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    टेक्‍नोलॉजी से जुड़ी बीमारी है हिकीकोमोरी

    मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 17, 2015
    टेक्‍नोलॉजी से जुड़ी बीमारी है हिकीकोमोरी

    क्‍या आप ऐसी जिंदगी की कल्‍पना कर सकते हैं, जिसमें व्‍यक्ति खुद को सामाजिक रूप से काटकर तकनीक से बनाई अपनी दुनिया में सीमित हो जाता है। जीं हां ऐसी ही हिकीकोमोरी की समस्‍या, जो आजकल हमें देखने को मिल रही है।

    क्‍या आप ऐसी जिंदगी की कल्‍पना कर सकते हैं जिसमें दुनिया से काटकर व्‍यक्ति खुद को कई वर्षों तक एक कमरे में सीमित कर लें। और उसके लिए इंटरनेट सर्फिंग और इंटरनेट की दुनिया ही सबकुछ हो जाये। आमतौर पर ऐसा देखने को नहीं मिलता। लेकिन भागती दौड़ती और तकनीक पर तेजी से निर्भर हो रही दुनिया में इस तरह की कुछ चीजें देखने को मिल जाती है। जीं हां ऐसी ही हिकीकोमोरी की समस्‍या, जो आजकल हमें देखने को मिल रही है।   

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    क्‍या है हिकीकोमोरी की समस्या

    हिकीकोमोरी की समस्‍या यानी ऐसी स्थिति जिसमें व्‍यक्ति खुद को सामाजिक रूप से काटकर तकनीक से बनाई अपनी दुनिया में सीमित हो जाता है। इसमें व्‍यक्ति खुद को समाज से पूरी तरह से काट लेता है। एक अनुमान के मुताबिक अभी करीब दो लाख युवा हिकीकोमोरी हैं। जिस जापान को दुनियाभर में तकनीक के क्षेत्र में रोल मॉडल के रूप में देखा जाता है वहां करीब 7 लाख लोग इस समस्या से ग्रस्‍त हैं। चूंकि इस अवस्था में मरीज खुद बाहरी दुनिया से छिपा रहता है। ऐसे में साइतो भी मानते हैं कि मरीजों की संख्या करीब दस लाख भी हो सकती है। अब हिकीकोमोरी होने की औसत आयु भी बढ़ गई है। ये दो दशक पहले 21 साल थी और अब 32 साल है।

    इस पर हो रहे हैं शोध

    क्‍या आप जानते हैं कि जापान में हिकीकोमोरी के विशेषज्ञों में से एक डॉक्‍टर ताकाहिरो कातो इस समस्‍या को रोकने पर काम कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढी को इसके व्यापक तौर पर नुकसान से दूर रह सकें। वह ऐसा इसलिए कर रहे है क्‍योंकि वह खुद छात्र जीवन में हिकीकोमोरी के शिकार रह चुके हैं। 1990 के दशक में तमाकी साइतो ने मनोवैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू ही किया था। उनके पास ज्यादातर ऐसे परिजन आ रहे थे जिनके बच्चों ने स्कूल जाना छोड़कर कमरे में अकेले रहना शुरू कर दिया था। ये बच्चे महीनों और कई बार सालों तक अपने कमरों से बाहर नहीं निकल रहे थे।


    अधिकतर मामले मध्यवर्गीय परिवारों के थे। स्कूल छोड़कर ख़ुद को कमरे में बंद करने की औसत उम्र 15 साल थी। यह किशोरावस्था के आलस्य जैसा था। कमरे में बंद रहो और परिजन आपका इंतजार करते रहें। लेकिन साइतो के मुताबिक पीड़ित सामाजिक भय के कारण सहमे हुए थे।
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    सामाजिक और स्वास्थ्य के नुकसान

    हिकीकोमोरी को सामाजिक और स्वास्थ्य के लिहाज से बीमारी के रूप में देखा जा रहा है। खासकर युवाओं में इस तरह की समस्‍या देखी जा रही है। इस समस्‍या में व्‍यक्ति खुद को सामाज से अलग कर बेडरूम तक सीमित कर लेता है। यहां तक की ऐसी स्थिति में वह खुद को वर्षों तक रख सकता है।

    बुजुर्गों के बीच भी देखने को मिले कई मामले

    जापान के फुकुओका में क्यूशू यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ, इस समस्‍या का हल ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 50 वर्ष से ऊपर के लोगों में भी इस तरह के गंभीर मामले देखे हैं। जिन्होंने खुद को सामजिक रूप से 30-30 साल तक अलगाव की स्थिति में रखा।

    हिकीकोमोरी के कारण

    • कई बार नौकरी और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों से बचने के लिए भी युवा हिकीकोमोरी के शिकार हो जाते हैं। करियर और पढ़ाई के मामलों पर परिवार से हुए मतभेद के कारण अंतर्मुखी होकर एकाकी जीवन बिताने लगते है।
    • सामाजिक भय के कारण भी अक्‍सर युवा हिकीकोमोरी के शिकार हो जाते हैं।


    Image Source : Getty

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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