होता है। इसलिए ध्यान रखना जरूरी है कि हम कैसा तेल इस्तेमाल कर रहे हैं। ध्यान रहे यहां जो सूचना दी गई है वो आम लोगों के लिए है। अगर किसी को स्वास्थ्य से संबंधित कोई परेशानियां हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें। 

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