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हाई बीपी के मरीजों को रहता है इन 4 बीमारियों के होने का खतरा, जानें कितना रहना चाहिए ब्लड प्रेशर

अन्य़ बीमारियां By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 28, 2013
हाई बीपी के मरीजों को रहता है इन 4 बीमारियों के होने का खतरा, जानें कितना रहना चाहिए ब्लड प्रेशर

High Blood Pressure: तेजी से बदलती जीवनशैली और खान-पान की खराब आदतों के कारण अधिकतर लोग ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान हो रहे हैं हालांकि इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि हमें यह पता हो कि सही ब्लड प्रेशर क्या हो

हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) यानी कि उच्‍च रक्‍तचाप आधुनिक जीवनशैली में होने वाली गंभीर समस्‍या में से एक है। हाई ब्‍लड प्रेशर के कारण ही कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्‍योर, स्‍ट्रोक, किडनी फेल्‍योर और कई अन्‍य तरह की समस्‍याएं पनप रही हैं। हाई ब्‍लड प्रेशर कितना भयाव‍ह रोग है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रत्‍येक वर्ष दुनियाभर में 90 लाख व्‍यक्ति इसके कारण मौत का शिकार हो रहे हैं। आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)कोई संकेत या लक्षण नहीं होता। ज्यादातर लोग कई वर्षों तक हाई ब्‍लड प्रेशर के बारे में जानें बिना भी इस समस्‍या से ग्रस्‍त रहते हैं।

क्या होता है हाई ब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर की समस्‍या होने पर धमनियों में रक्‍त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव वृद्धि के कारण धमनियों में रक्‍त प्रवाह बनाये रखने के लिए दिल को सामान्य से ज्‍यादा काम करने की जरूरत पड़ती है। हाई बीपी के कारण आपका हृदय काम करना बंद कर सकता है, जिसे हार्ट फेल्‍योर कहते हैं। इसके अलावा उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या में आपकी रक्‍त धमनियां, किडनी और शरीर के अन्‍य अंग भी काम करना बंद कर सकते हैं।

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रक्‍तचाप के प्रकार

प्रत्‍येक व्‍यक्ति के ब्लड प्रेशर में दो माप शामिल होती हैं, पहली सिस्टोलिक और दूसरी डायस्टोलिक। इसे उच्‍चतम रीडिंग और निम्‍नतम रीडिंग भी कहा जाता है। किसी भी व्‍यक्ति का बीपी इस बात पर निर्भर करता है कि मांसपेशियों में संकुचन हो रहा है या धड़कनों के बीच तनाव मुक्‍तता हो रही है। आराम के समय सामान्य रक्‍तचाप में उच्‍चतम रीडिंग यानी सिस्टोलिक 100 से 140 तक और डायस्‍टोलिक यानी निचली रीडिंग 60 से 90 के बीच होती है। यदि कई दिन तक किसी व्‍यक्ति का रक्‍तचाप 90 और 140 से ऊपर बना रहता है, तो इसे उच्‍च रक्‍तचाप माना जाता है।

ध्‍यान रखने वाली बातें

यदि आप सामान्‍य हैं, तब भी आपको ब्लड प्रेशर के प्रति सचेत रहना चाहिए। आपको अपने ब्‍लड प्रेशर के स्‍तर के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यदि आपका रक्‍तचाप सामान्‍य है, तो डॉक्‍टर से इसे सामान्‍य बनाए रखने के लिए परामर्श कर सकते हैं। यदि यह सामान्‍य से ज्‍यादा है तो समय से लिया गया उपचार शरीर के अंगों को होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा सकता है।

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कब ज्‍यादा होता है रक्‍तचाप

उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या ज्‍यादा समय तक नहीं रहती। सोने के दौरान इसका स्‍तर कम हो जाता है और जब आप जागते हैं तो इसका स्‍तर बढ़ जाता है। उत्‍तेजित होने, नर्वस होने या एक्टिव होने पर भी रक्‍तचाप घटता-बढ़ता है। यदि आपके रक्‍तचाप का स्‍तर अधिकतर समय नॉर्मल बना रहता है, तो आपको स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं हो सकती हैं। ब्‍लड प्रेशर बढ़ने के साथ ही इसका खतरा भी बढ़ता जाता है।

ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या उम्र के साथ बढ़ती है। यदि आपकी हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल है, तो यह समस्‍या आपको कुछ समय बाद हो सकती है। जिन लोगों को हाई बीपी की समस्‍या है, वे कुछ उपायों के जरिए उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आपको डॉक्‍टर द्वारा दिए गए सुझावों का पालन करना चाहिए और समय से ट्रीटमेंट लेना होगा।

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