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स्‍माल सेल लंग कैंसर के बारे में जानें

कैंसर By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 22, 2013
स्‍माल सेल लंग कैंसर के बारे में जानें

स्माल सेल, लंग कैंसर का एक प्रमुख कोशिकीय कैंसर है। लंग कैंसर को स्माल सेल कैंसर या नॉन-स्माल सेल कैंसर के रूप में बांटा जाता है। आइए जानें, लंग के स्‍माल सेल कैंसर के बारे में जानें।

स्माल सेल कैंसर, लंग के कैंसर का एक प्रमुख कोशिकीय कैंसर है। लंग कैंसर को स्माल सेल कैंसर या नॉन-स्माल सेल कैंसर के रूप में बांटा जाता है। नॉन-स्माल सेल के प्रमुख विविध प्रकारों में लंग का लार्ज सेल कैंसर और एडेनोकार्सिनोमा भी शामिल हैं।

स्माल सेल और नॉन-स्माल सेल कैंसर के बीच फर्क होना जरूरी होता है। इसे पूर्वानुमान, स्टेजिंग और उपचार के द्वारा मौजूद कैंसर के प्रकार के अनुसार बड़े भागों में स्पष्‍ट किया जाता है। जहां अधिकांश स्‍माल सेल कैंसर फेफड़ों में उत्पन्न होते हैं, वहीं नॉन-स्‍माल सेल फेफड़ों से अलग दूसरे अंगों में भी उत्पन्न‍ हो सकते हैं। इसमें ब्‍लैडर, प्रोस्टेट और कभी-कभी अन्य अंगों के स्माल सेल कैंसर शामिल हैं। दुर्भाग्य से फेफड़ों और दूसरे अंगों में उत्पन्न होने वाले स्माल सेल कैंसर बहुत तेजी से बढ़ते हैं और इनका पूर्व निदान काफी कठिन होता है।

small cell lung cancer in hindi

स्‍माल सेल लंग कैंसर

  • स्माल सेल कैंसर शायद ही कभी एक क्षेत्र तक सीमित रहते हैं चाहे इनका शुरूआती विकास तेजी से न हो रहा हो।
  • अधिकतर मामलों में फेफड़ों के स्माल सेल कैंसर निदान के समय पर पूरे शरीर में फैल या स्थानांतरित हो चुके होते हैं। चाहे कैंसर की सीमा का आकलन करने वाले स्टेजिंग अध्ययन सामान्य या नेगेटिव हों।
  • आमतौर पर स्माल सेल लंग कैंसर का पहली बार पता चलने पर यह काफी हद तक फैल चुके होते हैं और इन्हें लंग के ऑपरेशन से हटाने मात्र से ठीक नहीं किया जा सकता। यही मुख्य कारण है कि स्माल सेल लंग कैंसर वाले मरीजों में निदान के बाद फेफड़ों को हटाने वाली सर्जरी नहीं की जाती। बल्कि उन्‍हें कीमोथेरेपी या रेडिएशन या इन दोनों से उपचारित किया जाता है और सर्जरी नहीं की जाती।
  • स्माल सेल लंग कैंसर को ओट सेल कैंसर भी कहते हैं क्योंकि इससे प्रभावित कोशिकाएं सूक्ष्मदर्शी से देखे जाने पर ओट्स की तरह व्यवस्थित प्रतीत होती हैं। यह कैंसर आमतौर से फेफड़ों के बड़े केन्द्र य वायुस्थल (ब्रोंकी) में उत्पन्न होते हैं। यहां फेफड़ों के कुल कैंसर का लगभग 20 प्रतिशत तक होता है। कुछ मामलों में स्माल सेल ट्यूमर्स में वे कोशिकाएं भी शामिल होती हैं जिनमें नॉन-स्माल सेल विशेषताएं होती हैं।
  • सभी प्रकार के फेफड़ों के कैंसर का धूम्रपान से मजबूत सम्बन्ध होता है। स्माल सेल लंग कैंसर से पीड़ित लगभग 90 प्रतिशत लोग वर्तमान में या पहले कभी धूम्रपान करने वाले लोग होते हैं। स्माल सेल कैंसर में विभिन्न कैमिकल पदार्थों और हार्मोन्स को रिसाने की क्षमता होती है जिनका असर वास्तविक कैंसर से अलग पड़ता है।
  • कई बार फेफड़ों के स्माल सेल कैंसर होने की संभावना का पता किसी हार्मोन के अधिक बनने से संबंधित लक्षण पाए जाने से चलता है। उदाहरण के लिए स्माल सेल ट्यूमर सेल्स एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोपिक हार्मोन का रिसाव करा सकते हैं जो कुशिंग्सस डिज़ीज का कारण बनता है जिसमें चेहरे पर सूजन, वजन बढ़ना, गर्दन के निचले हिस्से में उभार या ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने जैसे लक्षण दिखते हैं। ट्यूमर, एंटीडियूरेटिक हार्मोन भी रिसा सकते हैं, जिससे पानी रुकता है और सोडियम घटता है, जिससे कन्फ्यूज़न उत्‍पन्न होता है। स्माल सेल कैंसर एंटीबॉडीज़ भी उत्पन्न कर सकते हैं जिनसे विशेष प्रकार की कमजोरी आ जाती है।
  • शोध के अनुसार, देश में कार्पोरेट संस्कृति के प्रसार की वजह से जो बहुत सारी परेशानियां उठ खड़ी हैं, उनमें सबसे प्रमुख है तेजी से फैलता हुआ लंग कैंसर। इसकी एक बहुत बड़ी वजह है अनियमित दिनचर्या, तनाव और तनाव से मुक्ति पाने के प्रयास में धूम्रपान का सहारा।

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Image Source : Getty

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