गले में दर्द और सूजन टॉन्सिलाइटिस की है निशानी, एक्सपर्ट से जानिए इसके इलाज और बचाव

Updated at: Dec 04, 2020
गले में दर्द और सूजन टॉन्सिलाइटिस की है निशानी, एक्सपर्ट से जानिए इसके इलाज और बचाव

टॉन्सिलाइटिस की समस्या होने पर बोलने और खाने पीने में काफी परेशानी होती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं टॉन्सिलाइटिस की पूरी जानकारी।

Kishori Mishra
अन्य़ बीमारियांWritten by: Kishori MishraPublished at: Dec 04, 2020

सर्दियों में टॉन्सिल की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। टॉन्सिल में सूजन के कारण ना सिर्फ खाने-पीने में परेशानी होती है, बल्कि बोलने में भी आपको बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारे मुंह के अंदर गले के बीच में एक नरम उतक होता है। इसे टॉन्सिल (What is tonsillitis) कहते हैं। यह एक रक्षा तंत्र के रूप में कार्य करता है। यह शरीर में मुंह के द्वारा बाहरी संक्रमण को अंदर आने से रोकता है। यह यह टॉन्सिल (Tonsillitis) बाहरी संक्रमण से स्वयं संक्रमित हो जाता है, तो इस परिस्थिति को 'टॉन्सिलाइटिस' कहा जाता है। टॉन्सिलाइटिस की समस्या व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस समस्या का इलाज आसानी से किया जा सकता है। आज हम आपको इस लेख के माध्ययम से टॉन्सिलाइटिस से जुड़ी सारी जानकारियां देने जा रहे हैं। यह सभी जानकारी फॉर्टिस नोएडा के ईएनटी स्पेशलिस्ट (Noida Fortis Hospital, HOD of Orhinolaryngology Department ) डॉक्टर सव्यसाची सक्सेना से बातचीज पर आधारित है। आइए जानते हैं टॉन्सिलाइटिस के कारण (Causes of Tonsillitis), लक्षण और निदान क्या हैं?

टॉन्सिलाइटिस के प्रकार (types of tonsillitis)

डॉक्टर सव्यसाची बताते हैं कि टॉन्सिलाइटिस की समस्या कई तरह की होती है। आइए जानते हैं इस बारे में -

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस (Acute tonsillitis) – एक्यूब टॉन्सिलाइटिस में एक वायरस टॉन्सिल्स को संक्रमित करता है। इस वजह से गले में सूजन और खराश की दिक्कत होने लगती है। इतना ही नहीं इसके कारण टॉन्सिल्स में ग्रे या व्हाइट रंग की परत दिखती है।

क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस (Chronic tonsillitis) – टॉन्सिल्स बार-बार संक्रमित होने से क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस की समस्या उत्पन्न होती है। इसके कारण मरीज को लंबे समय तक इस परेशानी से जूझना पड़ता है।

पेरिटॉन्सिलर फोड़ा (Peritonsillar abscess) - यब टॉन्सिल्स के आसपास मवाद को विकसित करता है। यह टॉन्सलाइटिस का काफी गंभीर रूप है।

इसके अलावा एक्यूट मोनोन्यूक्लिओसिस (Acute mononucleosis), स्ट्रेप थ्रोट (Strep throat) और टॉन्सिल स्टोन्स (Tonsilloliths or Tonsil Stones) जैसी टॉन्सिल्स की समस्या लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है।

टॉन्सिलाइटिस के लक्षण (Symptoms of  tonsillitis)

बड़ों में दिखने वाले लक्षण

  • टॉन्सिल्स का लाल दिखना
  • टॉन्सिल्स सूजना
  • टॉन्सिल्स पर सफेद या ग्रे रंग की परत बनना या धब्बे जैसा दिखना
  • खाने में परेशानी
  • निगलने में परेशानी
  • गले के आसपास तेज दर्द
  • गंभीर परिस्थिति में बुखार होना
  • बोलने में परेशानी
  • आवाज धीमा हो जाना
  • सांस लेने में बदबू जैसा महसूस होना
  • पेट में दर्द
  • गर्दन में अकड़न

