Subscribe to Onlymyhealth Newsletter
  • I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.

क्या है सर्विक्स कैंसर

सभी By अन्‍य , सखी / May 20, 2011
क्या है सर्विक्स कैंसर

कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन इस बीमारी के बारे में संपूर्ण जानकारी इ‍‍कट्ठी कर इससे बचा जा सकता है।

क्या है सर्विक्स कैंसरकैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं। वैसे तो, कैंसर किसी को भी हो सकता है। पर कुछ खास तरह के कैंसर जो, सिर्फ स्ति्रयों को ही होते हैं, उनमें से एक है  गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर। गर्भाश्य ग्रीवा के कैंसर को सर्विक्स कैंसर भी कहा जाता है।

यह कैंसर होता कैसे है यह जानने के लिए स्त्री के शरीर की आंतरिक संरचना को समझना बहुत जरूरी है। वैजाइना के आगे गर्भाशय का मुख स्थित होता है। इसे ही गर्भाशय ग्रीवा अर्थात सर्विक्स कहा जाता है। गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर कोशिकाओं के बनने से ही सर्विक्स कैंसर होता है। सर्विक्स के क्षेत्र में कोई संक्रमण हो या कैंसर कोशिकाएं बनने लगें तो स्त्री की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। हो सकता है, स्त्री कभी भी गर्भधारण न कर पाए। यही नहीं, सर्विक्स के क्षेत्र में कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित न किया जाए तो कैंसर कोशिकाएं धीरे-धीरे गर्भाशय के क्षेत्र में भी बड़ी आसानी से फैल जाती हैं और स्त्री की मौत भी हो सकती है।

 

बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों और उपयुक्त चिकित्सा के बारे में समुचित ज्ञान न हो तो स्त्री को मातृत्व सुख से वंचित होना पड़ सकता है। स्ति्रयों में स्तन और गर्भाशय कैंसर के बाद सर्विक्स कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। सर्विक्स कैंसर की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि औरतों को होने वाले कैंसर में करीब 40 प्रतिशत सर्विक्स कैंसर के मामले होते हैं।
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि कैंसर क्या है? हमारे शरीर में पुरानी कोशिकाओं के टूटने और नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है। स्वास्थ्य सामान्य हो तो पुरानी कोशिकाओं के टूटने और नयी कोशिकाओं के निर्माण में संतुलन बना रहता है। लेकिन यहीं किसी कारणवश यदि नई कोशिकाओं के बनने की तुलना में पुरानी कोशिकाओं के नष्ट होने की दर कम हो या फिर कोशिकाओं के विभाजन का दर अनियंत्रित हो तो ये कोशिकाएं आगे चलकर कैंसरकारी बन सकती हैं।

 

पुरानी कोशिकाओं के नष्ट होने की तुलना में अधिक ऊतकों के निर्माण और उनके एक जगह इकट्ठे होने से गांठ बन जाती है। यदि इलाज नहीं किया जाए तो आगे चलकर यही गांठ टयूमर का रूप ले लेती है।

 

कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन के परिणामस्वरूप दो प्रकार की गांठें बनती हैं- बिनाइन जो कैंसरकारी नहीं होतीं और मैलिगनेंट जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेती हैं। यदि मैलिगनेंट गांठें सर्विक्स के क्षेत्र में हों तो स्त्री को  सर्विक्स कैंसर हो जाता है।

 

प्रमुख लक्षण 

दिल्ली स्थित धर्मशिला कैंसर अस्पताल में स्त्री रोग कैंसर विशेषज्ञा डॉ. कणिका गुप्ता सर्विक्स कैंसर की शुरुआत में प्रकट होने वाले लक्षणों के बारे में कहती हैं, 'दो मासिक चक्रों के बीच में रक्तस्त्राव होना, वैजाइना से सफेद स्त्राव होना, वैजाइना की सफाई के  समय खून आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द होना आमतौर पर सर्विक्स कैंसर के लक्षण होते हैं।यदि किसी स्त्री को ऐसा हो तो तत्काल किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञा को दिखाना चाहिए। इतना ही नहीं, यदि स्त्री को सहवास के दौरान खून आए तो यह भी सर्विक्स कैंसर का संकेत हो सकता है।'


