स्तनपान कराने का सही तरीका क्या है? जानें इस पर सुचेता पाल का क्या है सुझाव

Updated at: Feb 24, 2020
स्तनपान कराने का सही तरीका क्या है? जानें इस पर सुचेता पाल का क्या है सुझाव

क्या आप जानते हैं बच्चे को स्तनपान कराने का सही तरीका? अगर नहीं जानते तो सुचेता पाल से जानें क्या है बच्चे को स्तनपान कराने का सही तरीका। 

सुचेता पाल
नवजात की देखभालWritten by: सुचेता पालPublished at: Feb 24, 2020

मां बनना मेरे लिए या फिर किसी भी महिला के लिए एक नए तरीके का अनुभव होता है, खासकर जब वो पहली बार बच्चे को जन्म देती हैं। ये एक ऐसा समय होता है जब महिला से मिलने वाले सभी लोग उन्हें अलग-अलग तरह की सलाह देते हैं जिससे की बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर हो सके। सभी लोग बच्चे के साथ-साथ महिला को भी स्वस्थ होने का तरीका बताते रहते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि सभी लोगों के पास हर तरह के सुझाव होते हैं। जबकि हम सब जानते हैं कि बच्चे को 6 महीने तक मां का ही दूध पीना होता है। 

मेरा मानना है कि यह पहली बार बनी मां के लिए, शारीरिक और भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। बच्चे को दूध पिलाना अपने आप ही आता है ये एक प्राकृतिक है। हम जानते हैं कि बच्चे को मां का दूध पिलाना कितना जरूरी होता है, लेकिन कब तक जरूरी होता है ये आजतक साबित नहीं हो सका है। कुछ कहते हैं कि 3 से 4 महीने तक बच्चे को मां का दूध पिलाना काफी होता है, जबकि कुछ लोग बच्चे को मां का दूध एक साल तक पिलाने की सलाह देते हैं। 

 
 
 
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How many of you have been given FREE ADVISE on the "RIGHT WAY" to feed YOUR CHILD by RANDOM PEOPLE ? Everyone seems to have an opinion and may I say judgement! Yeh sab log kahan se prakat ho jaate hai achanak���� . Please.... 1️⃣STOP telling new mothers that they should exclusively breastfeed for 6 months. You think we haven't read that on the internet yet? . Firstly, unlike popular belief breastfeeding is painful for most women, extremely tough physically and mentally an emotional rollercoaster. So no, breasteeding is not some walk in the park which comes naturally to us women. Give us a break! Secondly, yes breastfeeding/milk is the most beneficial no doubt but there is confusing research about this particular 6 month timeline ( and I am talking about solid research not articles on Google)...infact a decade earlier some research said 3-4 months is enough and some say it should be 1 year�� . Thirdly, what have you done to make women feel comfortable to chose this 6 month timeline. Does your office have a lactation room to pump? Has paid maternity leave been extended in all countrie to 6 months? Have you made breastfeeding in public normal for women in your country ? Things to ponder upon . 2️⃣ STOP questioning the #motherhood quotient of women who choose formual feeding�� Whether only formula-feeding or a mix with breastfeeding/ expressing is none of your business. . One of the reasons why formula feeding is discouraged in mostly developing countries is because of hygeine during preparations or wrong method of preparation. Infact due to advances in science the formula has evolved to a large extent to be very close to breast milk. . And secondly do you know why a woman made the choice? Maybe the body is not medically producing enough milk, the mom has a painful mastitis, or mentally and emotionally it is taxing for the woman. Or maybe we just chose simply because today in the 21st century we can. Period! . ( For those curious, I have CHOSEN to direct +pump + formula to feed) It's my right as a woman to chose how I feed my child as long as both feel like a ROCKSTAR Remember HAPPY MOMMY, HAPPY BABY �� @anamikasinghphotography captures us again��

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इसके अलावा, मेरा मानना यह है कि 6 महीने तक बच्चे को दूध पिलाना यानी स्तनपान कराने में महिलाओं के लिए इसे आसान बनाने के लिए कुछ नहीं किया गया है। ये पूरी तरह से मां की पसंद होती है कि उसके बच्चे के लिए क्या जरूरी है क्या नहीं। बच्चे को दूध पिलाने के लिए स्वच्छता के बहुत सी चीजों के लिए महिलाओं का मनोबल तोड़ा जाता है। 

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समय के साथ-साथ वैज्ञानिकों ने इस फॉर्मूले में काफी बदलाव किया है। कई मामलों में महिलाओं को जबरदस्ती कुछ कदम उठाने को कहा जाता है सिर्फ कुछ छोटे कारण के लिए। ये मुमकिन हो सकता है कि बच्चे की मां प्रयाप्त दूध बनाने में सक्षम न हो या फिर उसे दर्द का सामना करना पड़ता हो। इसके अलावा कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जिसमें महिला को स्तनपान के लिए मेंटली और इमोश्नली परेशान किया जाता है। 

मैं ऐसा मानती हूं कि ये मेरा अधिकार है कि मेरे बच्चे के लिए क्या सही है या क्या नहीं और चाहे बात बच्चे को स्तनपान कराने की हो। मैंने बच्चे के लिए जरूरी होने पर सीधे स्तनपान, पम्पिंग और फार्मूला फीड जैसी चीजों का चयन किया है। मेरा मानना है कि जब एक मां खुश रहेगी तो उसका बच्चा खुद ही स्वस्थ और खुश रह सकेगा। 

 
 
 
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Our ROYALTY arrived 27th Dec 2019! This KING is going to rule our hearts forever♥️

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मेरे हिसाब से अगर कोई भी मां अपने बच्चे के लिए कोई फैसला लेगी तो उससे इस बात का अंदाजा होगा कि उसके बच्चे के लिए क्या सही है और क्या उसके सेहत के लिए अच्छा है। इसलिए सभी नई मां को सभी लोगों की सलाह के आधार पर इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उसके बच्चे के लिए क्या अच्छा रहेगा और क्या नहीं। इसके साथ ही बच्चे की पसंद को जानना बहुत जरूरी हो जाता है। बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह को खारिज नहीं करना चाहिए, बल्कि उसका पालन करना चाहिए। 

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