चिकनगुनिया के मरीजों का कैसा होना चाहिए आहार? एक्सपर्ट से जानें कैसे आसान हो सकता है चिकनगुनिया से बचाव

Updated at: Aug 27, 2020
चिकनगुनिया के मरीजों का कैसा होना चाहिए आहार? एक्सपर्ट से जानें कैसे आसान हो सकता है चिकनगुनिया से बचाव

चिकनगुनिया एक ऐसा रोग है, जो किसी भी व्यक्ति को परेशान कर सकता है। एक्सपर्ट से जानें चिकनगुनिया से जुड़ी हर एक बात। 

 

Jitendra Gupta
अन्य़ बीमारियांWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Aug 27, 2020

चिकनगुनिया मच्छरों के काटने से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है, जिसका 1-2 दिन बाद असर दिखाना शुरू होता है। चिकनगुनिया होने पर व्यक्ति को सबसे पहले बुखार आ जाता है। इसके बाद व्यक्ति के जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होने लगता है। चिकनगुनिया से होने वाले बुखार में व्यक्ति को ठंड लगती है और उसका शरीर भी कांपता है। सही समय पर इलाज न मिलना इस रोग को घातक बना सकता है। धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर गौरव जैन आपको चिकनगुनिया से जुड़ी हर बात बता रहे हैं। तो जानिए चिकनगुनिया के बारे में सब कुछ।  

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चिकनगुनिया कैसे होता है और इस बीमारी से पीड़ित होने पर व्यक्ति खुद को कैसा महसूस करता है?

चिकनगुनिया मच्छरों के काटने के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है जो बारिश के मौसम में अधिक होता है। हालांकि इसके शुरुआती दिनों में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते लेकिन संक्रमण के 10 से 20 दिन के बाद बुखार, सरदर्द, व्यक्ति के जोड़ों में दर्द, शरीर में चकत्ते या लाल रैश आदि पड़ जाते हैं, इसके अलावा मांसपेशियों में खिंचाव, सरदर्द भी रह सकता है।   

चिकनगुनिया के संकेत क्या है, कैसे पता चलेगा कि व्यक्ति को ये हो गया है?

किसी भी वायरल के कारण होने वाले बुखार को एक नज़र में बीमारी के तौर पर नहीं समझा जा सकता। रोग का सही सही पाता लगाने के लिए संबंधित डॉक्टर रोगी के खून व पेशाब की जांच कर सकता है। और चिकनगुनिया के केस में शुरुवाती दिनों में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते और संक्रमण के 10 से 20 दिन के बाद बुखार, सरदर्द, मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। इसलिए अलग से पहचान के तौर पर कहा जा सकता है कि चिकनगुनिया में बुखार के साथ मांसपेशियों में अनावश्यक खिंचाव, जोड़ों में दर्द आदि रह सकता है। समस्या गंभीर होने पर जोड़ों में सूजन भी दिखाई देती है।

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चिकनगुनिया होने पर व्यक्ति किन फूड्स और पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए?

चिकनगुनिया में अक्सर खाने में लहसुन का सेवन बढ़ाने की सलाह दी जाती है जिससे  वायरल से लड़ने में मदद मिल सकती है, साथ ही आजवाइन लेने की सलाह दी जाती है जिससे दर्द में आराम मिलने की संभावना होती है। लेकिन बेहतर है किसी भी खाद्य या पेय का डॉक्टर की सलाह के अनुसार मात्रा व सेवन निर्धारित किया जाए, क्योंकि किसी भी रोग में व्यक्ति का खान पान उसकी बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है, साथ ही यदि व्यक्ति किसी अन्य रोग या किसी शारीरिक समस्या से जूझ रहा है तब भी उसके खान पान के तरीके बदल सकते हैं, इसलिए बेहतर है रोगी के किसी भी तरह का खान पान डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय किया जाए। साथ ही तले भुने खाने से परहेज़ करें, पौष्टिक आहार लें हरी पत्तेदार सब्ज़ियों पर अधिक बल दें, प्रचुर मात्रा में पानी पियें शरीर में तरलता बनाये रखें। 

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चिनकगुनिया जैसी बीमारियों से कैसे बचा जा सकता है?

चिकनगुनिया के साथ एक बात यह भी है की इसका कोई टीकाकरण उपलब्ध नहीं है, और यह मच्छरों के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है। इसलिए ज़ाहिर तौर पर मच्छरों से खुद का बचाव करके इस रोग से बचा जा सकता है, अपने घरों में व आस पास के आस पास पानी जमा न होने दें, बरसात आदि में घरों में मौलिक साफ़ सफाई बनाये रखें, और इस मौसम में घरों से बहार निकलने से पहले हल्के रंगों वाले और अधिकतम ढके कपड़ों को पहनने का प्रयास करें ताकि मच्छरों के काटने के संभावना कम हो, बच्चों का खास ख्याल रखें, मोस्कवीटो रेप्लेंट का इस्तेमाल करें। घरों में भी जाली वाले दरवाज़े खिड़कियाँ आदि रखें, ताकि मच्छरों की आवाजाही पर रोक लग सके। 

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चिकनगुनिया किस स्थिति में घातक हो सकती है और ये दूसरी बीमारियों से कैसे अलग है?

किसी भी वायरल के कारण होने वाले बुखार को एक नज़र में बीमारी के तौर पर नहीं समझा जा सकता। चिकनगुनिया में बुखार के साथ मांसपेशियों में अनावश्यक खिंचाव, जोड़ों में दर्द आदि रह सकता है। इसमें घुटनों, कलाई, टखनों व अन्य जोड़ों में अतिरिक्त दर्द महसूस हो सकता है। सही समय पर सही इलाज मिलने पर यह बीमारी बिलकुल ठीक हो जाती है लेकिन गंभीर स्थितियों में यह जोड़ों में दर्द की महीनों समस्या हो सकती है, दिमाग पर भी इसका असर एन्सेफेलाईटिस, आँखों पर असर यानी यूबेआइटिस, किडनी पर असर नेफ्राईटिस हो सकता है, हालाँकि ये परिणाम बहुत ही रेयर केस में होते हैं।

चिकनगुनिया होने पर प्राथमिक उपयार क्या होना चाहिए?

जैसा कि बताया गया, चिकनगुनिया का कोई टीकाकरण उपलब्ध नहीं है। इसका लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है, और वह इलाज डॉक्टर द्वारा मरीज़ के रोग की गंभीरता और केस के आधार पर तय किया जाता है। इसलिए बेहतर है किसी भी तरह के वायरल होने पर सीधा डॉक्टर से सलाह ली जाए और जांच के साथ इलाज करवाया जाए और उन्हीं के निर्देशों के अनुसार प्राथमिक उपचार भी किया जाए। चिकनगुनिया के विषय में यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि बीमारी गंभीर होने पर जोड़ों में दर्द महीनों तक रह सकता है जो अतिरिक्त कष्ट दे सकता है।

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