क्या है सर्विक्स कैंसर की वजह 

सर्विक्स कैंसर के कारणों को समझना बेहद जरूरी है।

 

  • आवश्यक साफ-सफाई नहीं बरतने से इस कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है।
  • चूंकि स्त्री के प्रजनन तंत्र की संरचना बहुत जटिल और सूक्ष्म होती है। अत: यदि स्ति्रयां अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता में जरा भी लापरवाही करें तो पुरुषों की अपेक्षा उनमें संक्रमण जल्दी हो जाता है।
  • डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास सर्विक्स कैंसर के सभी मामलों में ज्यादातर स्ति्रयां निर्धन और अशिक्षित वर्ग से ही होती हैं।
  • सर्विक्स कैंसर के साथ सबसे खतरनाक बात तो यह है कि इसके अधिकांश मामलों में कैंसर अंतिम अवस्था में पहुंच चुका होता है। जहां स्त्री का इलाज और उसकी जान बचा पाना चिकित्सक के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है।

 

अध्ययन में पाया गया है कि कुछ स्त्रियों में जल्दी ही कैंसरकारी कोशिकाएं पनपने लगती हैं और ऐसी औरतों को कैंसर होने का खतरा दूसरी औरतों की अपेक्षा कई गुणा बढ़ जाता है। 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह, अधिक बच्चे होना, धूम्रपान करना और बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी सर्विक्स कैंसर का कारण बन सकता है। यही नहीं, यौन संक्रामक रोग और खास तरह का एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) भी मूलत: सर्विक्स के आसपास के क्षेत्र की कोशिकाओं के अनियंत्रित गुणात्मक विखंडन की प्रक्रिया को उकसाता है। यह वायरस जांघों में मस्से बनाने में भी सक्रियभूमिका निभाता है। यह वायरस बहुत खतरनाक प्रवृत्ति वाला होता है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस किसी पुरुष के शरीर में तो सुप्तावस्था में पड़ा रहता है लेकिन ऐसे पुरुष से संबंध बनाने वाली स्त्री के शरीर में यह वायरस सर्विक्स कैंसर का कारण बनता है।

 

भारत में अपने शरीर-रचना के प्रति अज्ञानता के कारण ही कई स्त्रियां अनजाने में ही ऐसे रोगों की गिरफ्त में आ जाती हैं। सर्विक्स कैंसर को शुरुआती अवस्था में ही रोका जा सकता है। ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई एक भी आपको नजर आए तो शीघ्र ही स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।  कैसे की जाती है जांच

 

इस बीमारी का पता लगाने के लिए स्त्री को पेट का अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, छाती का एक्सरे, ब्लड प्रोफाइल की जांच कराने की आवश्यकता होती है। इस जांच से हीमोग्लोबिन से लेकर रक्त में श्वेत और लाल रक्त कणों की मौजूदगी आदि बातों का पता लगाया जाता है। लेकिन सर्विक्स कैंसर का पता लगाने वाली सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक जांच है- पेप्सस्मीयर टेस्ट।

 

पेप्सस्मीयर टेस्ट 

 

पेप्सस्मीयर टेस्ट के तहत महिला के योनि से निकलने वाले द्रव को चम्मचनुमा किसी चीज की सहायता से खुरच कर निकाल लिया जाता है। इस द्रव को कांच की परखनली में इकट्ठा करके सूक्ष्मदर्शी से इसकी जांच की जाती है। इस जांच से यह जानकारी मिल जाती है कि योनि से निकाले गए द्रव की कोशिकाएं खतरनाक प्रकृति की हैं या नहीं। पेप्सस्मीयर के परिणामों को तीन भागों में बांटा जाता है-

