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व्‍यायाम की क्षमता बढ़ाता है तरबूज

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By एजेंसी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 16, 2013
व्‍यायाम की क्षमता बढ़ाता है तरबूज

जर्नल ऑफ एग्रीकल्‍चर एंड फूड केमेस्‍ट्री की रिपोर्ट के अनुसार, तरबूज में नैचुरल रूप में पाया जाना वाला अमीनो एसिड- एल-सिट्रोलाइन मांसपेशियों के दर्द से राहत देता है।

Quick Bites

व्‍यायाम के बाद तरबूज का रस पीने से मांसपेशियों को आराम मिलता है। इसके साथ ही पानी की कमी भी पूरी होती है।

  • व्‍यायाम के दौरान शरीर की काफी ऊर्जा खर्च हो जाती है।
  • व्‍यायाम के बाद शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मांसपेशियों में काफी खिंचाव भी महसूस होता है। 
  • पानी की कमी को दूर करने के लिए पानी के स्‍थान पर तरबूज का सेवन मांसपेशियों को राहत देता है।
  • तरबूज में नैचुरल रूप में पाया जाना वाला अमीनो एसिड-एल-सिट्रोलाइन होता है।

तरबूज

व्‍यायाम के दौरान शरीर की काफी ऊर्जा खर्च हो जाती है। इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे मांसपेशियों में काफी खिंचाव भी महसूस होता है। अक्‍सर लोग इस खिंचाव को दूर करने के लिए व्‍यायाम से कुछ देर पहले पानी पीते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने इसका एक नया हल ढूंढा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल पानी पीने से इस कमी को दूर नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि पानी के स्‍थान पर अगर तरबूज का सेवन किया जाए तो मांसपेशियों को अधिक राहत मिलती है।

 

जर्नल ऑफ एग्रीकल्‍चर एंड फूड केमेस्‍ट्री की नई रिपोर्ट के अनुसार, तरबूज में नैचुरल रूप में पाया जाना वाला अमीनो एसिड- एल-सिट्रोलाइन मांसपेशियों के दर्द से राहत देता है। साथ ही लंबे समय से यह भी माना जाता है कि तरबूज का रस प्रदर्शन में वृद्धि करता हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि मांसपेशियों से राहत पाने वाले अन्‍य ड्रिंक के मुकाबले व्‍यायाम से एक घंटा पहले एथलीटों को तरबूज का रस देने से मांसपेशियों की समस्‍या से अधिक राहत मिलती है।

 

अपने अध्‍ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि व्‍यायाम के बाद तरबूज का रस पीने से मांसपेशियों को आराम मिलता है। इसके साथ ही पानी की कमी भी पूरी होती है। तरबूज में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं, जो मांसपेशियों को आराम देते हैं। इससे मांसपेशियों को जरूरी प्रोटीन मिलता है जिससे लोगों के व्‍यायाम करने की क्षमता में भी इजाफा होता है। इसके अलावा इससे शरीर में ऊर्जा का स्‍तर बढ़ता है और त्‍वचा जवां बनी रहती है। अध्‍ययन के नतीजे 'जर्नल ऑफ एग्रीकल्‍चर एंड फूड केमेस्‍ट्री' के ताजा अंक में प्रकाशित किए गए हैं।



 

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एजेंसी
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागAug 16, 2013

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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