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    कहीं आपके कान में दर्द का कारण सेंसरीन्यूरल रोग तो नहीं? जानें इसके लक्षण

    कान की समस्‍या By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 17, 2018
    कहीं आपके कान में दर्द का कारण सेंसरीन्यूरल रोग तो नहीं? जानें इसके लक्षण

    कान हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। इस लेख में जानें क्या हैं कान की समस्याएं।

    कहते हैं, जैसा हम सुनते और देखते हैं उसका व्यक्तित्व पर काफी प्रभाव पड़ता है। लेकिन तब क्या जब हम सुन ही न पाएं। जी हां कान हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। इनका स्वस्थ होना बेहद जरूरी होता है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि कान की समस्या क्या होती हैं और इनसे कैसे बचा जाए।

    कई बार माता-पिता नवजात के सुनने की अक्षमता पर ध्‍यान नहीं देते। लेकिन, बच्‍चे की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उन्‍हें अपनी गलती का अहसास होने लगता है। उन्‍हें लगता है कि काश उन्‍होंने समय रहते ही अपने बच्‍चे के कानों की जांच करवायी होती। कान में कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। इनमें से कुछ जन्मजात होती हैं और कुछ बाद में किसी दुर्घटना या बिमारी की वजह से हो सकती हैं।

     

    कान कैसे करते हैं काम 

    दरअसल कान के तीन हिस्से होते हैं।
    1-  आउटर ईयर
    2-  मिडल ईयर
    3-  इनर ईयर

    इसमें आउटर ईयर वातावरण से ध्वनि तरंगों के रूप में आवाजों को ग्रहण करता है। और यह तरंगें कैनाल से होकर ईयरड्रम तक पहुंचती हैं और इनकी वजह से ईयरड्रम कंपन करने लगता है। इस कंपन से मिडल ईयर में स्थित 3 बेहद छोटी हड्डियां गतिमान हो जाती हैं और इस गति के कारण कान के अंदर मौजूद द्रव हिलना शुरू हो जाता है। इनर ईयर में कुछ सुनने वाली कोशिकाएं होती हैं, जो इस द्रव की गति से थोड़ी मुड़ जाती हैं और इलेक्ट्रिक पल्स के रूप में संकेत दिमाग को भेजती हैं। ये संकेत ही हमें शब्दों और ध्वनियों के रूप में सुनाई देते हैं। 

    हियरिंग लॉस के प्रकार  

    हियरिंग लॉस यानी दो प्रॅकार, कंडक्टिव हियरिंग लॉस, सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस से हो सकता है। 

    कंडक्टिव हियरिंग लॉस

    कंडक्टिव हियरिंग लॉस कान के बाहरी और बीच के हिस्से में हुई किसी क्षति या किसी बीमारी की वजह से हो सकता है। इसीलिए इसे बीमारी की वजह से होने वाला बहरापन भी कहा जाता है। इसके होने की कुछ वजहें निम्न प्रकार से हैं।

    • कानों से पस बहने या किसी इन्फेक्शन के कारण
    • कानों की हड्डी में कोई खराबी आने से  
    • कान के पर्दे का क्षतिग्रस्त हो जाना
    • किसी कैंसर रहित ट्यूमर के कारण  

    सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस

    सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस कान के अंदर आई किसी खराबी के कारण हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब हियर सेल्स ठीक से काम नहीं करते या नष्ट होने लगते हैं। सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

    • बढ़ती उम्र  
    • कुछ खास तरह की दवाएं। जैसे जेंटामाइसिन का इंजेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन आदि
    • कुछ बीमारियां जैसे डायबीटीज और असंतुलित हॉर्मोंस। इसके अलावा मेनिंजाइटिस, खसरा, कंठमाला आदि बीमारियां भी सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस का कारण बन सकती हैं।  
    • अधिक शोर

    इसके अलावा कई लोग कान साफ करने समय धातु की नुकीली चीज का इस्‍तेमाल करते हैं। इससे कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है।

    कानों में जमा होने वाली वैक्स (मैल) के कारण भी लोगों को हियरिंग लॉस व बच्चों में डिलेड स्पीच हो सकता है। इसलिए कान में वैक्स जमा होने को गंभीरता से लेना चाहिए। और इसको डॉक्टर से साफ कराना चाहिए। इसके अलावा कान में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर बिना समय बिताए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। 

    ईयरफोन से रहें सावधान

    नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ इस संदर्भ में बताते हैं कि ईयरफोन्स भी बहरे पन का कारण बन सकते हैं। इनके लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबेल तक कम हो सकती है। फलस्वरूप कान का पर्दा वाइब्रेट होने लगता है व दूर की आवाज सुनने में परेशानी होने लगती है। यहां तक कि इससे बहरापन भी हो सकता है। इसके अलावा ईयरफोन्स के अत्यधिक प्रयोग से कान में दर्द, सिर में दर्द या नींद न आना आदि समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं इनके कारण वर्टिगो, बहरापन और लैबिरिंथिस जैसी बीमारियां भी होने का खतरा हो सकता है।   

    सुनने की क्षमता में कमी जन्म से भी हो सकती है, इसीलिए पैदा होने के बाद प्रत्येक बच्चे की सुनने की क्षमता की जांच जरूर करानी चाहिए। लेकिन सामान्य बाल रोग विशेषज्ञ इस प्रकार की जांच नहीं करते हैं। इसके लिए किसी ईएनटी रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। याद रखिए सुनने की क्षमता ईश्‍वर की दी एक अनमोल कृति है। इसे यूं ही बेकार न करें। अपने कानों का पूरा खयाल रखें और किसी भी प्रकार की समस्‍या होने पर चिकित्‍सक से संपर्क करें।

    सुनने की क्षमता में कमी जन्म से भी हो सकती है, इसीलिए पैदा होने के बाद प्रत्येक बच्चे की सुनने की क्षमता की जांच जरूर करानी चाहिए। लेकिन सामान्य बाल रोग विशेषज्ञ इस प्रकार की जांच नहीं करते हैं। इसके लिए किसी ईएनटी रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। 

    कानों में जमा होने वाली वैक्स (मैल) के कारण भी लोगों को हियरिंग लॉस व बच्चों में डिलेड स्पीच हो सकता है। इसलिए कान में वैक्स जमा होने को गंभीरता से लेना चाहिए। और इसको डॉक्टर से साफ कराना चाहिए। इसके अलावा कान में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर बिना समय बिताए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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