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    थायराइड के इलाज के लिए करें अखरोट का सेवन

    थायराइड By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 05, 2014
    थायराइड के इलाज के लिए करें अखरोट का सेवन

    थॉयराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्‍योंकि इसकी बीमारी का पता धीरे-धीरे चलता है, यह ग्रंथि गले में पायी जाती है, जो उर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है, इसके उपचार के लिए अखरोट का सेवन करें।

    थॉयराइड ग्रंथि की समस्‍या से ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है, खानपान में अनियमिता के कारण यह समस्‍या होती है। थॉयराइड ग्रंथि तितली के आकार की होती है जो गले में पाई जाती है। यह ग्रंथि उर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है। यह एक तरह के मास्टर लीवर की तरह है जो ऐसे जीन्स का स्राव करती है जिससे कोशिकाएं अपना कार्य ठीक प्रकार से करती हैं। इस ग्रंथि के सही तरीके से काम न कर पाने के कारण कई तरह की समस्‍यायें होती हैं। अखरोट इस बीमारी के उपचार में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में विस्‍तार से जानें थॉयराइड फंक्‍शन और इसके उपचार के लिए अखरोट के सेवन के बारे में।

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    क्‍या है थॉयराइड समस्‍या

    थॉयराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्‍योंकि इसके लक्षण व्‍यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी का निदान होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्‍सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।
    थॉयराइड की समस्‍या दो प्रकार की होती है - हाइपोथॉयराइडिज्‍म और हाइपरथॉयराइडिज्‍म। थॉयराइड ग्रंन्थि से अधिक हॉर्मोन बनने लगे तो हाइपरथॉयरॉइडिज्म और कम बनने लगे तो हाइपोथायरॉइडिज्म होता है। थॉयराइड की समस्‍या होने पर थकान, आलस, कब्ज का होना, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक ठंड लगना, भूलने की समस्‍या, वजन कम होना, तनाव और अवसाद जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

    अखरोट है फायदेमंद

    अखरोट में सेलेनियम नामक तत्‍व पाया जाता है जो थॉयराइड की समस्‍या के उपचार में फायदेमंद है। 1 आंउस अखरोट में 5 माइक्रोग्राम सेलेनियम होता है। अखरोट के सेवन से थॉयराइड के कारण गले में होने वाली सूजन को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। अखरोट सबसे अधिक फायदा हाइपोथॉयराइडिज्‍म (थॉयराइड ग्रंथि का कम एक्टिव होना) में करता है।
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    सेलीनियम है फायदेमंद

    थॉयराइड ग्रंथि में सेलीनियम उच्च सांद्रता में पाया जाता है इसे थायराइड-सुपर-न्युट्रीएंट भी कहा जाता है। यह थॉयराइड से सम्बंधित अधिकांश एंजाइम्‍स का एक प्रमुख घटक द्रव्य है, इसके सेवन से थॉयराइड ग्रंथि सही तरीके से काम करने लगता है। यह ऐसा आवश्यक सूक्ष्म तत्व है जिस पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता सहित प्रजनन आदि अनेक क्षमतायें भी निर्भर करती है। यानी अगर शरीर में इस तत्‍व की कमी हो गई तो रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिए खाने में पर्याप्‍त मात्रा में सेलेनियम के सेवन की सलाह दी जाती है। अखरोट के अलावा सेलेनियम बादाम में भी पर्याप्‍त मात्रा में पाया जाता है।

    थॉयराइड ग्रंथि की समस्‍या होने पर नमक का सेवन बढ़ा देना चाहिए, इसके अलावा स्‍वस्‍थ खानपान और नियमित रूप से व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या बनायें।

     

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    Disclaimer

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