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पार्टनर पर ज्यादा निर्भर रहना है कोडिपेंडेंट रिलेशनशिप के लक्षण, बहुत खतरनाक हैं इसके नुकसान

डेटिंग टिप्स By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 16, 2019
पार्टनर पर ज्यादा निर्भर रहना है कोडिपेंडेंट रिलेशनशिप के लक्षण, बहुत खतरनाक हैं इसके नुकसान

कोडिपेंडेंट रिलेशनश‍िप एक ऐसा रिलेशशिप होता है जिसके एक व्यक्ति पूरी तरह से अपने पार्टनर पर निर्भर रहता है। वह इस तरह खुद को सामने को सौंप देता है कि अपनी जिंदगी के हर फैसले के लिए उसे अपने पार्टनर पर निर्भर रहना पड़ता है। शुरुआत में यह सब बहु

कोडिपेंडेंट रिलेशनश‍िप एक ऐसा रिलेशशिप होता है जिसके एक व्यक्ति पूरी तरह से अपने पार्टनर पर निर्भर रहता है। वह इस तरह खुद को सामने को सौंप देता है कि अपनी जिंदगी के हर फैसले के लिए उसे अपने पार्टनर पर निर्भर रहना पड़ता है। शुरुआत में यह सब बहुत नया लगता है लेकिन जब रिलेशन को वक्त हो जाता है तो यह सब एक घुटन का रूप ले लेता है। शोधों के मुताबिक कोडिपेंडेंट रिलेशनशिप में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा उनपर निर्भर रहती हैं। इस रिश्ता ऐसा रूप ले लेता है जिसके व्यक्ति अपने आत्मसम्मान के साथ भी समझौता करने को तैयार हो जाता है। इस रिश्ते में व्यक्ति सिर्फ सामने वाली की खुशी और प्राथमिकता का ख्याल रखता है।

क्या आप भी अपने साथी की खुशी के लिए ऐसे छोटे-मोटे सेक्रीफाइज करते रहते हैं। लेकिन, इसके बदले में आपको कुछ नहीं मिलता तो यह समझ लें कि आप भी कोडिपेंडेंट रिलेशनशिप के शिकार हैं। अपने रिश्ते को कोडिपेंडेंट यानी सहनिर्भर रिश्ते से निकालकर समानता के धरातल पर लाने के कई तरीके मौजूद हैं। चीजों को सुधारने से पहले आपको यह समझना जरूरी है कि आख‍िर कोडिपेंडेंट रिलेशनश‍िप क्या होता है। जानकारों का कहना है कि यह व्यवहार का वह तरीका है, जिसमें आप स्वयं को एक ऐसे मुकाम पर पाते हैं, जिसमें आपको अपनी स्वयं की कीमत, पहचान और वजूद के लिए किसी दूसरे की सहमति की आवश्यकता महसूस होती है। इनमें से एक लक्षण यह भी है कि आप किसी की खुशी और जरूरतों के लिए हद से आगे बढ़कर त्याग करने लगते हैं।

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क्यों खतरनाक है कोडिपेंडेंट रिलेशनशिप

अगर आप खुद को इमोशनली फ्री, इंडिपेंडेंट और हेल्दी रखना चाहते हैं तो कोडिपेंडेंट फ्रेंड्शिप्स अवॉयड करें। इनमें झगड़े, जलन और झूठ की ज्यादा सम्भावनाएं रहती हैं। चाहे आप कितना ही अच्छे से इन्हे ट्रीट करें या इनके लिए कितना ही कुछ करें ये आपको ही अपनी दोस्ती की हर बुराई के लिए जिम्मेदार ठहराएंगे। ऐसा इसलिए की इनकी उम्मीदें और इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती हैं। अगर आप ये दोस्ती जारी रखना चाहते हैं तो कम से कम को-डिपेंडेंट नहीं रहें। बहुत से लोग अपनी ही समस्याओं से जूझते रहते हैं और दोस्तों के साथ कहीं बाहर नहीं जाना चाहते। वे दरसल अपनी समस्याओं को खुद ही सुलझाना चाहते हैं और अपने दोस्तों को किसी तरह की तकलीफ नहीं देना चाहते। ऐसा शुरुआत में तो ठीक लगता है लेकिन धीरे धीरे आपके मन में अपने दोस्तों के प्रति नेगेटिव फीलिंग्स भरने लगती हैं।

मन में ऐसा विचार आने लगता है की खराब वक़्त में घर नहीं आना या कम्युनिकेट नहीं करना एक तरह से बेइज्जती करने जैसा ही है। इसलिए खुद को विथड्रॉ नहीं करना चाहिए, बल्कि अपनी समस्याएं दोस्तों से शेयर करेंगे तो आपको ये भी पता चलेगा की कौन वाकई आपका सच्चा दोस्त है और यह दोस्ती डिजर्व करता है। यह भी हो सकता है की आपका दोस्त आपकी ऐसी कोई मदद कर सके जिसकी आपको जरूरत हो। हालांकि को-डिपेंडेंसी अवॉयड करना ठीक है लेकिन जरूरी यह भी है की अपने संस्कार बचाएं रखें और लाइन क्रॉस नहीं करें। अपने दोस्त की फीलिंग्स खराब व्यवहार करके हर्ट नहीं करें। ऐसे में एक दूसरे पर से भरोसा कम होने लगता है। अगर आप दोस्ती जारी रखना नहीं चाहते हैं तो साफ़ बता दें लेकिन किसी को ढलतफ़हमी में नहीं रखें। अगर आप इनकमिंग कॉल रिजेक्ट करते हैं और दोबारा कॉल करने का वादा करते हैं तो किसी भी तरह से अपना वादा जरूर निभाएं।

कमजोर लोग होते हैं कोडिपेंडेंट के शिकार

कोई भी कोडिपेंडेंट बन सकता है। कुछ शोधों में यह बात सामने आयी है कि जिन बच्चों के अभ‍िभावक उन्हें किशोरावस्था में भावनात्मक रूप से दुत्कारते हैं या उनकी उपेक्षा करते हैं उनके कोडिपेंडेंट रिलेशनशिप में पड़ने की आशंका अधिक होती है। ऐसे बच्चों को अपने माता-पिता की जरूरतों के लिए अपनी खुशी को छोड़ना सिखाया जा सकता है। और फिर मुश्क‍िल या चुनौतीपूर्ण इनसान से प्यार और सुरक्षा पाने के लिए उन्हें यही रास्ता समझ में आने लगता है। और यह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन जाता है।

अपूर्णता का अहसास

जब वह व्यक्ति आपके आसपास नहीं होता, तो आप असहज हो जाते हैं। आपको संतोष नहीं मिलता। भले ही आपके साथ कितने ही लोग क्यों न हों। आप हर समय उसी को तलाश करते रहना चाहते हैं। अगर वह आपके करीब नहीं होता, तो आपको सब कुछ अजीब और बेकार लगने लगता है। आपका व्यवहार भी अजीब हो जाता है। आपको अपूर्णता का अहसास होता है। लगता है वो नहीं है, तो बहुत कुछ कमी है। 

क्या है सही सलाह

रिश्ता तोड़ना इसका कोई हल नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपने रिश्ते में मौजूद खामियों को दूर करने का प्रयास करें। हर किसी के लिए सीमायें तय होना जरूरी है। और हर किसी को हक है कि वह अपनी खुशियां तलाश करे। और आपको भी यह हक हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जरूरी है कि आप अपने साथी के बैठकर बात करें। आप उसे बतायें कि आपके रिलेशनश‍िप में क्या परेशानियां आ रही हैं। उससे इस बारे में चर्चा करें कि रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए क्या साझा प्रयास किये जाने की जरूरत है।

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