पैरों में पड़ने वाले काले निशान को भूल कर भी न करें नजरअंदाज, जानें क्या है इसके कारण और बचाव

Updated at: Sep 29, 2020
पैरों में पड़ने वाले काले निशान को भूल कर भी न करें नजरअंदाज, जानें क्या है इसके कारण और बचाव

पैरों पर पड़ने वाले काले निशान को न करें नजरअंदाज, हो सकती है वेन्स संबंधी गंभीर समस्या। जानें किन कारणों से होता है ऐसा और क्या है इससे बचाव।

Vishal Singh
अन्य़ बीमारियांWritten by: Vishal SinghPublished at: May 08, 2018

शरीर के अंदर होने वाली हलचल हमेशा बाहर किसी न किसी रूप में दिखती है। कई चीजें गंभीर हो जाती है तो कुछ कई दिनों तक सामान्य रहती हैं। जो चीजें शरीर में दिखने के बाद कई दिनों तक सामान्य रहे उसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं। जबकि आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसी ही एक समस्या है पैरों पर पड़ने वाले काले निशान। ये निशान दिखने में काफी सामान्य लगते हैं, लेकिन हकीकत में ये सामान्य नहीं होते। पैरों में पड़ने वाले निशान एक तरह की वेन्स संबंधी गंभीर समस्या होती है। जिसे क्रॉनिक वेन्स इंसफीसियंसी कहा जाता है। ज्यादातर लोग इस रोग के बारे में नहीं जानते, लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है। हम आपको इस लेख के जरिए इस रोग से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है ये गंभीर रोग।

क्या है क्रॉनिक वेन्स इंसफीसियंसी? (What Is Venous Insufficiency In Hindi)

हृदय हमारे शरीर के सभी हिस्सों में धमनियों के जरिए ऑक्सीजन युक्त रक्त पंप करता है, जबकि शिराएं ऑक्सीजन युक्त रक्त को हृदय में वापस लाती हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति को क्रॉनिक वेन्स इंसफीसियंसी की समस्या होती है तो उनके नसों को हाथ और पैर से हृदय तक वापस जाने में विषाक्त ऑक्सीजन को वापस करने में परेशानी होती है। आपको बता दें कि हमारे शरीर में मौजूद नसों में दो फ्लैप से बने वाल्व होते हैं, जो रक्त के पिछड़े प्रवाह को रोकते हैं। लेकिन अगर नसे खराब हो जाती हैं तो वाल्व ठीक से बंद होने में विफल रहते हैं। जिससे रक्त हृदय की ओर आगे बढ़ने के बजाय नसों में वापस बह जाता है। इसकी वजह से अक्सर पैरों और हाथों में अलग-अलग समस्याएं पैदा होती है। 

कारण (Causes Of Chronic Venous Insufficiency)

  • पीड़ित का पारिवारिक इतिहास इस रोग से संबंधित।
  • शरीर में रक्त के थक्के होने के कारण।
  • वैरिकाज नसों का होना।
  • गर्भवती होने के दौरान।
  • लगातार मोटापा बढ़ना।
  • धूम्रपान अधिक मात्रा में करना।
  • नसों की सूजन का रहना।
  • लंबे समय तक बैठे या खड़े रहने के कारण। 

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क्रॉनिक वेन्स इंसफीसियंसी के लक्षण (Symptoms Of Chronic Venous Insufficiency)

  • पैरों या टखनों पर मोटी या सख्त त्वचा तैयार होना।
  • खुला सोर्स।
  • पैरों में भारीपन, धड़कन या सुस्त दर्द महसूस होना।
  • पैरों और टखनों की सूजन लगातार बढ़ना।
  • कई मामलों में पैरों में ऐंठन या खुजली होती है।
  • गहरे रंग की पैच, भूरी त्वचा बनना।
  • खून के थक्के नसों में पैदा होना।

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बचाव (Preventions) 

  • कंप्रैशन वाले मोजे पहनने की आदत डालें, ऐसे मोजे पहनने से आपके पैर पर काफी दबाव बना रहता है जिससे कि आपका खून वापस पैरों में बहनने के बजाए शरीर में अच्छी तरह सर्कुलेट होता है। ऐसे मोजे आपके इस समस्या को दूर रखने के साथ आपके पैरों में हो रही सूजन को भी कम कर सकते हैं। 
  • इस समस्या से बचाव करने के लिए आप अपने पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें। इससे आपके रक्त को हृदय की ओर खींचने में काफी मदद मिलती है।
  • त्वचा को मॉइस्चराइज रखें और मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने के लिए नियमित रूप से क्रीम लगाएं। 
  • गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करने से हमेशा बचें रहें।
  • नियमित रूप से रोजाना करीब आधा घंटा जरूर वॉकिंग करें। 

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