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आटिज्‍म क्‍या है और इसके कारणों को जानें

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 15, 2013
आटिज्‍म क्‍या है और इसके कारणों को जानें

जन्म के समय बच्चों में ऑटिज्म के लक्षणों को पहचान पाना मुश्किल हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ ही बच्चों में ऑटिज्म की पहचान की जा सकती है। 

जन्म के समय बच्चे में ऑटिज्म स्पेकट्रम डिसआर्डर का पता लगा पाना मुश्किल होता है। एक साल की उम्र से पहले बच्चों में इसके लक्षणों को पहचान पाना काफी मुश्किल हो जाता है। जब तक बच्चा दो से तीन साल तक का नहीं हो जाता तब तक माता-पिता बच्चों में ऑटिज्म के लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं।

causes of autismऑटिज्म से ग्रसत बच्चे छूने पर असामान्य बर्ताव करते हैं। जब उन्हें उठाया जाता है तो वे लिपटने के जगह लचीले पड़ जाते हैं या तन जाते हैं। जीवन के पहले साल में वे सामान्य ढंग से विकसित नही हो पाते जैसे मां की आवाज पर मुस्कुराना ,दूसरो का ध्यान खिंचने के लिए किसी वस्तु की तरफ इशारा करना, एक शब्द से बातचीत करना। बच्चा आंख से आंख नही मिला पाता है, माता-पिता को अजनबियों से अलग नहीं पहचान पाता है और दूसरों में काफी कम रूचि लेता है। इस तरह का व्यवहार काफी असमान्यताओं की ओर इशारा करता है।


क्या है ऑटिज्म

ऑटिज्म एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर है, जो बातचीत (लिखित और मौखिक) और दूसरे लोगों से व्यवहार करने की क्षमता को सीमित कर देता है। इसे ऑटिस्टिक स्पैक्ट्रम डिस्ऑर्डर कहा जाता है, क्योंकि प्रत्येक बच्चे में इसके लक्षण अलग-अलग देखने को मिलते हैं। ऐसे कुछ बच्चे बहुत जीनियस होते हैं या उनका आईक्यू सामान्य बच्चों की तरह होता है, पर उन्हें बोलने और सामाजिक व्यवहार में परेशानी होती है। कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सीखने-समझने में परेशानी होती है और वे एक ही तरह का व्यवहार बार-बार करते हैं। चूंकि ऑटिस्टिक बच्चों में समानुभूति का अभाव होता है, इसलिए वे दूसरों तक अपनी भावनाएं नहीं पहुंचा पाते या उनके हाव-भाव व संकेतों को समझ नहीं पाते। कुछ बच्चे एक ही तरह का व्यवहार बार-बार करने के कारण थोड़े से बदलाव से ही हाइपर हो जाते हैं।


क्या है इसका कारण

ऑटिज्म के वास्तविक कारण के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं है। पर्यावरण या जेनेटिक प्रभाव, कोई भी इसका कारण हो सकता है। वैज्ञानिक इस संबंध में जन्म से पहले पर्यावरण में मौजूद रसायनों और किसी संक्रमण के प्रभाव में आने के प्रभावों का भी अध्ययन कर रहे हैं। शोधों के अनुसार बच्चे के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी चीज ऑटिज्म का कारण बन सकती है। कुछ शोध प्रेग्नेंसी के दौरान मां में थायरॉएड हॉरमोन की कमी को भी कारण मानते हैं। इसके अतिरिक्त समय से पहले डिलीवरी होना। डिलीवरी के दौरान बच्चे को पूरी तरह से आक्सीजन न मिल पाना। गर्भावस्था में किसी बीमारी व पोषक तत्वों की कमी प्रमुख कारण है।


बच्चे के जन्म के छह माह से एक वर्ष के भीतर ही इस बीमारी का पता लग जाता है कि बच्चा सामान्य व्यवहार कर रहा है या नहीं। शुरुआती दौर में अभिभावकों को बच्चे के कुछ लक्षणों पर गौर करना चाहिए। जैसे बच्चा छह महीने का हो जाने पर भी किलकारी भर रहा है या नहीं। एक वर्ष के बीच मुस्कुरा रहा है या नहीं या किसी बात पर विपरीत प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं। ऐसा कोई भी लक्षण नजर आने पर अभिभावक को तुरंत किसी अच्छे मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

 

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