  • निगेटिव: इसके अंतर्गत माना जाता है कि पेप्सस्मीयर टेस्ट में कैंसरकारी कोशिकाएं नहीं पाई गई हैं। फिर भी हर विवाहित स्त्री को प्रत्येक तीन साल के अंतराल में पेप्सस्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए। जिन औरतों की उम्र 65 वर्ष के आसपास हो और पेप्सस्मीयर की रिपोर्ट लगातार निगेटिव आती रही हो तो उन्हें आगे यह जांच कराने की कोई जरूरत नहीं होती। 
  • अनिश्चय: इसके अंतर्गत पेप्सस्मीयर टेस्ट में इस बात के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, जिससे पता चले कि योनि से निकलने वाले द्रव में कैंसरकारी कोशिकाएं हैं ही। इसलिए अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले फिर से यही जांच किए जाने की आवश्यकता है। संभव है, कि स्लाइड से प्राप्त कोशिकाओं में अत्यंत कम मात्रा में कोई दोष पाया गया हो, जो योनि में किन्हीं अन्य कारणों से हुई सूजन और संक्रमण आदि कारणों से भी हो सकता है। परंतु, इस स्थिति में इलाज और हर तीसरे और छठे महीने पेप्सस्मीयर टेस्ट कराते रहना जरूरी है ताकि पेप्सस्मीयर टेस्ट में थोड़ा भी पॉजिटिव संकेत मिलते ही उचित इलाज आरंभ किया जा सके। पेप्सस्मीयर टेस्ट रिपोर्ट में अनिश्चय की स्थिति में यदि डॉक्टर को जरा भी संदेह होता है तो वैजाइना से प्राप्त द्रव की बायोप्सी करना जरूरी होता है। यहां यदि डिस्प्लेजिया या पहले चरण का कैंसर पाया गया तो माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। 
  • पॉजिटिव: इसका अर्थ है कि पेप्सस्मीयर जांच में गंभीर कोशिका दोष है और सर्विक्स कैंसर के संकेत मिले हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में बायोप्सी अति आवश्यक है। 

 

बीमारी के प्रमुख चरण 

सर्विक्स कैंसर की स्थिति में इलाज को भी कैंसरकारी कोशिकाओं की उग्रता को देखते हुए चार चरणों में बांटा जाता है-

  • स्टेज वन:इसका अर्थ है कि कैंसर सिर्फ श्रोणि प्रदेश तक ही सीमित है और सर्जरी द्वारा गर्भाश्य को निकाल देने से भविष्य में कैंसर होने की संभावना को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाता है। लेकिन इसके बाद स्त्री गर्भधारण नहीं कर पाती। यदि डॉक्टर को स्थिति थोड़ी भी गंभीर नजर आती है तो सर्जरी द्वारा गर्भाशय निकाल दिए जाने के बाद भी रेडियोथेरेपी द्वारा कैंसर कोशिकाओं को जला दिया जाता है।
  • स्टेज टू ए और स्टेज टू बी:इस स्थिति में पहुंचने का अर्थ है कि कैंसर कोशिकाएं वैजाइना के आसपास के हिस्सों में भी फैल गई हैं। कैंसर कोशिकाओं ने आसपास के अंगों को कितना अधिक जकड़ लिया है, इसी आधार पर सर्विक्स कैंसर के लक्षणों को स्टेज टू ए और टू बी दो भागों में बांटा जाता है। साथ ही यह भी तय किया जाता है कि मरीज को सिर्फ कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या दोनों की जरूरत है।
  • स्टेज थ्री:इस अवस्था में कैंसर कोशिकाएं पेल्विक वाल तक पहुंच जाती हैं। 
  • स्टेज फोर:इस अवस्था में कैंसर कोशिकाएं ब्लैडर और रेक्टम को भी अपने चंगुल में ले लेती हैं। यह गंभीरतम स्थिति होती है। स्टेज थ्री और स्टेज फोर में रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी साथ-साथ दी जाती है। इन दोनों ही अवस्थाओं में सर्जरी नहीं की जा सकती। इन दोनों ही अवस्थाओं में कैंसर कोशिकाएं अंदर-अंदर इतनी दूर तक फैल चुकी होती हैं कि ऑपरेशन की कोई अहमियत नहीं रह जाती। सर्विक्स कैंसर स्त्री के शरीर को पूरी तरह भीतर-भीतर खोखला बना देता है। यदि सही समय पर सही इलाज शुरू हो गया और अगले पांच वर्षो में उस स्त्री में दोबारा कैंसर के लक्षण प्रकट नहीं हुए तो स्टेज वन कैंसर के 80-90 प्रतिशत मामलों में माना जाता है कि स्त्री पूरी तरह ठीक हो गई है। लेकिन एक बार सर्विक्स कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद भी प्रत्येक तीन माह पर आवश्यकतानुसार स्त्री को एक-दो वर्षो तक फॉलोअप के लिए बुलाया जाता है और इस दौरान पेप्सस्मीयर जांच में यह देखा जाता है कि कोशिकाएं सामान्य हैं या नहीं। 

