• shareIcon

नियमित वॉक से बढ़ती उम्र में कम नहीं होती याद्दाश्‍त

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 28, 2015
नियमित वॉक से बढ़ती उम्र में कम नहीं होती याद्दाश्‍त

ढलती उम्र में वृद्धों को अपना शिकार बनाने वाली बीमारियों में स्मृतिदोष भी शामिल है, लेकिन नियमित वॉक करने वालों की याद्दाश्‍त समय के साथ कम नहीं होती है, बल्कि यह समय के साथ टलती जाती है।

ढलती उम्र में कई बीमारियां वृद्धों को अपना शिकार बनाती हैं। इनमें से स्मृतिदोष ऐसी बीमारी है जिसका अभी तक कोई भी स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं हो पाया है। लेकिन अगर जवानी में कुछ बातों को ध्‍यान में रखा जाये तो बढ़ती उम्र के कारण घटने वाली दिमागी क्षमता पर काबू पाया जा सकता है। एक अध्‍ययन से पता चला है कि नियमित वॉक करने वालों की याद्दाश्‍त समय के साथ कम नहीं होती है, बल्कि यह समय के साथ टलती जाती है। इसके अलावा नियमित वॉक के कई दूसरे फायदे भी हैं। इस लेख में विस्‍तार से जानिये किस तरह से नियमित वॉक याद्दाश्‍त को बढ़ाने में मदद करती है।

 

walking in hindi

शोध के अनुसार

अमेरिका के कंसास यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल साइकोलॉजी द्वारा किये गये शोध में इस बाता का खुलासा हुआ है। इस शोध की मानें तो व्‍यक्तियों को हमेशा टहलने के बहाने निकालने चाहिए, जिसका फायदा उनको हमेशा होता है। इस अध्ययन में अल्जाइमर रोग से पीड़ि‍त 25 लोग तथा 39 स्वस्थ उम्रदराज लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन में यह बात सामने आई कि टहलने से इन सबको लाभ हुआ।

 

स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद

'चलो कुछ दूर टहल आएं' अपने किसी परिचित का ऐसा आग्रह हम अक्सर स्वीकार कर लेते हैं। तो टहलने से एक ओर जहां हमारा समाजीकरण होता है तो दूसरी ओर स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। पड़ोसी जो टहलने के लिए प्रेरित करते हैं, यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसा हमें पेड़ की छाया में प्रतीत होता है।

 

तनाव कम होता है

वॉकिंग रक्‍तचाप और जोड़ों पर दबाव को कम करती है, और स्‍ट्रोक का खतरा कम कर आपको फिट रखती है। लेकिन वॉकिंग के कई प्रकार के मानसिक लाभ भी होते हैं। वॉकिंग तनाव कम करने का एक प्रभावी तरीका है। वॉकिंग मस्तिष्क में नोरेपिनेफ्रिने नामक केमिकल को बढ़ने में मदद करता है। और यह केमिकल तनाव के प्रति मस्तिष्‍क की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है, इससे तनाव को अच्‍छे तरीके से निपटने में मदद मिलती है।

mental health in hindi

एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव

वॉकिंग से खुशी और उत्‍साह बढ़ाने वाले एंडोर्फिन नामक हार्मोन का स्राव होता है। जो वयस्‍कों में अवसाद को कम करने में मदद करता है। वॉकिंग के दौरान इस हार्मोंन के स्राव से समग्र मूड में सुधार में मदद मिलती है। अध्‍ययन से पता चला है कि जो बूढ़ लोग नियमित रूप से वॉक करते हैं उनमें अल्‍जामर और डिमेंशिया जैसे रोगों के विकास का जोखिम अन्‍य लोगों की तुलना में बहुत कम होता है।

ब्रिस्‍क वॉकिंग से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। और शरीर के तापमान के वापस सामान्‍य होने के बाद आपको बहुत ज्‍यादा रिलैक्‍स और स्‍लीपी महसूस होता है। इसलिए वॉकिंग अच्‍छी नींद पाने का भी एक अच्‍छा तरीका है। इसके अलावा वॉकिंग मेडिटेशन के रूप में भी काम करता है। चलते चलते आप चुप होने पर अपनी सांसों और  प्रार्थना के माध्यम से अपने शरीर के साथ एक कनेक्शन बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।


Image Source : Getty

Read More Aritlces on Mental Health in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK