ऑक्सीटोसिन हार्मोन क्या है और ये शरीर में कैसे बनता है? एक्सपर्ट से जानें इसका उपयोग

Updated at: Jan 25, 2021
ऑक्सीटोसिन हार्मोन क्या है और ये शरीर में कैसे बनता है? एक्सपर्ट से जानें इसका उपयोग

ऑक्सीटॉसिन हॉर्मोन महिलाओं और पुरुष दोनों के शरीर में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस हॉर्मोन का निर्माण, काम, उपयोग और नुकसान के बारे में जानें...

Garima Garg
अन्य़ बीमारियांWritten by: Garima GargPublished at: Jan 25, 2021

अकसर आपने देखा होगा कि माओं को जन्म के बाद से ही अपने बच्चे की तरफ अत्यधिक प्यार और लगाव होने लगता है। इसके अलावा जब व्यक्ति किसी के प्यार में पढ़ता है या किसी के नजदीक जाता है तो एक आनंद की अनुभूति होती है। इन सबका संबंध ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन से है। इस ऑक्सीटोसिन को लव हॉर्मोन भी कहते हैं। इसी के कारण व्यक्ति आनंद का अनुभव करते हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह हार्मोन केवल महिलाओं में होता है? तो बता दें कि नहीं, यह हॉर्मोन महिलाओं के साथ-साथ पुरुष में भी पाया जाता है। पुरुष और महिलाओं के शरीर में समान मात्रा में इसका निर्माण होता है। इस हॉर्मोन न केवल किडनी, ब्रेस्ट, गर्भाशय, प्रोस्टेट आदि को प्रभावित करता है बल्कि यह मनोवैज्ञानिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। आज हम आपको से लेकर माध्यम से बता रहे हैं कि ऑक्सीटॉसिन क्या है? यह हॉर्मोन बॉडी में कैसे बनता है? इसका कारण और उपयोग क्या है? पढ़ते हैं आगे...

oxytocin

क्या है ऑक्सीटॉसिन हॉर्मोन (oxytocin hormone in Hindi)

अगर आप ऑक्सीटॉसिन हार्मोन के बारे में जानना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको पीयूष ग्रंथि को समझना होगा। यह ग्रंथि मटर के आकार की होती है जो दिमाग की सतह पर पाई जाती है। इस ग्रंथि का दूसरा नाम मास्टर ग्रंथि भी है। बता दें कि इस ग्रंथि के दो भाग होते हैं। इन दोन भागों के नाम एंटीरियर और पोस्टीरियर है। अगर हम एंटीरियर की बात करें तो यह मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस द्वारा उत्पन्न हुए हार्मोन से जुड़ा है। वहीं पोस्टीरियर हाइपोथैलेमस द्वारा बनाए गए दो हार्मोन वेसोप्रोसिन और ऑक्सीटॉसिन को स्त्रावित करने का काम करता है। यह न केवल महिलाओं की प्रजनन प्रणाली के लिए जरूरी है बल्कि पुरुषों में भी ऑक्सीटोसिन एक अहम भूमिका निभाता है। इससे पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन करने की क्षमता में सुधार आता है, जिससे पुरुष के व्यवहार और सामाजिक संपर्क अच्छे होते हैं। यह न केवल चिंता और तनाव को कम करता है बल्कि पुरुष को एक्टिव भी रखता है।

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कैसे बनता है ऑक्सीटोसिन हार्मोन ( oxytocin release causes)

हमारे शरीर में जब पीयूष ग्रंथि में ऑक्सीटॉसिन प्रीकर्सर प्रोटीन के बारीक कण संग्रहित हो जाते हैं जो उत्तेजना मिलने पर यह खून में रिलीज हो जाते हैं। यह उत्तेजना निम्न कारण से मिल सकती है-

1- स्तनपान के दौरान

2- किसी व्यक्ति से गले मिलने के दौरान

3- रोमांटिक माहौल के दौरान

4- किसी के साथ किस करने के दौरान

5- सेक्स या प्यार करने के दौरान

6- सामाजिक सकारात्मकता के दौरान

बता दें कि पीयूष ग्रंथि जब ऑक्सीटॉसिन को रिलीज करता है तो सकारात्मक प्रतिक्रिया तंत्र एक्टिव हो जाता है और यह निरंतर हार्मोन के स्राव को बनाए रखता है। उदाहरण की बात करें तो जब मां अपने बच्चे को स्तनपान कराती है तो निप्पल के स्पर्श से तंत्रिकाओं को उत्तेजना मिलती है और पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटॉसिन रिलीज हो जाता है। जैसे जैसे बच्चा फीडिंग करता है वैसे वैसे शरीर में ऑक्सीटॉसिन का स्तर बढ़ने लगता है और जब बच्चे का पेट भर जाता है और बच्चा पेट में बंद कर देता है तो ऑक्सीटोसिन रिलीज होना भी बंद हो जाता है।