छोटे बच्चों को दिखने वाले लक्षण

  • निगलने में परेशानी
  • खाने से मना करना
  • चिड़चिड़ा होना

इस तरह के लक्षण 24 से 48 घंटे तक दिखे, तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें।

टॉन्सिलाइटिस के कारण (Causes of  tonsillitis)

  • गले में बैक्टीरिया पनपने की वजह से 
  • गले में वायरस का हमला
  • निमोनिया( Mycoplasma Pneumonia) के कारण भी बच्चों को टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो सकती है।  
  • फ्लू की चपेट में आने से टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो सकती है। 
  • अधिक ठंडी चीजों के खाने से टॉन्सिलाइटिस की समस्या बढ़ सकती है।
  • इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से भी कुछ लोगों को टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो सकती है। 
  • बैक्टीरियल टॉन्सिलाइटिस स्ट्रेप्टोकोकस योजीन (streptococcus pyogenes) की वजह से भी कुछ लोगों को टॉन्सलाइटिस हो सकता है।

टॉन्सिलाइटिस का निदान (Diagnosis of tonsillitis)

डॉक्टर सव्यसाची बताते हैं कि अधिकतर डॉक्टर टॉन्सिलाइटिस की जांच सीधे तौर पर करते हैं, जिसमें गले के आसपास छूकर या मुंह के जरिए माइक्रोस्पोपी से देखकर पता लगाया जाता है। अगर गले में गांठ, लाल और सूजन दिखता है, जो व्यक्ति टॉन्सिलाइटिस से ग्रसित है। इसके अलावा कुछ मामलों में कभी-कभी मवाद भी नजर आता है।  

सीबीसी टेस्ट- यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसमें ब्लड में मौजूद विभिन्र तरह की कोशिकाओं की गणना की जाती है।

थ्रोट स्वेब - इसमें डॉक्टर रुई की मदद से गले से सैंपल एकत्रित करता है, जिससे बाद इस नमूने में डॉक्टर यह देखने की कोशिश करते हैं कि उनके गले में वायरस और बैक्टीरिया है या नहीं।

टॉन्सिलाइटिस का इलाज (Treatment of tonsillitis)

डॉक्टर सव्यसाची बताते हैं कि डॉक्टर प्लेंटी फ्यूड्स (Plenty of fluids) के जरिए मरीज का इलाज करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा अगर मरीज को फीवर है, तो डॉक्टर की सलाह लें। उन्होंने कहा अगर फीवर दो दिन से ज्यादा होता है, तो डॉक्टर्स एंटीबायोटिक दवाइयों का कोर्स देते हैं। ज्यादातर मामलों में  यह समस्या 6 से 7 दिन में रिकवर हो जाती है।

डॉक्टर ने कहा कि अगर टॉन्सिल्स की समस्या साल में 3 से 4 बार हो रही है या फिर 2 साल लगातार आपको इसकी समस्या होती है। इसके अलावा मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर सर्जरी का प्लान करते हैं। इसमें मरीज के टॉन्सिल्स का ऑपरेशन किया जाता है। 

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टॉन्सिलाइटिस के बचाव (Prevention of Tonsilitis)

  • ठंडी और खट्टी चीजें खाने से बचें।
  • परेशानी होने पर आराम करें।
  • गर्म चीजों का सेवन करें।
  • गले की सिकाई करें।
  • गर्म पानी से गरारे करें।
  • स्मोकिंग करने से बचें।
  • संक्रमण से बचें।
  • वायु प्रदूषित वाले स्थान पर जाने से बचें।

टॉन्सिलाइटिस के घरेलू उपचार (Home Remedies of Tonsillitis)

    • गर्म पानी में नींबू और अदरक की कुछ बूंदें डालें और इसका सेवन करें।
    • फिटकरी को पानी में डालकर उबालें और इससे गरारा करें।
    • लहसुन को पानी में डालकर उबालें और इससे गरारा करें।
    • लहसुन की कलियों को सरसो तेल में डालकर गर्म करें और इसे खाएं।
    • गर्म पानी में चुटकीभर नमक मिलाकर पिएं।
    • काला नमक डालकर गरारे लें।
    • रोस्टेड अदरक को चूसें। 

 

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