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हड्डियों में लगने वाली चोट को न करें नजरअंदाज, हो सकता है ये रोग

अन्य़ बीमारियां By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 20, 2018
हड्डियों में लगने वाली चोट को न करें नजरअंदाज, हो सकता है ये रोग

कई बार शरीर में जरूरी पोषक-तत्वों और विटामिनों की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिससे शरीर में भंगुर हड्डियों की समस्या हो जाती है। भंगुर हड्डियों से जुड़ी समस्या और उसके उपचार के बारे में विस्तार से जानें।

जब आप कमजोर हड्डियों से परेशान होते है तो आप भंगूर हड्डी रोग से पीड़ित होते हैं। यह एक ऐसा विकार है जिसके परिणामस्‍वरूप कमजोर हड्डियां आसानी से टूटने लगती है। यह समस्‍या जन्‍म के दौरान उपस्थित होती है। यह ऐसे बच्‍चों में भी विकसित होता है जिन बच्‍चों के परिवार में रोग का इतिहास है। इसे ओस्टोगेन्सिस अपूर्णता के रूप में जाना जाता हे और निश्चित रूप से बचपन में हड्डियों के टूट के कारण होने वाला अपूर्ण ह‍ड्डी गठन की बीमारी है। हड्डियों की कमजोरी कोलेजन समस्‍या के कारण होता है। 

भंगुर हड्डियों की समस्‍या

कुछ बच्‍चों हड्डी की कमजोरी मां के पेट से ही हो जाती है और वह इसी के साथ पैदा होते हैं। दूसरे तरह के बच्‍चों में पहला फ्रैक्‍चर सही जन्‍म के बाद या कई साल के बाद होता है। फ्रैक्‍चर की भविष्‍यवाणी करना मुश्किल होता है, विशेष रूप से बचपन में।

 

भंगुर हड्डियों के लक्षण

  • फ्रैक्‍चर
  • हड्डी में विकृति
  • छोटे से वृद्धि
  • जोड़ों और मांसपेशियों में कमजोरी
  • श्वेतपटल का नीला पड़ जाना है
  • भंगुर दांत
  • बहरापन
  • सांस की समस्‍याएं
  • शरीर पर चोट या घाव 

भंगुर हड्डियों की समस्‍या के कारण

भंगुर हड्डियों की समस्‍या कुछ अनायास या कम चोट के कारण होती हैं, इस में सामान्‍य तरह के लक्षण देखे नहीं जाते हैं और टूट को कुछ हफ्तों या महीनों बाद भी नहीं देखें जाते हैं जब तक किसी अन्‍य कारण से एक्‍स-रे न किया जाये। हड्डियों लगातार एक नाजुक तरीके से व्यवहार नहीं करती- और उनमें टूट तब तक नहीं होता जब की कोई चोट न लगें। दोनों लिंग में है और लगभग सभी प्रकार के फ्रैक्चर होते हैं, लेकिन आवृत्ति किशोर उम्र में कम हो जाती है और वयस्क जीवन में भी कम रहती है।

जैसा कि हम पहले बता चुकें है कि फ्रैक्‍चर कोलेजन की कमी का परिणाम है। कई लोगों में इसकी पहचान टूट से दिखाई देती है। गंभीर रूप से प्रभावित लोगों में पहले फ्रैक्‍चर के परिणाम के कारण एक्‍स-रे से समस्‍या की पहचान की जाती है। कई व्‍यक्तियों में हल्‍के या उचित भंगुर हड्डियों की समस्‍याओं में पहले कुछ टूट एक्‍स-रे में सामान्‍य प्रकट होते हैं। बाद में, हड्डियां पहले टूट के अधीन हो जाती है, और हड्डियां और कम रेडिएशन की पहचान के लिए स्‍वीकार्य चित्र प्राप्‍त करना जरूरी होता है। हल्‍के भंगुर हड्डियों की समस्‍या से ग्रस्‍त 50 प्रतिशत बच्‍चों में एक्‍स-रे के दौरान हड्डियां बहुत छोटी दिखाई देती है। 

भंगुर हड्डियों का उपचार

  • वर्तमान समस्‍या में कोई भी उपचार इन उद्देश्‍यों को ध्‍यान में रखकर किया जाता है जैसे
  • स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम;
  • बेहतर गतिशीलता;
  • हड्डी और मांसपेशियों की ताकत का उत्पादन।

उपचार के लिए, फ्रैक्‍चर के दौरान सक्षम आर्थोपेडिक देखभाल होनी चाहिए यह सुनिश्चित करने के लिए हर फ्रैक्‍चर एक अच्छी स्थिति में भरेगा। मरीजों स्थिरीकरण के कारण हड्डी के नुकसान को कम करने के लिए जितनी जल्दी हो सके, उपाय अपनाने चाहिए। कुछ स्थितियों में रोडिंग प्रक्रियाओं में, जिसमें निश्चित या टेलीस्‍कोपिक मेटल रोड को हड्डियों की शाफ्ट में डाला जाता है, बहुत मददगार होती है विशेष रूप से बार-बार टूट या विकलांगता के कारण। एक्‍सरसाइज और स्‍वीमिंग इसमें मदद करते है।

भंगुर हड्डियों की रोकथाम

हालांकि यह आनुवंशिक समस्‍या के कारण होता है और आमतौर पर 50 प्रतिशत बच्‍चों में इस बीमारी के संचरण की संभावना रहती है। लेकिन आनुवंशिक परामर्श के माध्‍यम से, अगली पीढ़ी में स्‍थानांतरण को रोका जा सकता है। इसके अलावा स्‍वस्‍थ जीवन शैली यानी व्‍यायाम और स्‍वस्‍थ भोजन के द्वारा भी इसे कम या रोका जा सकता है। धूम्रपान और अत्‍यधिक शराब के सेवन से बचें, क्‍योंकि इससे हड्डी ऊतक कमजोर होते है और फ्रैक्‍चर का खतरा बढ़ सकता है।

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