Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

विश्व ग्लूकोमा दिवस

ग्‍लाउकोमा
By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 05, 2012
विश्व ग्लूकोमा दिवस

ग्लूकोमा से हमारे देश में बहुत से लोग पीड़ित हैं।

glaucoma diwasग्लूकोमा से हमारे देश में बहुत से लोग पीड़ित हैं। आमतौर पर पहले लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं और टालते रहते हैं, जो कि सबसे बड़ी वजह ग्लूकोमा के गंभीर रुप लेने की। यह रोग आमतौर पर बढ़ती उम्र में होता है लेकिन अगर यह अनुवांशिक है तो यह बच्चों में भी हो सकता है। कई बार बच्चों में जन्म से ही यह समस्या हो जाती है। ग्लूकोमा का इलाज जितना जल्दी हो सके करा लेना चाहिए। क्योंकि, देर करने पर आंखों की रोशनी में होने वाली कमी गंभीर हो सकती है। ग्लूकोमा का एकमात्र इलाज सर्जरी है, जो कि बहुत ही आसान हो चुकी है। आइए जाने विश्व ग्लूकोमा दिवस के बारे में।

  • विश्व ग्लूकोमा दिवस लोगों को ग्लूकोमा के बारे में जागरुक करने के लिए मनाया जाता है। इससे लोगों को ग्लूकोमा व इसके प्रभावों के बारे में जानकारी होती है।
  • विश्व भर में ग्लूकोमा से पीड़ित लोगों की संख्या 6 करोड़ 50 लाख के करीब है। जिसमें से एक करोड़ बीस लाख लोग सिर्फ भारत में ही हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विश्वभर में जितने लोग अपनी आंखों की रोशनी खोते हैं उसकी सबसे बड़ी वजह ग्लूकोमा होता है।
  • ग्लूकोमा के बारे में लोगों को ज्यादा जागरुक करने के लिए ग्लूकोमा सप्ताह मनया जाने लगा है। पहले यह एक दिवस के रुप में मनाया जाता था।  
  • इस बार विश्व भर में ‘ग्लूकोमा दिवस 2012’ ग्यारह से सत्रह मार्च तक रहेगा। इसमें लोगों को ग्लूकोमा के बारे में जागरुक किया जाएगा।
  • कई बार आपको ग्लूकोमा के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे में आपको नियमित जांच से ही आंखों में ग्लूकोमा के बारे में पता चल सकता है।
  • ग्लूकोमा के 50% से ज्यादा मरीज विकासशील देशों में है। वजह है ग्लूकोमा के बारे में जानकारी नहीं होना। अविकसित देशों में यह आकड़ा 90%  तक हो सकता है।
  • ग्लूकोमा के कई प्रकार होते हैं, जिनमें सबसे आम वृद्धावस्था का मोतियाबिंद है, जो 50 से अधिक आयुवाले लोगों में विकसित होता है।
  • यह रोग अनुवांशिक भी होता है साथ ही यह समस्या बच्चों में जन्मजात भी हो सकती है।

क्या है ग्लूकोमा

ग्लूकोमा आंखों के क्रिस्टेलाइन लेंस का धुंधलापन है। यह लेंस के पार प्रकाश के रास्ते को रोक देता है और रेटिना पर फोकस करता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। 10 साल की उम्र में लैंस स्वच्छ और पारदर्शी होता है। यह उम्र के साथ-साथ अधिक धुंधला होता जाता है। 60 या 70 साल के आसपास के अधिकतर लोगों को दृष्टि से संबंधित कुछ परेशानियां होनी शुरू हो जाती है। जब धुंधलापन अधिक बढ़ जाता है तब लोग इसे गंभीरत से लेते हैं।

Written by
Anubha Tripathi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 05, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK