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    इन तरीकों को आजमाने से दिमाग में नहीं आयेंगे फालतू विचार

    मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Meera Roy , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 08, 2017
    इन तरीकों को आजमाने से दिमाग में नहीं आयेंगे फालतू विचार

    अगर आप खुद  में पिछले दिनों से ओवरथिंकर जैसे लक्षणों को देखते हैं तो सतर्क हो जाएं और खुद को इन तरीकों से अतिरिक्त सोचने से रोकें।

    पूनम महज 18 साल की कालेज गोइंग लड़की है। लेकिन उसे तमाम किस्म की परेशानियों ने अपनी चपेट में ले रखा है। उसे अपने करिअर की चिंता है, उसे दूसरों को प्रतिस्पर्धा में पछाड़ने की चिंता है, उसे अपने परिवार को खुश करने की चिंता है, उसे अपने सही जीवनसाथी के चयन की चिंता है। कहने का मतलब यह है कि पूनम ने अभी युवास्था में ठीक से कदम भी नहीं रखा कि उसे चिंताओं ने आकर बुरी तरह धर दबोचा है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पूनम अकसर कुछ न कुछ सोचती रहती है। कई बार सोचते सोचते पूनम को सिरदर्द तक हो जाता है। इतना ही नहीं अतिरिक्त चिंतन मनन के कारण पूनम की तबियत तक खराब हो जाती है।


    मौजूदा समय में सिर्फ पूनम ही नहीं तमाम ऐसे लोग हैं जो ओवर थिंकिंग यानी अतिरिक्त सोचने से परेशान हैं। ऐसे लोग अपनी पुरानी गलतियों से परेशान होते हैं, ऐसे लोग आसपास हो रहे गलत से तनावग्रस्त होते हैं, ऐसे लोग अपनी हार सहजता से नहीं ले पाते। यहां तक कि किसी विश्लेषक की तरह अपनी जिंदगी का आंकलन करते रहते हैं। नतीजतन ऐसे लोग बोझिल जिंदगी जी रहे होते हैं। ऐसी जिंदगी से बचने के लिए यहां हम कुछ टिप्स दे रहे हैं।

    स्वीकार करें

    सोच रहे होंगे कि क्या स्वीकार करना है? स्वीकार करना है कि आप ओवर थिंकर हैं। इन्हें मेडिकल भाषा में रियूमिनेटर कहा जाता है। मतलब यह कि जब आप अपने साथ हो रही परेशानी को स्वीकार करेंगे तभी उस समस्या से उभर पाएंगे। अतः यह मान लें कि आप रियूमिनेटर हैं। हर समय सोचते रहते हैं। किसी की भी जिंदगी का विश्लेषण करने लगते हैं। खुद को ओवर थिंकर मानने के बाद इस तरह के विश्लेषण से आप खुद को बचा सकते हैं।

     

    खुद को माफ करें

    गलतियां किससे नहीं होती? कौन नहीं हारता? कौन नहीं गिरता? अगर आप कभी हारे हैं, कभी कोई गलती की है तो इसे सहजता लें। इसे अपने जिंदगी की आखिरी गलती न मान बैठें और न ही सबसे बड़ी गलती का दर्जा दें। जिंदगी बहुत बड़ी है। इसमें गलतियां होना लाजिमी है। बेहतर यही है कि यदि गलती हुई है तो खुद को माफ करें। खुद को जिस दिन माफ कर देंगे, आप नोटिस करेंगे कि आगे चलने में आसानी हो रही है। मन बोझिल नहीं है और न ही अपना आंकलन खुद कर रहे हैं।



    खुद से बातें न करें

    ओवर थिंकर लोगों के साथ अकसर यह समस्या होती है कि वे जहां भी तन्हा होते हैं, खुद से बातें करने लगे हैं। इसे एकालाप कहा जाता है। एकालाप करते हुए वे इस तरह किसी बात की गहराई तक पहुंच सकते हैं कि वे भूल जाते हैं कि वे अपने आपसे बातें कर रहे हैं। ओवर थिंकर लोगों को चाहिए कि वे खुद से बातें न करें। जरूरत हो तो अपने दोस्तों से बातें करें। जितना जरूरी हो, उतनी ही बातें करें। फालतू बातें करने से बचें।

     

    व्यस्त रहें

    अगर आप खुद को सोचने से रोक नहीं पा रहे हैं तो बेहतर है खुद को किसी न किसी काम में व्यस्त रखें। किसी काम में खुद को व्यस्त रखना सही है। बेहतर होगा कि काई हाबी विकसित कर लें। अगर हाबी में मन न लग रहा हो तो ट्रैवलिंग को अपनी आदत का हिस्सा बनाएं। वैसे भी ट्रैवलिंग न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बल्कि देश दुनिया की अद्भुत जानकारी हासिल करने के शौकीनों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है। बहरहाल इसके और भी विकल्प हैं मसलन टीवी देखना, गाना सुनना, दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाना आदि।

     

    दिमाग शांत रखें

    कोशिश करें कि आपको दिमाग हमेशा शांत रहे। जो लोग ओवर थिंकर होते हैं यानी जो लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं, उनका दिमाग अकसर शांत नहीं रह पाता। हमेशा उनके दिमाग में हलचल होती रहती है। इन्हीं हलचलों के कारण ओवर थिंकर सिरदर्द, तनाव, डिप्रेशन, अवसाद जैसी चीजों से घिर जाते हैं। अतः बेहतर यही होगा कि दिमाग शंात रखें। यदि कोई खराब ख्याल जहन में आए तो उसे तुरंत झटक दें। यदि तमाम कोशिशें नाकामयाब हो रही हों तो घर से बाहर निकल जाएं और थोड़ी दूर चहलकदमी कर आएं।

     

    समस्या साझा करें

    यदि आप खुद को माफ नहीं कर पा रहे तो बेहतर है कि किसी से अपनी समस्या साझा करें। समस्या साझा करने अपने आप कम हो जाती है। असल में जब समस्या मन में रहती है तो वह एक विकराल रूप में होता है। उसका आकार भी विराट होता है। ऐसे में यदि हम अपनी समस्या किसी से साझा कर लें तो उसका रूप और आकार चीटी से भी छोटा हो जाता है और बोझ न के बराबर रहता है।

     

    सोच बदलें

    हम जैसा सोचते हैं, हमारी दुनिया वैसी ही होती है। ऐसे में यदि हम अपनी सोच नहीं बदलेंगे, हमेशा तनाव से भरे रहेंगे, हमेशा खुद को दोष देते रहेंगे तो हमारी गलती न होने के बावजूद भी खुद को दोषी बना देंगे। बेहतर यही है कि अपनी सोच बदलें। सोच बदले से ही ओवर थिंकर होने से बच सकते हैं।

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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