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ऑक्सीटॉसिन का उपयोग (oxytocin uses)

बता दें कि ऑक्सीटोसिन का प्रयोग एनलॉगस या सिंथेटिक दवाओं को बनाने में किया जाता है । इसके अलावा ऑक्सीटोसिन हार्मोन को नसों में इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन, इंटरनल स्प्रे और इंट्रावेनस के जरिए दिया जाता है। इसके अलावा यह मसूड़ों में पेच के माध्यम से भी डाला जाता है। जानते हैं इसके अन्य उपयोग-

1- बता दें कि गर्भावस्था के डॉक्टर गर्भाश्य की सफाई करते हैं। लेकिन कभी-कभी किसी कारणवश गर्भाश्य में कुछ अवशेष रह जाते हैं, जिसके कारण बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यह व्यक्तिगत गंभीर संक्रमण में बदल जाते हैं। ऐसे में पूरी सफाई के लिए ऑक्सीटोसिन बेहद उपयोगी है। गर्भावस्था के संकुचन को बढ़ाकर यह उसकी सफाई करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।

2- कई बार महिलाओं को ब्रेस्ट इंगोर्जमेंट की समस्या हो जाती है। यह वह समस्या होती है जब इस स्तन से दूध अच्छे से बाहर नहीं आ पाता और नलिका में जमकर दर्द सूजन पैदा कर देता है। इस दर्द और सूजन को कम करना बेहद जरूरी होता है क्योंकि इससे न केवल महिलाओं को परेशानी होती है बल्कि ये समस्या नवजात शिशु की सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकती है। इसे दूर करने के लिए इंट्रानेजल ऑक्सीटॉसिन दिया जाता है। बता दें कि ये ऑक्सीटोसिन नाक के माध्यम से दिया जाता है जो ब्रेस्ट से दूध निकालने में बेहद मदद करता है। 

3- महिलाओं को प्रसव के बाद ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे कि रक्त स्राव को नियंत्रित किया जा सके। ऐसा करने से न केवल बच्चे की डिलीवरी के बाद गर्भाशय का तनाव कम होता है बल्कि परिस्थिति को नियंत्रित करने में यह बेहद मददगार है।

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ऑक्सीटॉसिन के नुकसान (oxytocin Side Effects)

वैसे तो ऑक्सीटॉसिन सेहते के लिए बहुत अच्छा है। लेकिन अगर इसका डोज ज्यादा मात्रा में लिया जाए तो ऑक्सीटॉसिन के निम्न दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं। जानते हैं इनके बारे में-

1- गर्भाशय के दौरान गर्भाश्य के संकुचन की तीव्रता अनियंत्रित हो जाती है तो उसके फटने की संभावना बढ़ जाती है।

2- ऑक्सीटॉसिन जब लेबर के दौरान दिया जाता है तो इसका दुष्परिणाम नवजात में पीलिया के रूप में देखा जा सकता है। ऐसे में डॉक्टर इसका कम मात्रा में उपयोग करते हैं।

3- कुछ रोगियों को ऑक्सीटॉसिन के कारण मतली या उल्टी की समस्या पैदा हो जाती है। जी मचलाना इसके साइडइफेक्ट्स के लक्षणों में से एक है।

4- सिर दर्द, दिल की धड़कन का तेज या मंद होना आदि के कारण हृदय संबंधित समस्याएं ऑक्सीटॉसिन के कारण नजर आते हैं।

नोट- बता दें कि ऑक्सीटॉसिन सामाजिक संबंधों को बनाने की क्षमता को बढ़ाता है। उदहारण की बात करें तो माता-पिता और बच्चे के बीच गहरा संबंध इसी हॉर्मोन के माध्यम से होता है। इसके अलावा जो लोग ज्यादा तनाव में या चिंता में रहते हैं उन्हें बता दें कि ऑक्सीटॉसिन इस समस्या को दूर करने में भी बेहद मददगार है। ऑटिज्म जो कि एक स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर है, इस विकार के लिए ऑक्सीटॉसिन बेहद प्रभावी है। जिन लोगों को अल्कोहल या ड्रग्स की लत होती है वे ऑक्सीटॉसिन की मदद से अपनी इस लत से छुटकारा पा सकते हैं। डिप्रेशन की समस्या को दूर करने में भी ऑक्सीटॉसिन बेहद सहायक है। ऑक्सीटॉसिन रोमांटिक जोड़ों के बीच संबंध बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन हॉर्मोन के माध्यम से संबंधों को गहरा किया जा सकता है। जिन लोगों में  ऑक्सीटॉसिन  हॉर्मोन की कमी हो जाते हैं उनमें डोज के माध्यम से इस कमी को पूरा किया जाता है। 

ये लेख डॉ पारुल सिंघल, स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रसूति विशेषज्ञ - एलिक्सर हेल्थकेयर से बातचीत पर आधारित हैं। 

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