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जानें इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

स्वस्थ आहार By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 07, 2018
जानें इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम आंतों का रोग है, इसमें पेट में दर्द, बेचैनी व मल करने में परेशानी होती है। आजकल के गलत और मिलावटी खानपान के कारण लोगों में इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम आंतों का रोग है, इसमें पेट में दर्द, बेचैनी व मल करने में परेशानी होती है। आजकल के गलत और मिलावटी खानपान के कारण लोगों में इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है। कई बार तो कम उम्र के बच्चों को भी ये समस्या हो जाती है। यह आंतों को खराब तो नहीं करता लेकिन खराब होने के संकेत देने लगता है। इससे न केवल व्यक्ति को शारीरिक तकलीफ महसूस होती है, बल्कि उसे कई शारीरिक क्रियाओं में भी परेशानी होती है। इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम होने पर खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है वर्ना तकलीफ बढ़ जाती है। आइए आपको बताते हैं कि इस दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए।

इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम में क्या खाएं

इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम होने पर आमतौर पर रोगी को भूख कम लगती है और उसका कुछ खाने मन नहीं करता लेकिन शरीर को ताकत देने के लिए खाना जरूरी है। इस बीमारी के दौरान संतुलित आहार का सेवन बहुत जरूरी है। फाइबर वाले आहार जैसे- कच्ची सब्जियां, सलाद और फलों का सेवन करें। इसके अलावा दाल और कच्चा अनाज पर्याप्त मात्रा में खाएं क्योंकि इनमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है। शरीर में पानी की मात्रा न कम होने दें और ऐसे आहार खाएं, जो आसानी से पच जाएं।

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इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम में क्या न खाएं

इस बीमारी के दौरान ऐसे आहारों से दूर रहना चाहिए, जो पेट में गैस बनाते हैं जैसे- राजमा, छोले, बीन्स आदि। इसके अलावा डेयरी उत्पाद जैसे -दूध, पनीर, क्रीम, मलाई आदि का प्रयोग से भी आपको परेशानी हो सकती है। कुछ कच्ची सब्जियां जैसे- कच्चा प्याज, मूली और टमाटर भी पेट में गैस बनाते हैं, इसलिए इनसे भी दूर रहना चाहिए। दही का सेवन कर सकते हैं मगर एक दिन में 100-200 ग्राम से ज्यादा दही न खाएं। इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम आंतों को खराब तो नहीं करता लेकिन उसके संकेत देने लगता है। यह समस्या संवेदनशील कोलन या कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के कारण हो सकती है।

क्या हैं इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम के लक्षण

  • इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम में अचानक बैठे-बैठे एक दम से आंतो में मरोड़ उठती है और पेट में दर्द होने लगता है।
  • कई बार बिना कारण ही मल आने जैसा महसूस होता है।
  • रोगी को प्राय: बार बार दस्त होता है।
  • पेट फूलना, कब्ज, पेट दर्द की समस्या होती है।
  • रोज पांच छ: बार पतले दस्त होते हैं और गैस बहुत निकलती है।
  • बार-बार डायरिया हो जाता है।
  • यह बीमारी लम्बे समय तक चलती है।

अन्य बीमारियों से मिलते हैं लक्षण

  • लैक्‍टोज इनटॉलरेन्‍स (दूध का न पचना) के लक्षण भी इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम की तरह होते हैं।
  • सिलियक डिजीज (गेहूं प्रोटीन से एलर्जी) में भी मरीज बार-बार पेट में दर्द बताता है और बार-बार उसका पेट खराब होता है।
  • इंफ्लेमट्री बॉवेल डिजीज में भी बड़ी आंत में जगह-जगह घाव बन जाते है और मरीज को वहीं तकलीफ होती है जो इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम में होती है।

लेकिन हम कुछ खास लक्षणों को देखकर ही बीमारी के बारे में बताते है। अगर कुछ नेगेटिव लक्षण जैसे मल में खून आना, वजन कम होना, भूख कम लगना और अगर मरीज की कैंसर का इतिहास है तो हम आमतौर पर इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम का निदान नहीं करते हैं बल्कि उसकी अच्‍छे से जांच करते हैं।

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