• Follow Us

डायबिटीक लोगों के लिए भी फायदेमंद है 'कार्निवोर डाइट', जानें क्या है ये और इसके अन्य फायदे

Updated at: Feb 19, 2020
डायबिटीक लोगों के लिए भी फायदेमंद है 'कार्निवोर डाइट', जानें क्या है ये और इसके अन्य फायदे

कार्निवोर डाइट खाने के पीछे का मकसद है कि शरीर को जीरो कार्ब्स मिले। वहीं इस डाइट के कई और फायदे भी हैं।

Written by: Pallavi KumariPublished at: Feb 19, 2020

कार्निवोर डाइट (Carnivore Diet) एक प्रतिबंधात्मक आहार है, जिसमें केवल मांस, मछली और अन्य पशु खाद्य पदार्थ जैसे अंडे और कुछ डेयरी उत्पाद शामिल हैं। इस डाइट में फल, सब्जियां, फलियां, अनाज, नट और बीज सहित अन्य सभी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता है। इस डाइट में लैक्टोज वाले डेयरी पदार्थों के सेवन को खत्म करने या सीमित करने की सलाह दी जाती है। जैसे कि दूध और डेयरी उत्पादों में पाई जाने वाला शुगर इत्यादि।

inside_whatarecarnivorefoods

कार्निवोर डाइट विवादास्पद धारणा से उपजी है कि मानव की शुरुआती आबादी यानी कि जब मानव सभ्यता की शुरूआत हुई थी तब से लोग मांस और मछली खाती है। पर अब उच्च-कार्ब वाले आहार कई बीमारियों का कारण बन रहे हैं। अन्य लोकप्रिय लो-कार्ब डाइट, जैसे कीटो और पैलियो डाइट, कार्ब सेवन को सीमित करें, लेकिन बाहर न करें। हालांकि, कार्निवोर डाइट का उद्देश्य शून्य कार्ब्स है। शॉन बेकर, एक पूर्व अमेरिकी आर्थोपेडिक चिकित्सक, कार्निवोर डाइट के सबसे प्रसिद्ध प्रस्तावक हैं। उनका मानना है कि कार्निवोर डाइट का पालन करने का प्रमाण ये है कि यह अवसाद, चिंता, गठिया, मोटापा, मधुमेह जैसी बीमारियों का इलाज कर सकता है।हालांकि, अभी भी कई शोधों में इन कार्निवोर डाइट के प्रभावों का विश्लेषण नहीं किया है। पर फिर भी 2017 में बेकर के मेडिकल लाइसेंस को न्यू मैक्सिको मेडिकल बोर्ड ने इसके फायदों को माना है।

कार्निवोर डाइट का पालन कैसे करें?

आहार से सभी पौधों वाले खाद्य पदार्थों को निकाल कर, विशेष रूप से मांस, मछली, अंडे और कम-लैक्टोज डेयरी उत्पादों की छोटी मात्रा में भोजन करना ही कार्निवोर डाइट का पालन करना है। खाने के लिए गोमांस, चिकन, सूअर का मांस, लैंब, टर्की का मांस, सार्डिन, सफेद मछली, और भारी मात्रा में क्रीम और हार्ड पनीर आदि इसमें शामिल हैं। आहार के समर्थक आपकी दैनिक ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मांस के वसायुक्त कटौती पर जोर देते हैं। कार्निवोर आहार पीने के पानी और हड्डी शोरबा को प्रोत्साहित करता है लेकिन चाय, कॉफी और पौधों से बने अन्य पेय पीने को हतोत्साहित करता है। यह प्रतिदिन खाने के लिए कैलोरी सेवन, सर्विंग साइज या कितने भोजन या स्नैक्स के बारे में कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं देता है। आहार के अधिकांश प्रस्तावक आपकी इच्छानुसार खाने का सुझाव देते हैं।

इसे भी पढ़ें : ब्‍लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए ये घरेलू इलाज हैं बेहतर, नहीं होगा कोई साइडइफेक्‍ट!

कार्निवोर डाइट के फायदे

डायबिटीज में है फायदेमंद

डायबिटीक लोगों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकते हैं। वास्तव में, परिष्कृत कार्ब्स और शर्करा वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करना अक्सर मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए अनुशंसित होता है। हालांकि, कार्निवोर आहार पर कार्ब्स में कमी करता है पर ये कम मात्रा में हूी पौष्टिक और हाई प्रोटीन दे कर शरीर को बार-बार होने वाली क्रेविंग से बचाता है।

लो फैट और हाई प्रोटीन डाईट

चूंकि कार्निवोर आहार कार्ब्स को बाहर करता है, यह कुकीज़, केक, कैंडी, सोडा, पेस्ट्री और इसी तरह के उच्च कार्ब खाद्य पदार्थों को समाप्त करता है।ये खाद्य पदार्थ फायदेमंद पोषक तत्वों में कम और अक्सर कैलोरी में उच्च होते हैं। इस प्रकार, उन्हें एक स्वस्थ, संतुलित आहार में सीमित किया जा सकता है। वहीं इसमें लो फैय और हाई प्रोटीन होता है, इस तरह किसी भी व्यक्ति के लिए ये डाइट एक बैलेंस डाइट हो सकती है।अपने प्रोटीन का सेवन बढ़ाने और अपने कार्ब सेवन को कम करने से आपको वजन कम करने में मदद मिल सकती है। उस ने कहा, कार्निवोर आहार पर प्रोटीन की अत्यधिक उच्च मात्रा और कार्ब्स का पूर्ण उन्मूलन, वजन कम करने के लिए आवश्यक है।

इसे भी पढ़ें: Diabetes and stress: क्या तनाव से बढ़ती हैं डायबिटीज रोगियों की समस्याएं? जानें दोनों का आपस में संबंध

कार्निवोर डाइट के नुकसान

  • - इसमें फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा उच्च होती है।
  • -कुछ सूक्ष्म पोषक तत्वों और लाभकारी चीजों की कमी हो सकती है।
  • -शरीर को सही मात्रा में फाइबर नहीं मिल पाता है।

Read more articles on Diabetes in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK