सूर्य नमस्कार ही नहीं चंद्र नमस्कार करने के भी हैं जबरदस्त फायदे, वरुण धवन से सीखें इसे करने का सही तरीका

Updated at: Jul 10, 2020
सूर्य नमस्कार ही नहीं चंद्र नमस्कार करने के भी हैं जबरदस्त फायदे, वरुण धवन से सीखें इसे करने का सही तरीका

चन्द्र नमस्कार में सांस लेने के व्यायाम व ध्यान जैसे पोज भी शामिल हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए ही फायदेमंद है।

Pallavi Kumari
योगाWritten by: Pallavi KumariPublished at: Jul 10, 2020

योग आजकल लॉकडाउन को देखते हुए व्यायाम का पसंदीदा विकल्प है। यहां तक कि सेलेब्स भी अपनी तस्वीरें और वीडियो खुद शेयर करते हुए कई योगा पोज कर रहे हैं। हाल ही में, अभिनेता वरुण धवन ने भी चंद्र नमस्कार यानी कि मून सल्यूटेशन पोज (Chandra Namaskar or Moon Salutation Pose) करते हुए अपना वीडियो साझा किया है। वो इन दिनों स्वस्थ रहने के लिए योग ट्रेनर मिहिर जोग के साथ प्रशिक्षण कर रहे हैं। पर क्या आपको पता है चंद्र नमस्कार आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है? कहा जाता है कि सूर्य नमस्कार करना शरीर और दिमाग में सूर्य सा तेज और बल देता है, इसके बिलकुल उल्ट चंद्र नमस्कार शीतलता और शांति प्रदान करता है। अगर आप तनाव में हैं या मानसिक रूप से बेचैन रहते हैं, तो चंद्र नमस्कार आपके लिए बहुत फायदेमंद है।

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चंद्र नमस्कार के फायदे (Benefits Of Chandra Namaskar)

चंद्र नमस्कार की बात करें तो यह मुद्रा ध्यान और शांत होने के बारे में है जबकि सूर्य नमस्कार गर्मी और प्रकाश के बारे में है। ज्यादातर ये पोज शाम के समय किया जाता है और यह शरीर को आराम करने और सांस लेने के लिए मजबूत संबंध बनाने में मदद करता है। इसके साथ ही ये मन को शांत करने और जागरूकता को अंदर की ओर खींचने के लिए भी किया जाता है। यह बहुत प्रभावी हो सकता है जब आपके शरीर में ऊर्जा या तापमान अधिक हो और आपको खुद को शांत करने की जरूरत हो। जैसे कि तनाव, गुस्सा और एंग्जायटी के दौरान।

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महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है चंद्र नमस्कार 

पीरियड्स में या गर्भवती महिलाओं के लिए यह विशेष रूप बहुत फायदेमंद है। यह अनुशंसित नहीं है, पर इन दिनों होने वाले एंग्जायटी और अवसाद को ये शांत कर सकता है। साथ ही ये पीठ की समस्याओं से भी निजात दिला सकता है। अगर आप रात में कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि इसे खाली पेट ही करें। यह योग सभी मांसपेशी समूहों में लचीलेपन को मजबूत करने में मदद करता है और श्वसन, संचार और पाचन तंत्र के कामकाज को बढ़ाता है। वहीं इसके अन्य फायदों की बात करें, तो

  • -तनाव और चिंता को कम करता है
  • -सूजन को कम करता है
  • -हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
  • -वजन घटाने में सहायक
  • -अवसाद से लड़ने में मदद करता है
  • -पुराने दर्द को कम करता है
  • -नींद की गुणवत्ता को बढ़ावा देता है
  • -शरीर के लचीलापन और संतुलन में सुधार करता है
  • -माइग्रेन से राहत दिलाता है
 
 
 
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चंद्र नमस्कार को सूर्य नमस्कार के रूप में अच्छी तरह से नहीं जाना जाता है क्योंकि स्पष्ट रूप से इसका आविष्कार 20 वीं शताब्दी के अंत में हुआ था। हालांकि, कई विविधताएं हैं, इस अनुक्रम में आमतौर पर प्राणायाम, हस्त्मन आसन, चंद्रसाना, उत्थिता तड़ासन, त्रिकोणासन, परसवोत्तानासन, लेफ्ट साइड लॉज, फॉरवर्ड-फेसिंग लंज, मलसाना, फॉरवर्ड-फेसिंग लंज, राइट साइड लंज जैसे आसन शामिल हैं। आइए जानते हैं इसे करने का तरीका।

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चन्द्र नमस्कार की विधि (Chandra Namaskar Steps)

  • -प्राणायाम (प्रार्थना मुद्रा) : पैरों के साथ सीधे खड़े हों। प्रार्थना की स्थिति में हथेलियों को एक साथ लाएं।
  • -हाथों को पीछे धकेल कर पीछे की ओर झुकें : सांस लेते हुए, हाथों को आगे और ऊपर लाएं, जितना संभव हो सके उतना ऊपर खुद को खींचे। धीरे से हाथों को पीछे धकेल कर पीछे की ओर झुकें। कोहनी और घुटने सीधे रखें और सिर ऊपर रखें।
  • -पादहस्तासन (हाथ से पैर की मुद्रा) : श्वास बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। हाथों को फर्श पर रखें। घुटनों को मोड़ें। फर्श पर हाथों के साथ, घुटनों को सीधा करें।
  • -अश्व संचलाना (अश्वारोही मुद्रा) : दाएं पैर को जितना संभव हो उतना पीछे धकेलें, फर्श पर दाहिने घुटने को छुकाते हुए ऊपर देखें।
  • -दंडासन (स्टिक पोज़) : सांस रोककर, बाएं पैर को पीछे धकेलें। घुटनों को सीधा रखते हुए शरीर को एक सीधी रेखा में लाएं।
  • -शिशुसाना (बाल मुद्रा) : सांस छोड़ें और वापस खींचें। कूल्हों को एड़ी तक ले जाएं, घुटनों की ओर माथे और हाथों को सामने की तरफ मजबूती से रखें।
  • -अष्टांग नमस्कार (आठ भागों या अंकों के साथ नमस्कार) : ठोड़ी को जमीन के पास रखते हुए आगे की ओर बढ़ें। आपकी ठोड़ी, छाती, आपके हाथ की हथेलियां, घुटने, और पैर के तलवे छूते हुए ये आसान करें।
  • -भुजंगासन (कोबरा मुद्रा) : श्वास लेते हुए कोबरा स्थिति में जाएं। कंधों के नीचे हाथ, कोहनी को एड़ी एक साथ लाते हुए ये आसान करें। श्रोणि को जमीन से दबाएं और ऊपर उठाएं। ऊपरी पीठ में झुकने पर ध्यान दें।
  • -पर्वतवासन (पर्वत मुद्रा): श्वास लें और उल्टे 'V’ स्थिति में हाथ और पैर को फैलाएं। जमीन पर एड़ी के टिकाते हुए ऊपर की ओर देखें।

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