 

स्टेज टू सर्विक्स कैंसर का सफल इलाज करा चुकी करीब 65-75 प्रतिशत स्ति्रयों में यदि पांच वर्षो तक कैंसर के लक्षण नहीं मिले तो वह हमेशा के लिए सर्विक्स कैंसर से मुक्त मानी जाती हैं। लेकिन स्टेज थ्री और स्टेज फोर की अवस्था गंभीर मानी जाती है। स्टेज थ्री कैंसर सर्विक्स वाली 50 प्रतिशत और स्टेज फोर में पहुंचने वाली सिर्फ 20-25 प्रतिशत स्ति्रयों में ही अगले पांच वर्षो में कैंसर दोबारा प्रकट नहीं होने पर ये स्ति्रयां कैंसरमुक्त मानी जा सकती हैं।

 

यदि स्टेज वन कैंसर है और स्त्री लगभग पूरे समय की गर्भवती है तो चिकित्सक बच्चे के जन्म की अनुमति दे देते हैं लेकिन प्रसव के तुरंत बाद आवश्यक चिकित्सा अनिवार्य हो जाती है।

 

कुछ खास बातें 

 

  • जननांगों की आवश्यक स्वच्छता का ध्यान रखकर इस प्रकार के कैंसर से बचा जा सकता है। खास तौर से पीरियड के दौरान अंत:वस्त्रों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसे बदलते रहना चाहिए।
  • हमेशा अच्छी क्वालिटी के सैनिटरी नैपकिन का ही इस्तेमाल करना चाहिए। सर्विक्स कैंसर से बचने के लिए यह जरूरी है कि आपके साथ आपके पति भी अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।
  • कुछेक शोधों में यह भी बात सामने आई है कि विटामिन ए की कमी से भी सर्विक्स कैंसरं हो सकता है। इन शोधों में यह उल्लेख है कि विटामिन ए की कमी से कैंसर कोशिकाओं के गुणात्मक विखंडन की दर काफी बढ़ सकती है। इसलिए आप अपने रोजाना के भोजन में विटामिन ए युक्त खाद्य पदार्थों जैसे, गाजर, पालक, चुकंदर आदि को शामिल करें।
  • विकसित देशों में तो स्ति्रयों में पर्याप्त जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण यह कैंसर स्ति्रयों को होने वाले कैंसरों की सूची में छठे-सातवें स्थान पर चला गया है जबकि भारत की स्ति्रयां अब भी सर्विक्स कैंसर से बदहाल हैं क्योंकि भारतीय स्ति्रयों में अपने स्वास्थ्य के प्रति अपेक्षित जागरूकता का अभाव है। अत: इस गंभीर बीमारी से बचने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से अपनी नियमित जांच करती रहें।

 

Written by
अन्‍य
Source: सखीMay 20, 2011

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Trending Topics
More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK