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गोद लिये बच्चों की खानपान सम्बंधी समस्याएं

परवरिश के तरीके By Meera Roy , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 09, 2016
गोद लिये बच्चों की खानपान सम्बंधी समस्याएं

गोद लिए हुए बच्चों के साथ अनेक समस्याएं होती हैं। अगर आप ऐसे बच्चे को गोद ले रही हैं जिसने भूखमरी देखी है तो आप नोटिस करेंगे कि खाने को लेकर विशेष तौर पर चिंतित होगा। ऐसे में उन्हें इस तरह समझाएं।

पांच वर्षीय नेहा को उसके मौजूदा मां-बाप ने गोद लिया है। लेकिन उनके सामने नेहा किसी चुनौती सरीखा उभर रही है। दरअसल नेहा महज चार साल की थी जब उसे गोद लिया गया था। उसने इतनी मासूम सी उम्र में ही भुखमरी देखी थी। वह उतनी सी उम्र में कम खाना, दो वक्त न खाना आदि समस्याओं से रूबरू हो चुकी थी। यही कारण है कि वह अकसर अपने मौजूदा मां-बाप से खाने के सम्बंध में सवाल करती रहती है। वह हर समय यह जानना चाहती है कि क्या उसके घर में दूसरे वक्त खाने के लिए खाना है। यही नहीं वह अकसर कोशिश करती है कि अपने हिस्से से थोड़ा खाना बचा ले ताकि अगली बार उसे भूखा न रहना पड़े। यह बात अकेले नेहा के साथ नहीं है। तमाम गोद लिये हुए बच्चों के साथ अलग अलग किस्म की समस्याएं देखी जाती हैं। इस लेख में हम गोद लिए हुए बच्चों के साथ आहार सम्बंधी समस्याओं पर चर्चा करेंगे।

 

भूखा रहना

गोद लिया हुआ बच्चा अकसर भूखे रहने से डरता है। उसे लगता है कि न जाने उसे दूसरी दफा खाने को दिया जाएगा या नहीं। इस सम्बंध में वह तनावपूर्ण भी रहता है। ऐसी स्थिति में मां-बाप को चाहिए कि वे हमेशा अपने बच्चों को खाने के प्रति सुरक्षित महसूस करवाएं। यदि उनका बच्चा दोस्तों के साथ बाहर जा रहा है तो उसे पैसे दें ताकि वे दोस्तों की तरह चिप्स आदि खरीद सके। घर में रहते हुए भूख लगने पर उन्हें आहार अवश्य दें। उन्हें निराश न होने दें। ऐसा तब तक करें जब वह सुनिश्चित न हो जाए कि उसे भुखमरी का शिकार नहीं होना पड़ेगा।

परवरिश

 

खाने की इजाजत देना

गोद लिये हुए बच्चों को लगता है कि उसके नए मां-बाप उसे उसकी पसंद की चीजें खाने नहीं देंगे। इसके उलट उसे वही खाने को दिया जाएगा जो उसके मां-बाप पसंद करते हैं। ये भी तनावपूर्ण स्थिति है। ऐसी समस्या से बचने के लिए मां-बाप को चाहिए कि वे अपने गोद लिये हुए बच्चों को हर चीज खाने की इजाजत दें। यदि मना करना है तो उसके पीछे वजह बताएं। कोशिश करें कि शुरुआती दिनों में उसे किसी चीज के लिए मना न करें। मना करने की प्रक्रिया धीरे धीरे शुरु करें।

 

नकारात्मक शब्दों से बचें

गोद लिये हुए बच्चों के सामने ‘तुम खा नहीं सकते’ या ‘ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है’ जैसे शब्दों का उपयोग न करें। इसके बजाय ऐसा कहें कि ‘ये खाने की बजाय अन्य स्वस्थवर्धक चीजें लें’ या फिर ‘इससे बेहतर ये है’ जैसे शब्देां का इस्तेमाल करें। यकीन मानें सकारात्मक शब्दों के जरिये आप अपने बच्चों को बेहतरीन स्वास्थ्य तो दे ही रहे हैं साथ ही उनके दिल के करीब भी आ रहे हैं।

 

घर में स्वस्थ आहार रखें

अकसर गोद लिये हुए बच्चों में खाना चुराने की आदत होती है। असल में ऐसा वे डर से करते हैं। उन्हें लगता है कि उनके मां-बाप उन्हें भरपेट खाना नहीं देंगें। जब तक आप उन्हें तसल्ली नहीं दिला पाते तब तक अपनी रेफ्रिजरेटर में पर्याप्त मात्रा में आहार विशेष रखें। खासकर स्वस्थ आहार अवश्य रखें। असल में आपका गोद लिया हुआ बच्चा उन्हें चुराकर या पूछकर अवश्य खाएगा। अतः स्वस्थ आहार रख उन्हें स्वस्थ जीवन दें।

 

दुकान ले जाएं

अपने गोद लिये हुए बच्चे के करीब जाने के लिए उसे अपने साथ दुकान ले जाएं। उसके सामने उसे अच्छे अच्छे आहार खरीद कर दें। उसे उनके फायदे गिनाएं। स्वास्थ्य के लिए खराब आहार के नकारात्मक बिंदुओं पर नजर दौड़ाएं। ऐसा करने से बच्चे को सही और गलत आहार चुनने में मदद मिलेगी।

 

रेफ्रिजरेटर में ताला न लगाएं

अगर आपको लगता है कि आपका गोद लिया हुआ बच्चा अतिरिक्त खाने लगा है। ऐसे में रेफ्रिजरेटर में ताला लगाना बेहतर है। आपको बता दें कि यह आपकी गलत अवधारणा है। रेफ्रिजरेटर में ताला लगाकर आप बच्चे को खुद से दूर कर रहे हैं। बेहतर है कि रेफ्रिजरेटर खुला रखें। ऐसा करने से आपका घर गोद लिये हुए बच्चे के लिए खुली तिजोरी होगी जहां वह कभी भी आ जा सकता है। ऐसा करने से उसे पता रहेगा कि आप उससे कुछ छिपाना नहीं चाहते। इसके उलट घर में जो भी खरीदा है, सब उसके लिए ही है।

 

मील प्लानिंग

अगर आप घर से बाहर जा रहे हैं तो निश्चित रूप से मील प्लानिंग अवश्य करेंगे। ऐसे में आप अपने गोद लिए हुए बच्चे को अवश्य अपने साथ रखें। ऐसा न करने से उसे लगेगा कि आप उसे अच्छा खाना खाने में शामिल नहीं करना चाहते। इसलिए उसे मील प्लानिंग का हिस्सा नहीं बना रहे। अगर वह आपकी मील प्लानिंग में असहज है तो उसे सहज महसूस कराने के लिए मील प्लानिंग में कुछ तब्दीलियां अवश्य करें।


उसके वजन में कमेंट न करें

गोद लिये हुए बच्चों के साथ उसके स्वास्थ्य सम्बंधी बातें करते हुए सजग रहें। यदि वह ऊलजुलूल खाने के चलते मोटा हो रहा है तो उसे मोटा न कहें। इसके बजाय स्वस्थ होने के फायदे बताएं ताकि उसे लगे कि मोटा होना कितना खतरनाक है। कोशिश करें कि उसके शारीरिक ढांचे पर किसी तरह के कमेंट न करें।

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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