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बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है दूध से एलर्जी की समस्या, जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

नवजात की देखभाल By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 06, 2012
बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है दूध से एलर्जी की समस्या, जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

दूध पिलाने के बाद शिशु के शरीर पर दाने, शिशु का रोना और उल्टी करना आदि दूध से एलर्जी के लक्षण हैं। ये कम शिशुओं में देखने को मिलता है, मगर दूध से होने वाली एलर्जी कई बार खतरनाक हो सकती है, इसलिए मां-बाप को सावधान रहना चाहिए।

 

जन्म लेेने के बाद शिशु के लिए मां का दूध उसका पहला और संपूर्ण आहार होता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 6 माह की उम्र तक शिशु को मां का दूध ही पिलाएं। मगर कुछ बच्चों को मां के दूध से ही एलर्जी की समस्या हो जाती है। वहीं कुछ बड़े बच्चों में बाहर के दूध से भी एलर्जी के मामले सामने आते हैं। दूध से होने वाली एलर्जी को ग्लाक्टोसेमिया यानि अतिदुग्धशर्करा कहा जाता है। हालांकि ऐसा बहुत कम बच्चों के साथ होता है, मगर ऐसा होने पर अक्सर मां-बाप घबरा जाते हैं। आमतौर पर एलर्जी के कारण दूध पिलाने के बाद शिशु के शरीर पर दाने, चकत्ते जैसे निशान दिखाई देते हैं, या वो उल्टी कर देता है। बड़े बच्चों में भी दूध पीने के बाद कई तरह के लक्षण इस बात का संकेत हैं कि उन्हें दूध से एलर्जी है। आइए आपको बताते हैं इस समस्या के बारे में।

क्यों होती है बच्चों को दूध से एलर्जी?

ग्लाक्टोसेमिया यानि अतिदुग्धशर्करा होने के कई  कारण हो सकते हैं। दूध या दूध से बने कई खाद्य पदार्थ में लेक्टोज नामक एंजाइम होता है। इस प्रकार के प्रोटीन से शरीर में एक अलग तरह की प्रक्रिया उत्पन्न होती है। इस एंजाइम पर लेक्टेस नामक दूसरा एंजाइम प्रक्रिया करता है जिससे ग्लूकोज  और  ग्लेक्टोस बनते हैं।  जब किसी व्यक्ति के शरीर में वह एंजाइम पर्याप्त मात्रा में  नहीं होता जो ग्लेक्टोस को और आगे तोड़  सके  तो यह रोग उत्पन्न होता है। धीरे धीरे ग्लेक्टोस का स्तर शरीर में बढ़ता जाता है जिससे पूरे शरीर में विष फैलने लगता है।

दूध की एलर्जी से होने वाले नुकसान

  • इसके शिकार व्यक्ति का लीवर बढ़ने लगता है
  • लीवर की कोशोकाएं एवं उत्तकों में भी खराबी आने लगती है  
  • इससे किडनी के फेल होने का जोखिम रहता है
  • इससे ब्रेन डेमेज होने का जोखिम रहता है

अगर इसका उचित उपचार नहीं किया गया तो बच्चे के बचने के चांसेस ७५ प्रतिशत घट जाता है। इसलिए इस मामले में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और शीघ्र उचित उपचार ढूँढना चाहिए।

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दूध की एलर्जी के लक्षण

यह रोग (एलर्जी) ज्यादातर बच्चों में, खासकर नवजात शिशुओं में पाया जाता है।

  • इस रोग के शिकार बच्चों में मिर्गी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते है 
  • शिशु का वजन या शरीर न बढ़ना।
  • उल्टियां होना भी इस रोग का एक प्रमुख होता है
  • इस रोग के शिकार बच्चे में कमजोरी के लक्षण भी देखने को मिलते हैं
  • इस रोग के शिकार व्यक्ति की भूख भी मर जाती है
  • इस रोग के शिकार बच्चे में पीलिया के लक्षण भी देखने को मिलते है यानि उसकी आँखें पीली नजर आने लगती है। त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है  इत्यादि
  • इस रोग के शिकार बच्चे का मूत्र का भी रंग गहरा काला पड़ने लगता है

इस रोग को पता करने के तरीके

जब आपके बच्चे में या नवजात शिशु में उपरोक्त लक्षण दिखलाई देने लगें तो आपको उसकी जांच करवानी चाहिए।

  • इस रोग का पता करने के लिए मूत्र की जांच की जाती है। अगर मूत्र में अमीनो एसिड्स या ब्लड प्लास्मा पाया जाता है तो आपके बच्चे को यह रोग हो सकता है।  
  • हेपाटोमेगली के द्वारा भी इस रोग की जांच की जाती है।
  • जलोदर या पेट में तरल पदार्थ की उपस्थिति से भी इस रोग के होने की पुष्टि की जाती है।
  • हाइपोग्लेसिमिया यानि ब्लड शुगर स्तर में असामान्य गिरावट से भी इस रोग को पहचाना जाता है

दूध से एलर्जी का इलाज

  • इसका उपचार बहुत मुश्किल से मिलता है। जिस दूध से आपके बच्चे को एलर्जी है उस दूध का सेवन करवाना तुरंत बंद कर दीजिये।
  • अपने बच्चे को डब्बे का दूध पिलाया करें (जिसमें लेक्टोज  न हो) ।
  • अपने बच्चे को सोया का दूध पिलाया करें ।
  • इस मामलें में योग्य चिकित्सक से मिलें।

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