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त्वचा कैंसर से बचने के तरीको के बारे में जानें

कैंसर
By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 06, 2014
त्वचा कैंसर से बचने के तरीको के बारे में जानें

जब नई कोशिकाओं की जरूरत न होने पर भी त्वचा की कोशिकाएं विभाजित होना शुरू कर दें तो त्वचा कैंसर होने का खतरा हो जाता है।

Quick Bites
  • सूरज की पराबैंगनी किरणें बन करती हैं कारण।
  • 'सुपरहीरो जीन' की रक्षा भी करता है सनस्क्रीन।
  • यूवीए और यूवीबी प्रोटेक्शन भी होता है जरूरी।
  • कुछ विशेष आहार भी होते हैं बचाव में सहायक।

मानव शरीर में पुरानी कोशिकाओं को नई कोशिकाओं में बदलना शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं में से एक है। लेकिन जब नई कोशिकाओं की जरूरत न होने पर भी त्वचा की कोशिकाएं विभाजित होना शुरू कर दे तो इसके कारण त्वचा कैंसर की समस्या हो सकती है। त्वचा कैंसर एक गंभीर रोग है और इसकी सही जानकारी और इसके प्रति गंभीर सोच बचाव का सबसे कारगर उपाय है। हालांकि इस समस्या से बचने के लिए कुछ अन्य सावधानियां भी बरती जा सकती हैं। तो चलिये जानें कि त्वचा के कैंसर से बचाव कैसे किया जाए।

Skin Cancer Prevention in Hindi

 

सनस्क्रीन का प्रयोग

दरअसल सूरज की पराबैंगनी किरणें शरीर में भीतर जाकर कोशिकाओं की आनुवांशिक संरचना को ही बदल सकती हैं। और इस कारण से त्वचा का कैंसर हो सकता है। इसलिए तेज धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का प्रयोग करें। यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्‍वचा की रक्षा करता है। कुछ समय पूर्व ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने एक शोध में पाया था कि सनस्क्रीन न सिर्फ सनबर्न से त्वचा की सुरक्षा करती है, बल्कि यह तीन प्रकार के त्वचा कैंसरों से लड़ने वाले 'सुपरहीरो जीन' की भी रक्षा करने में सक्षम होती है।


क्वींसलैंड युनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालॉजी के शोधकर्ताओं ने त्वचा कैंसर में सनस्क्रीन के प्रभावों का परीक्षण किया था। जिसमें 57 लोगों की त्वचा पर सनस्क्रीन के बिना और सनस्क्रीन लगाकर पराबैंगनी किरणें डालकर उनकी त्वचा की जांच की गयी। परिणामों में शोधकर्ताओं ने पाया कि सनस्क्रीन सनबर्न से त्वचा की प्रभावी रूप से सुरक्षा करती है। साथ ही पाया कि सनस्क्रीन सुपरहीरो पी 53 जीन की भी रक्षा करता है जो बैसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और मेलिग्नेंट मेलानोमा नामक त्वचा कैंसर के तीन प्रकारों से त्वचा की रक्षा करता है।

 

Skin Cancer Prevention in Hindi

 

यूवीए और यूवीबी प्रोटेक्शन

अल्ट्रा वॉयलेट किरणें यूवीए और यूवीबी इन दो प्रकार की होती हैं। यूवीए किरणें त्वचा की पिग्मेंटेशन को बढ़ाती है, जबकि यूवीबी किरणें टैनिंग और स्किन कैंसर का कारण बनती हैं। इसलिए यूवीए से बचाव के लिए ‘एसपीएफ’ का चिन्ह और यूवीबी से बचाव के लिए ‘पीए’ का चिन्ह अपने सनस्क्रीन की जांच जरूर कर लें। ध्यान रहे कि यूवीबी किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन कम से कम एसपीएफ 30 वाला जरूर लें।

आहार भी है मददगार

विटामिन डी की सही मात्रा लें। यह हड्डियों को मजबूत बनान के साथ-साथ त्वचा को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से भी बचाकर स्किन कैंसर के खतरे को भी कम करता है। इसके अलावा चाय पियें, इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट यौगिक त्वचा को हानिकारक किरणों से बचाते हैं। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनल स्किन कैंसर से बचाव करता है। आप टमाटर और अंगूर को सेवन भी करें। ये भी त्वचा कैंसर से रक्षा करते हैं।

 

तेल लगाएं

त्वचा पर तेल मालिश करें। बादाम और नारियल के तेल में प्राकृतिक तौर पर एसपीएफ होता है। वहीं रसभरी के बीज के तेल में एसपीएफ 30 तथा गेहूं के तेल में विटामिन ई होता है जो आपको एसपीएफ 20 प्रदान करता है। नारियल का तेल त्वचा को एसपीएफ 8 प्रदान करता है और यह त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों से भी बचाता है।

 

तो स्किन कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है कि आप अपनी त्‍वचा का खयाल रखें। उसे जरूरी पोषण देते रहें। सनस्‍क्रीन लगायें और अपनी त्‍वचा की इस बीमारी से रक्षा करें।

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Written by
Rahul Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागAug 06, 2014

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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