माइग्रेन का संकेत हो सकता है सिर के एक हिस्से में दर्द, जानें इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव

Updated at: Dec 07, 2020
माइग्रेन का संकेत हो सकता है सिर के एक हिस्से में दर्द, जानें इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव

माइग्रेन का दर्द सामान्य सिरदर्द से थोड़ा अलग होता है। चूंकि माइग्रेन के कारण कई और समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इस दर्द को पहचानना जरूरी है।

सम्‍पादकीय विभाग
अन्य़ बीमारियांWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Jan 08, 2013

सिरदर्द आज के समय में बहुत सामान्य समस्या बन गई है। खासकर महिलाओं को अक्सर ही सिरदर्द की शिकायत रहती है। अगर आपको सिर के एक हिस्से में ही तेज दर्द होता है, तो ये माइग्रेन का संकेत हो सकता है। वैसे तो माइग्रेन के कारण पूरे सिर में भी दर्द हो सकता है, लेकिन ज्यादातर लोगों में आधे सिर के दर्द के ही मामले देखने को मिलते हैं। माइग्रेन (Migraine) एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन (Neurological condition) है, जो कई लक्षणों का कारण बन सकती है। इसमें अक्सर बहुत तेज और कमजोरी लाने वाला सिरदर्द होता है। लक्षणों में मतली, उल्टी, बोलने में कठिनाई, स्तब्ध हो जाना या झुनझुनी, और प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता शामिल हो सकती है। माइग्रेन किसी भी उम्र को प्रभावित कर सकता है। माइग्रेन के सिरदर्द का निदान, रिपोर्ट किए गए लक्षणों और अन्य कारणों के आधार पर किया जाता है। 

माइग्रेन एक प्रकार का दीर्घकालिक सिरदर्द है जिससे कई घंटों या दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। कुछ लोगों में माइग्रेन से पहले या उसके साथ अन्य लक्षण भी होते हैं, जिन्हें ऑरा कहा जाता है। सामान्य ऑरा हैं-चमक कौंधना, काले धब्बे दिखना या बांह अथवा पैर में झुनझुनी लगना। यद्यपि माइग्रेन का इलाज उपलब्ध नहीं है, कुछ दवाएं इसकी तीव्रता और आवृत्ति घटाता है। 

Migraine

माइग्रेन के कारण- Migraine Causes

माइग्रेन का सही कारण पता नहीं चला है, लेकिन जेनेटिक और पर्यावरणीय कारक की इसमें भूमिका हो सकती है। माइग्रेन ट्राईगेमिनल नर्व में न्यूरोकेमिकल के बदलाव और मस्तिष्क के रसायनों में असंतुलन, खासकर सेरोटोनिन के कारण आरंभ होता है। माइग्रेन के समय सेरोटोनिन का स्तर संभवतः कम हो जाता है, जो ट्राइजेमिनल सिस्टम को न्यूरोपेप्टाइड का स्राव करने के लिए प्रेरित करता है। न्यूरोपेप्टाइड मस्तिष्क के बाह्य आवरण(मेनिंन्जेज) तक पहुंचकर सिरदर्द उत्पन्न करता है।

माइग्रेन के कुछ सामान्य कारण 

प्राकृतिक या हार्मोनल बदलाव, जो खासकर महिलाओं के मामले में होता है, जहां एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने पर सिरदर्द होता है। महिलाओं को पीरियड के समय या उससे पहले सिरदर्द हो सकता है। कुछ दवाएं, जैसे-गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोन रिप्लेशमेंट थेरेपी से या तो सिरदर्द बढता है या घट जाता है।

कुछ खाद्य या पेय पदार्थ, जैसे- बीयर, रेड वाइन, पुराने पनीर, चॉकलेट, अस्पार्टेम, कैफीन का अधिक उपयोग, मोनोसोडियम ग्लूटामेट आदि से माइग्रेन का सिरदर्द शुरू हो सकता है।    

  • तनाव और बेचैनी
  • संवेदनात्मक उत्तेजना, जैसे-तेज प्रकाश, धूप से आँख चुंधियाना, तेज आवाज, परफ्यूम, बदबू (जैसे-पेंट थिनर और धुआं)।
  • सोने-जगने के पैटर्न में अवरोध जैसे-सो नहीं पाना, अत्यधिक सोना आदि।
  • शारीरिक कारक जैसे-शारीरिक थकावट या अत्य़धिक परिश्रम।
  • मौसम में बदलाव(अत्यधिक गर्मी या ठंडक)
  • कुछ दवाएं माइग्रेन के दर्द को शुरू कर सकते हैं।

माइग्रेन के लक्षण- Migraine Symptoms

माइग्रेन की शुरूआत बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने पर कभी भी हो सकता है। माइग्रेन से पीड़ित लोगों में इनमें से कुछ या सभी लक्षण हो सकते हैं-

  • साधारण या तीव्र दर्द, जो सिर के एक या दोनों ओर हो सकता है
  • फड़कने जैसा दर्द
  • शारीरिक श्रम करने से दर्द बढ जाना
  • दर्द दैनिक क्रियाओं में अवरोध पैदा कर सकता है
  • जी मिचलाना. जिससे उल्टी भी हो सकती है
  • आवाज और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता

अगर माइग्रेन का उपचार नहीं किया जाए तो इसका दर्द 4 से 72 घंटों तक रह सकता है। माइग्रेन का सिरदर्द अलग-अलग लोगों को अलग-अलग सीमा तक हो सकता है; कुछ लोगों को महीने में कई बार सिरदर्द हो सकता है, जबकि अन्य लोगों को इससे कम होता है। माइग्रेन के लिए वैकल्पिक उपचार

अधिकतर लोगों में माइग्रेन के साथ ऑरा नहीं होते, इन्हें सामान्य माइग्रेन कहा जाता है, जबकि कुछ लोगों में इसके साथ ऑरा की शिकायत रहती है, ऐसे माइग्रेन को क्लासिक माइग्रेन कहा जाता है। सामान्य ऑरा में आपकी दृष्टि में बदलाव, जैसे-प्रकाश की कौंध दिखना और बांह एवं पैरों में पिन चुभने जैसी अनुभूति आदि शामिल हैं।

माइग्रेन से बचाव- Migraine Preventions

  • सबसे पहले जानें कि आपके माइग्रेन को क्या है जो ट्रिगर करता है, उन चीजों से बचें।
  • हाइड्रेटेड रहें, प्रति दिन पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीएं। 
  • ब्रेकफास्‍ट या भोजन स्किप न करें। 
  • अच्‍छी तरह से नींद लें। 
  • धूम्रपान छोड़ें। 
  • जीवन में तनाव को कम करें। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।

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