क्या आप जानते हैं पेट के माइग्रेन के बारे में? एक्सपर्ट से जानिए इसके लक्षण कारण और इलाज के बारे में

Updated at: Mar 03, 2021
क्या आप जानते हैं पेट के माइग्रेन के बारे में? एक्सपर्ट से जानिए इसके लक्षण कारण और इलाज के बारे में

पेट का माइग्रेन सिर में होने वाले माइग्रेन की तरह होता है, लेकिन इसके लक्षण बहुत सामान्य से होते हैं, इसलिए अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

Prins Bahadur Singh
अन्य़ बीमारियांWritten by: Prins Bahadur SinghPublished at: Mar 03, 2021

आप में से अधिकतर लोग सिर्फ सिर के माइग्रेन के बारे में जानते होंगे लेकिन माइग्रेन सिर्फ सिर में ही नहीं पेट में भी होता है। पेट का माइग्रेन जिसे एब्डॉमिनल माइग्रेन के रूप में भी जाना जाता है ज्यादातर बच्चों में पाया जाता है। एब्डॉमिनल माइग्रेन छोटे बच्चे जिनकी उम्र 5 साल से 10 साल के बीच की होती है उनमें ज्यादातर देखा जाता है। ऐसा नही है कि यह माइग्रेन सिर्फ बच्चों को ही होता है बड़े लोगों में भी इसका प्रभाव देखा गया है। पेट के माइग्रेन में सबसे ज्यादा पेट दर्द, उल्टी और मरोड़ के साथ-साथ भूख की दिक्कतें होती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन बच्चों को पेट के माइग्रेन (Abdominal Migraine) की समस्या होती है उन्हीं को आगे चलकर सिर में होने वाले माइग्रेन से भी जूझना पड़ता है। पेट का माइग्रेन भी सिर में होने वाले माइग्रेन के दर्द की तरह ही होता है इसमें भी 2 से 36 या फिर 72 घंटों के बीच कभी भी अचानक पेट में दर्द, मरोड़ या उल्टी शुरू हो जाती है।  पेट के माइग्रेन की समस्या को लेकर हमने दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के  Gastroenterology & Hepatology विभाग के डायरेक्टर डॉ योगेश बत्रा से बातचीत की, इस लेख में आइए जानते हैं डॉ बत्रा से पेट के माइग्रेन के लक्षण, कारण और उपचार के बारे में।

abdominal migraine

कैसे शुरू होता है पेट का माइग्रेन या एब्डॉमिनल माइग्रेन

डॉक्टर बत्रा ने बताया कि पेट का माइग्रेन शरीर में पाए जाने वाले दो यौगिकों, हिस्टामाइन और सेरोटोनिन की मात्रा में कमी या अधिकता की वजह से शुरू होता है। एब्डॉमिनल माइग्रेन बच्चों में चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थ या प्रसंस्कृत मीट आदि को खाने से ट्रिगर हो सकता है। इस समस्या में ज्यादातर पेट में मरोड़ या दर्द शुरू हो जाता है, कभी-कभी उल्टी भी होती है। एब्डॉमिनल माइग्रेन ज्यादातर 5 से 10 साल के बच्चों में ही होता है, लड़कों की अपेक्षा लड़कियां इस बीमारी से ज्यादा ग्रसित होती हैं। एब्डॉमिनल माइग्रेन को समझने के लिए प्रमुख बातें इस प्रकार से हैं।

  • पेट का माइग्रेन अधिकतर बच्चों में ही होता है।
  • इस बीमारी में पेट दर्द, मरोड़ और उल्टी होती है।
  • आगे चलकर यह बीमारी सिर के माइग्रेन में भी बदल जाती है।
  • यह माइग्रेन बच्चों में आनुवांशिक कारणों से भी होता है।
  • 2 से 72 घंटों तक इसके लक्षण बरक़रार रह सकते हैं।
  • एब्डॉमिनल माइग्रेन न्यूरोलॉजिक और एंडोक्रिनोलॉजिक (हार्मोन) दोनों से हो सकता है।

