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ज्यादा देर तक डायपर पहनना सही नहीं, बिगड़ सकता है बच्चों का हॉर्मोनल संतुलन

नवजात की देखभाल By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 11, 2018
ज्यादा देर तक डायपर पहनना सही नहीं, बिगड़ सकता है बच्चों का हॉर्मोनल संतुलन

घर के सूती कपड़ों से बने बेबी नैपकिंस की जगह बाजार के डायपर का प्रयोग आज हमारे देश में आम है। बाजार के लीक प्रूफ डायपर वाकई बहुत मददगार भी हैं खासतौर पर जब आप घर से बाहर हों। 

घर के सूती कपड़ों से बने बेबी नैपकिंस की जगह बाजार के डायपर का प्रयोग आज हमारे देश में आम है। बाजार के लीक प्रूफ डायपर वाकई बहुत मददगार भी हैं खासतौर पर जब आप घर से बाहर हों। लेकिन आज कई कारणों से नवजात बच्चों के साथ भी कई लोग दिनभर और पूरी रात भी डायपर का प्रयोग करने लगे हैं। क्या हो सकते हैं इसके साइड इफेक्ट्स और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान, आइए जानते हैं।

लीकप्रूफ और मानसिकता

आमतौर पर डायपर का मतलब लोग ऐसे साधन से लगाते हैं जिससे बच्चे की प्राकृतिक क्रियाओं के दौरान होने वाली गंदगी से घर और कपड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही रात को नींद में पड़ने वाले खलल से भी बचा जा सकता है। जबकि घर के बने सूती नैपकिंस में ये सुविधा नहीं होती। छोटे बच्चे के सन्दर्भ में रात की नींद का इस तरह टूटना वाकई मां-पिता दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में ये दोनों ही सोच बुरी नहीं हैं लेकिन इस सुविधा का फायदा तब है जब डायपर का प्रयोग पूरी सावधानी और सतर्कता से किया जाए और अफसोस कि इस बारे में बहुत कम लोग सोच पाते हैं।

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सतर्कता और सावधानी

  • इसलिए जब बात डायपर के प्रयोग की आती है तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ताकि बच्चे की सेहत पर भी असर न पड़े, पर्यावरण भी सुरक्षित रहे और माता-पिता भी निश्चिंत हो सकें। इन बिंदुओं पर करें गौर-
  • यदि आप बच्चे को पूरा समय डायपर पहनाए रख रहे हैं तो हर आधे घंटे में उसे चैक करने की आदत डालें। कई बार बच्चे एक बार के गीले डायपर को भी लम्बे समय तक पहने रहते हैं और उसी को दूसरी-तीसरी बार भी गीला कर देते हैं। इस चीज को नजरअंदाज करना बच्चे के लिए इन्फेक्शन को आमंत्रित करना होता है। ध्यान न देने पर यह इन्फेक्शन जानलेवा भी हो सकते हैं।
  • प्लास्टिक की शीट के अलावा डायपर में अन्य कई टॉक्सिन्स जैसे आर्टिफिशियल कलर, खुशबू के लिए प्रयुक्त केमिकल्स, सोडियम पॉलीक्रायलेट, डाइऑक्सीन्स तथा फैथलेटस हो सकते हैं जिनकी वजह से बच्चे को अस्थमा, हॉर्मोनल असंतुलन और कैंसर तक हो सकता है। डायपर में मौजूद कृत्रिम रंग बच्चे को रैशेज की समस्या भी दे सकते हैं।
  • कुछ डायपर इथाइलबेन्जीन, टॉल्यूइन और जायलीन जैसे वोलेटाइल ऑर्गेनिक कम्पाउंड यानी वातावरण में भाप बनकर पहुंचने वाले जैविक घटक रिलीज कर सकते हैं जिनसे न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स के अलावा आंखों में परेशानी और इम्यूनिटी के कमजोर पड़ने का खतरा हो सकता है।
  • बच्चे के लिए खतरा होने के साथ ही डायपर पर्यावरण के लिए भी गंभीर नुकसान बनकर उभरते हैं।
  • डायपर के कारण होने वाले रैशेज बच्चे की त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार इसकी वजह से नाजुक अंग को क्षति भी पहुंच सकती है।
  • हमारे देश में मौसम हमेशा बदलता रहता है। ऐसे में गर्मी या अधिक नमी के कारण लम्बे समय तक डायपर पहने रहना बच्चे के लिए कई मुसीबतों को आमंत्रण दे सकता है।
  • हाइजीन वह बिंदु है जिसके लिए डायपर हो या घरेलू नैपकिन, दोनों के ही प्रयोग के समय सतर्कता रखनी जरूरी है। पर्याप्त सफाई और हाइजीन का अभाव बच्चे के जीवन को खतरे में डाल सकता है।

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