एंटीवायरल गुणों से भरपूर है भुई आंवला (भूमि आंवला), एक्सपर्ट से जानें इसके 7 फायदे और इस्तेमाल का तरीका

भूमि आंवला की पत्तियां खट्टी होती हैं और ये अपने यहां गांवों में आसानी से मिल जाती हैं। आइए जानते हैं इसके फायदे और इस्तेमाल।

Pallavi Kumari
आयुर्वेदWritten by: Pallavi KumariPublished at: Jun 15, 2021
Updated at: Jun 15, 2021
एंटीवायरल गुणों से भरपूर है भुई आंवला (भूमि आंवला), एक्सपर्ट से जानें इसके 7 फायदे और इस्तेमाल का तरीका

आयुर्वेद में हमारी कई बीमारियों का प्राकृतिक इलाज है। इन प्राकृतिक इलाजों के लिए आमतौर पर जड़ीबूटियों, मसालों और हर्ब्स की मदद ली जाती है। ऐसा ही एक आयुर्वेदिक हर्ब है  भुई आंवला या भूमि आंवला (Phyllanthus Niruri)। ये पतली-पलती आंवले की पत्तियों जैसा पौधा हमारे यहां पानी वाली जगहों के पास या पानी की क्यारियों के पास हर जगह मिल जाता है। पर क्या आपको पता है कि ये छोटा सा पौधा आपके लिए कितना फायदेमंद है?  इस छोटे से पेड़ के बड़े फायदों के बारे में इनक्रेडिबल आयुर्वेद संस्था के संस्थापक और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. अबरार मुल्तानी (Dr. Abrar Multani) बताते हैं कि ये एक पौधा कई एंटीवायरल गुणों की भरमार है। 

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भुई आंवला या भूमि आंवला (Phyllanthus Niruri) कई मायनों में शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। पारंपरिक चिकित्सा में भुई आंवला का लिवर की बीमारियों का इलाज करने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता था। इस पौधे के फाइटोकेमिकल्स लिवर की बीमारियों में कारगर इलाज के रूप में काम करते हैं। पर इतना ही नहीं से आम मौसमी बीमारियों को बचाने के अलावा त्वचा और यूटीआई इंफेक्शन व पेशाब से जुड़ी परेशानियों को भी ठीक करने में मदद करता है। तो, आइए जानते हैं भुई आंवला या भूमि आंवला के कुछ बेहतरीन फायदे (Bhumi Amla benefits)

भूमि आंवला के फायदे (Bhumi Amla benefits)

1. लिवर टॉनिक है भूमि आंवला

भूमि आंवला लिवर की बीमारियों के लिए रामबाण इलाज है। ये लिवर में हेपेटोप्रोटेक्टिव, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीवायरल गतिविधियों के कारण होने वाले किसी भी नुकसान से बचाता  भूमि आंवला लिवर में सूजन, पीलिया और  कमजोर लिवर की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा  ये लिवर के काम-काज को भी तेज करता है और डिटॉक्सीफिकेशन के प्रोसेस को तेज करता है।  जिन लोगों को मतली या खाना न पचा पाने की परेशानी है या खाने के बाद दस्त आने की परेशानी होती है, उनके लिए भी ये बहुत फायदेमंद है।

2. पेशाब से जुड़ी परेशानियों को कम करता है

पेशाब से जुड़ी परेशानियों को दूर भगाने में भूमि आंवला बहुत फायदेमंद है। असल में ये डाइयूरेटिक (diuretic) गुणों से भरपूर है, जो कि पेशाब की परेशानी को दूर करते हैं और यूटीआई इंफेक्शन को भी दूर करते हैं। इसके अलावा ये शरीर से पानी और सोडियम को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं। ये हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में मदद करते हैं। 

3. डायबिटीज को कंट्रोल करने में मददगार 

पुराने जमाने में डायबिटीज में मरीज भुई आंवला को चबाया करते थे और उनका मानना था कि ये ब्लड शुगर को संतुलित करने में भी मददगार है। वहीं कुछ शोध बताते हैं कि इसका अर्क या रस ब्लड शुगर को कम करने और इसमें अचानक होने वाली बढ़ोतरी को कम करते हैं। साथ ही ये डायबिटीज के मरीज में मेटाबोलिज्म को सही करके वजन संतुलित रखने में मदद करते हैं। 

4. खांसी और जुकाम

भूमि आंवला में कफ को संतुलित करने का गुण होता है इसलिए ये खांसी, अस्थमा, सांस फूलना और सांस से जुड़ी परेशानियों को कम करता है। इसका आप काढ़ा बना कर या कई प्रकार से इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल इसके एंटी वायरल गुण मौसी इंफेक्शन और बीमारियों से बचाने का काम करते हैं। इसमें कुछ एंटी ऑक्सीडेंट गुण भी जाते हैं, जो कि आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करके आपको मौसम बदलने के साथ होने वाले फ्लू और सर्दी जुकाम से बचाते हैं। 

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5. टायफाइड के बुखार को कम करता है

भूमि आंवला अपने कड़वे रस के कारण और पित्त संतुलन में मदद करता है। ये टायफाइड के बुखार को भी कम करता है और दवाओं के साथ इसके प्रभाव को बढ़ाता है। ये चयापचय को भी ठीक करने में मदद करता है और शरीर से गंदगी को डिटॉक्स करने में मदद करता है। बुखार को दूर करने के लिए इसके मासूम पत्ते को काली मिर्च मिला कर पी लें। पीसने के बाद छोटी -छोटी गोलियां बना कर इसका सेवन करें। इसके अलावा आप बुखार में  घी, पिप्पली के साथ भूमि आंवला मिला कर लेने से सकते हैं, जो कि बुखार को कम करने में मदद करेगा। 

6. अपच और एसिडिटी में कारगर

अपच और एसिडिटी होने पर भूमि आंवला के पत्तों को चबाने से इससे राहत मिलती है। दरअसल ये पित्त संतुलन को सही करता है और पेट की गर्मी को शांत करता है।  इसके अलावा इसका रेगुलर सेवन करने से ये पाचनतंत्र को सही करता है और अपच और एसिडिटी की परेशानियों को कम करने में मदद करता है। साथ ही पेट में एसिड के रिलीज को भी कम करता है। इसके अलावा अगर आपका पेट खराब है ये आपको दस्त की परेशानी हो रही है, तो भूमि आंवला को पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो मेथी का चूर्ण 5 ग्राम मिलाएं। इसे उबालते रहें और इसे छानकर पिएं। इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से दस्त पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। 

7. गठिया के दर्द से आराम दिलाता है

अगर आपके शरीर में वात ज्यादा है या आपको गठिया की समस्या है तो भूमी आंवला का सेवन इस परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए भूमी आंवला को पीस कर इसमें काला नमक मिलाकर दर्द वाली जगह पर लगाएं। इससे गठिया के दर्द से आराम मिलेगा। 

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भूमि आंवला का इस्तेमाल कैसे करें-How to use Bhumi Amla 

1. भूमि आंवला जूस बनाएं

भूमी आंवला जूस बनाने के लिए 1 गिलास पानी के साथ इसके पत्तों को मिला कर पिए लें। फिर इसनें नींबू और नमक मिला कर इसका सेवन करें। इसे दिन में एक बार नाश्ते से पहले लें।

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2. भूमि आंवला चूर्ण

भूमि आंवला चूर्ण बनाने के लिए इसके पत्तों, फूल और छोलों को सूखा लें। अब इसे पीस लें और इसका  चूर्ण बना लें। इसे लंच और डिनर के बाद दिन में दो बार लें। इसके अलावा अगर आपको कब्ज हो रहा हो तो, इसका एक चम्मच चूर्ण लें और गर्म पानी पिएं। इससे आपका पेट साफ रहेगा।

3. भूमि आंवला चाय

दोपहर और रात के खाने के बाद पानी के बाद अच्छा पाचन के लिए आप भूमि आंवला चाय ले सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बस आपको इसे काली चाय की तरह बनाना है। इसके लिए आपको इसके पत्तो को चाय के लिए उबलते पानी में डाल लें और बाकी चीजों को डाल कर नॉर्मल चाय बनाएं। फिर इसमें हल्का सा काला नमक और नींबू का रस मिलाएं और सर्व करें। भूमि  आंवला पाउडर लिवर की सुरक्षा और एंटीवायरल गुणों के कारण लिवर के लिए अच्छा है पर साथ ही यह बालों के रोम को नुकसान से बचाने , बाल झड़ने से रोकने और नए बालों को उगने में मदद करता है। बालों को झड़ने से रोकने के लिए आप हल्के भोजन लेने के बाद दिन में दो बार 1 कप गुनगुने पानी के साथ भूमि आंवला पाउडर लें। ये आपके बालों को लंबा और मजबूत बनाने में मदद करेगा।

भूमि आंवला को आप अपने गमले में लगा सकते हैं या साफ पानी वाली जगहों पर पा सकते हैं। इसका पौधा सीधा और भूमि पर फैलने वाला होता है। इसकी पत्ती छोटे और चपटे होते हैं जो कि आंवला या इमली के पत्ती के छोटे होते हैं। पर आंवले के पत्तों की तुलना में ये छोटे एवं चमकीले होते हैं। इस पर छोटे-छोटे फूल भी होते हैं और इसके पूरे पौछे का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

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