पेट का माइग्रेन होने के कारण (What Causes Abdominal Migraine)

ज्यादातर बच्चों में होने वाला पेट का माइग्रेन शरीर में पाए जाने वाले दो यौगिकों हिस्टामाइन और सेरोटोनिन के स्तर में होने वाले बदलाव की वजह से होता है। पेट के माइग्रेन के होने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं इसका पता आजतक सही तरीके से नही चल पाया है। यह माइग्रेन आनुवांशिक कारणों से भी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह माइग्रेन लगभग 60 प्रतिशत बच्चों में आनुवांशिक कारणों से ही पाया गया है। यह बीमारी लड़कों से ज्यादा लड़कियों में पाई जाती है। एब्डॉमिनल माइग्रेन के ट्रिगर होने के कुछ कारण हैं जो इस प्रकार से हैं।

  • चॉकलेट, डिब्बाबंद मीट और अन्य खाद्य पदार्थों में नाइट्रेट
  • हवा का पेट में होना
  • थकावट
  • मोशन सिकनेस

पेट के माइग्रेन के लक्षण (Abdominal Migraine Symptoms)

पेट में लगातार दर्द, मरोड़ और उल्टी की दिक्कत को पेट का माइग्रेन कहते हैं। पेट के माइग्रेन की स्थिति में 2 घंटे से लेकर 72 घंटों तक उल्टी, पेट में दर्द और मरोड़ की समस्या हो सकती है। आमतौर पर मेट का माइग्रेन नाभि के आसपस वाले हिस्से में होता है। इस स्थिति में बीमार बच्चों को नींद से आराम मिलता है। पेट के माइग्रेन के कुछ ख़ास लक्षण नही होते हैं, सामान्य रूप से पेट में दर्द, मरोड़ या उल्टी की समस्या होती है, यह माइग्रेन 3 दिन तक या तीन बाद अटैक करता है। पेट में होने वाले सामान्य पेट दर्द से अलग पेट के माइग्रेन का दर्द पेट के बीचो बीच नाभि के आसपास वाली जगह पर ही होता है। इस बीमारी में मरोड़ शुरू होना अचानक उल्टी या पेट दर्द का 2 घंटे से लेकर 72 घंटे तक बने रहना आम है। पेट के माइग्रेन या एब्डॉमिनल माइग्रेन के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

  • पेट का पीलापन या फूल जाना
  • उतावलापन महसूस होना
  • ज्यादा जम्हाई और सुस्ती
  • भूख में कमी या खाने का मन न करना
  • आँखों के नीचे कालापन या डार्क सर्किल का होना
  • घंटों या काफी देर तक लगातार दर्द का बने रहना
  • जी मचलाना या मुहं से पानी छूटना
  • उल्टी
symptoms of abdominal migraine

पेट के माइग्रेन का इलाज (Abdominal Migraine Treatment)

पेट के माइग्रेन का इलाज डॉक्टर लक्षणों और उम्र के हिसाब से करते हैं। सामान्य माइग्रेन की तरह ही इसका भी इलाज किया जाता है। अगर लक्षण और स्थिति ज्यादा गंभीर नही है तो माइग्रेन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सामान्य दवाओं से इसका इलाज किया जा सकता है। पेट के माइग्रेन की समस्या में कोई विशेष जांच नही मौजूद है जिससे इसकी स्थिति का पता लगाया जा सके। आमतौर पर इसकी जांच लैब टेस्ट और इमेजिंग की मदद से की जाती है। एब्डॉमिनल माइग्रेन में कभी-कभी इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी (ईईजी) के सहारे भी परीक्षण किया जाता है। इस बीमारी सबसे अधिक ध्यान देने वाली बात यह होती है कि कौन -कौन से खाद्य पदार्थ पेट के माइग्रेन को ट्रिगर कर रहे हैं। ट्रिगर करने वाले खाद्य पदार्थों से बच्चों की दूरी जरूरी है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए। बच्चों में पेट डर की स्थिति को लेकर चिंता या अवसाद की स्थिति न उत्पन्न हो इसका भी विशेष ख्याल रखा जाना चाहिए।

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