कंधों का असहनीय दर्द हो सकता है Spondylitis का संकेत, एक्सपर्ट से जानें स्पॉन्डिलाइटिस के 8 प्रकार और लक्षण

Updated at: Dec 02, 2020
कंधों का असहनीय दर्द हो सकता है Spondylitis का संकेत, एक्सपर्ट से जानें स्पॉन्डिलाइटिस के 8 प्रकार और लक्षण

स्पॉन्डिलाइटिस के अलग-अलग प्रकारों को जानने और इसके लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है। साथ इसके बचाव का उपाय भी जानें।

Pallavi Kumari
अन्य़ बीमारियांWritten by: Pallavi KumariPublished at: Dec 02, 2020

स्पॉन्डिलाइटिस में क्या तकलीफ होती है? इस प्रश्न को पूछने वालों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही है। दरअसल,  स्पॉन्डिलाइटिस (Spondylitis) गठिया का ही एक प्रकार है, जिसमें परेशानी व्यक्ति के रीढ़ की हड्डी से शुरू होती है और शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच जाती है।  आज कल की बिगड़ती हुई लाइफस्टाइल और वर्क प्रेशर के कारण युवाओं में भी ये परेशानी तेजी से बढ़ रही है। स्पॉन्डिलाइटिस में आमतौर पर सबसे ज्यादा सूजन वर्टिब्रे (रीढ़ की हड्डी) में होती है और फिर ये कुल्हों, कंधों, गले के पिछले हिस्से से लेकर पेल्विक एरिया तक में दर्द का कारण बनती है। स्पॉन्डिलाइटिस के कई प्रकार होते हैं और इनके अलग-अलग लक्षण होते हैं, जिसे लेकर हमने  हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण पाण्डेय (Dr.Arun Pandey) से बात की।

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स्पॉन्डिलाइटिस का कारण  (What causes spondylitis)?

डॉ.अरुण पाण्डेय बताते हैं कि स्पॉन्डिलाइटिस का कोई विशेष कारण नहीं है, पर कुछ जीन्स और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियां इसे ट्रिगर करती हैं। अगर बात आनुवांशिकी की करें, तो कुछ शोध बताते हैं कि  स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित ज्यादातर मरीजों में  HLA-B27 नाम का एक जीन पाया जाता है, जिसे इसके एक बड़े कारण के रूप में देखा जाता रहा है। पर ये मेडिकल रीजन है। इसके अलावा जीवनशैली से जुड़े भी कुछ ऐसे कारक भी हैं, जो इसे परेशानी को पैदा कर सकते हैं। जैसे कि

  • - शरीर का पॉश्चर ठीक नहीं होने से रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट बिगड़ जाना
  • -स्ट्रेस इंजरी
  • -जोड़ों और टिशूज का सूजन
  • -एक्सरसाइज न करना
  • -खराब डाइट
  • -मोटापा
  • -धूम्रपान करना

स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकार और इनके लक्षण  (Spondylitis Symptoms)

1.एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (एएस)

एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे प्रारंभिक प्रकार है। इसमें सबसे ज्यादा लोग स्पाइन में दर्द की शिकायत करते हैं। ये आम तौर पर 45 साल की उम्र से पहले ही लोगों को शुरू हो जाती है। इसमें लोगों को बहुत तेज पीठ दर्द होता है और धीमे-धीमे बढ़ने लगता है।  इसके मुख्य लक्षणों को देखें, तो इसमें लोगों के

  • -कमर में दर्द रहती है
  • -अकड़न रहती है
  • -सूजन आ जाता है
  • -कुल्हों के ज्वाइंट्स में तेज दर्द की शिकायत रहती है।

समय के साथ, इस सूजन से एंकिलोसिस (ankylosis)हो सकता है यानी कि रीढ़ में नई हड्डी का निर्माण हो सकता है। इस तरह से एएस शरीर के अन्य क्षेत्रों जैसे कंधे, कूल्हों, पसलियों, एड़ी और अन्य जोड़ों में सूजन, दर्द और कठोरता का कारण बन सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस (एएस) के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत भिन्न हो सकते हैं। पर आमतौर पर ये किशोरावस्था या प्रारंभिक वयस्कता (उम्र 17 से 45) में दिखाई देने लगते हैं और उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है।

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एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस जीवन शैली और घरेलू उपचार

  • -हर दिन व्यायाम करने का समय बनाएं और उस समय में रोज व्यायाम करें। 
  • -एक स्वस्थ वजन रखें ताकि आपके जोड़ों को ज्यादा तनाव न हो।
  • - ओमेगा -3 फैटी एसिड में उच्च आहार इसमें आपकी मदद कर सकता है। 
  • -मालिश, योग और ध्यान जैसी चीजों के साथ तनाव का प्रबंधन करें।
  • - सूजन वाले क्षेत्रों पर सिकाई करें।

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2.जुवेनाइल स्पॉन्डिलाइटिस  (Juvenile Spondylitis)

.जुवेनाइल स्पॉन्डिलाइटिस  (Juvenile Spondyloarthritis) के नाम से भी जाना जाता है। ये आमतौर पर छोटे बच्चों और टीनएजर में होता है खास कर 16 साल के कम उम्र के बच्चों में। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। ऐसे बच्चों में तमाम तरह के लक्षण नजर आते हैं। जैसे कि

  • -बच्चे के किसी एक पैर में दर्द होता है और किसी एक पैर में दर्द नहीं होता है।
  • -ज्वाइंट्स और स्पाइन में सूजन और दर्द।

3. एंटरोपैथिक स्पॉन्डिलाइटिस  (Enteropathic Spondylitis)

एंटरोपैथिक में पेट से जुड़ी परेशानियां रहती हैं। जैसे बाउल सिंड्रोम और पेट में दर्द आदि। इस तरह के स्पॉन्डिलाइटिस की विशेषता आंतों में दर्द और सूजन है। जिसके कारण व्यक्ति को बार-बार डायरिया होता है और उसा वजन भी कम रहता है।

4. सोराइटिस स्पॉन्डिलाइटिस  (Psoriatic Spondylitis)

इस तरह के स्पॉन्डिलाइटिस से पीठ में दर्द और अकड़न होती है। यह त्वचा के रोग से भी जुड़ा हुआ है। सोरियाटिक गठिया ज्यादातर छोटे जोड़ों में दर्द और सूजन का कारण बनता है, जैसे पैर-हाथ की उंगलियों में। इसके लक्षणों में शामिल है

  • -हाथ, उंगलियों और पैरों में दर्द और सूजन
  • -त्वचा पर लाल चकत्ते (सोरायसिस का होना)

5.रिएक्टिव स्पॉन्डिलाइटिस  (Reactive Spondylitis)

रिएक्टिव अर्थराइटिस एक प्रकार का स्पॉन्डिलाइटिस है जो, आमतौर पर एक इंफेक्शन के बाद होता है। यह एक यौन संचारित संक्रमण के कारण हो सकता है, जैसे कि क्लैमाइडिया या साल्मोनेला आदि। इसमें व्यक्ति जोड़ों का दर्द और सूजन के साथ आंखों में सूजन और मूत्राशय और जननांग दर्द महसूस करता है।

6. अडिफरेंसिएडेट  स्पॉन्डिलाइटिस  (Undifferentiated spondylitis)

अडिफरेंसिएडेट में कारणों का पता नहीं चल पाता है। इसमें पीठ दर्द , एड़ी दर्द, थकान, आंखों में दर्द और आंखों की सूजन आदि होती है।

7. एक्जियल स्पोंडिलाइटिस (Axial spondylitis)

ये स्पोंडिलाइटिस के प्रकार हैं पीठ, कमर और कूल्हे के क्षेत्र में सबसे ज्यादा दर्द होता है, जिसे आप एक्स-रे या स्कैन करके पता लगा सकते हैं।

8.पेरीफेरल स्पॉन्डिलाइटिस (Peripheral spondylitis)

इसमें व्यक्ति में तमाम करह के स्पोंडिलाइटिस के लक्षण नजर आते हैं। पर खास तौर पर स्पोंडिलाइटिस के इस प्रकार में लोगों को घुटने, एड़ियों, पैर का पंजा, हाथ, कलाई, कोहनी और कंधों में बहुत दर्द होता है।

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स्पोंडिलाइटिस से बचाव के लिए क्या करें

स्पोंडिलाइटिस से बचाव सबसे अच्छा तरीका ये है कि जीवनशैली में बदलाव लाएं।

  • - पोषक भोजन खाएं, विशेषकर ऐसा भोजन जो कैल्शियम विटामिन सी और विटामिन डी से भरपूर हो।
  • -चाय और कैफीन का सेवन कम करें, क्योंकि इनसे कैल्शियम का अवशोषण प्रभावित होता है।
  • -शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। इससे बोन मास बढ़ता है।
  • -सख्त बिस्तर पर बिलकुल भी न सोएं और आरामदायक गद्दे का इस्तेमाल करें।
  • - गर्दन के नीचे बड़ा तकिया न रखें।
  • -जिन्हें स्पॉन्डिलाइटिस है, वे धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें।
  • -ऐसे टेबल और कुर्सी का प्रयोग करें, जिन पर आपको झुक कर न बैठना पड़े।
  • -हमेशा कमर सीधी करके और आई लेवल को सही रख कर काम करें। 

डॉ. अरुण बताते हैं कि गंभीर होने पर स्पोंडिलाइटिस का ट्रीटमेंट किया जाता है, जिसमें  व्यक्ति का फिजिकल और क्लीनिकल टेस्ट किए जाते हैं। एक्स-रे और एमआरआई की जाती है, जिसमें HLA-B27 नाम का खास टेस्ट किया जाता है और बीमारी की गंभीरता का पता लगाकार इसका इलाज किया जाता है।

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