इन मुख्य कारणों से बच्चों में फैलता है टाइफाइड बुखार, जानें इससे बचाव के क्या हैं आसान तरीके

Updated at: Jul 10, 2020
इन मुख्य कारणों से बच्चों में फैलता है टाइफाइड बुखार, जानें इससे बचाव के क्या हैं आसान तरीके

बच्‍चों में टाइफाइड : आइए जानें, बच्‍चों में टाइफाइड को एक खतरनाक बुखार माना जाता है, जो 'साल्मोनेला टाइफी' नामक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है

Vishal Singh
अन्य़ बीमारियांWritten by: Vishal SinghPublished at: Dec 29, 2015

टाइफाइड (Typhoid) बुखार को मियादी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, ये बुखार एक संक्रमण के जरिए फैलता है। यह बुखार साल्मोनेला बैक्टीरिया के संपर्क में आने से होता है। ये बैक्टीरिया शरीर में जाने के बाद अपनी संख्या बहुत तेजी से बढ़ाते हैं। वैसे तो टाइफाइड किसी को भी अपना शिकार बना सकता है लेकिन ये बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक और गंभीर हो जाता है। ये तो आप भी जानते होंगे कि टाइफाइड होने के करीब एक हफ्ते बाद ही इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। कई मामलों में दो महीने तक भी इसके लक्षण दिखते हैं। 

टाइफाइड का पता लगते ही लोग अस्पतालों का रुख करते हैं और डॉक्टर के कहे अनुसार चलते हैं। टाइफाइड (Typhoid) में जरा सी लापरवाही भी खतरनाक हो सकती है और ये तब और भी गंभीर हो जाता है जब किसी बच्चों को टाइफाइड बुखार का शिकार होना पड़ता है।  इस बीमारी में तेज बुखार आता है, जो कई दिनों तक बना रहता है। यह बुखार कम-ज्यादा होता रहता है, लेकिन सामान्य नहीं होता। टाइफाइड दो साल के बच्‍चों से लेकर बड़ों तक में हो जाता है। वहीं, अगर बात बच्चों की देखें तो उनमें टाइफाइड कम समय में खतरनाक रूप ले सकता है। आइए इस लेख के जरिए जानते हैं कि बच्चों में टाइफाइड का क्या कारण हो सकता है इससे बचाव क्या है। 

टाइफाइड रोग होने का एक मुख्य कारण है हमारा खानपान, खानपान पर ध्यान न देना टाइफाइड (Typhoid) की एक बड़ी वजह होती है। गंदे पानी, संक्रमित जूस या पेय के साथ साल्मोनेला बैक्टीरिया हमारे शरीर में चले जाते हैं। जिसके कारण ये पेट में और भी ज्यादा मात्रा में हो जाते हैं। टाइफाइड का इलाज जल्द कराना चाहिए और सही तरीके से, जिससे की पीड़ित जल्द से जल्द स्वस्थ हो सके। टाइफाइड के इलाज में जरा भी लापरवाही करने से हमारे लिए खतरनाक हो सकती है। 

बच्चे के पैदा होने के बाद उन्हें कई बीमारियों का खतरा बना रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम (Immune system) काफी नाजुक होता है जिसकी वजह से वो किसी भी बीमारी का शिकार आसानी से हो जाते हैं और किसी भी तरह के बैक्टीरिया आसानी से उनके शरीर में प्रवेश कर लेते हैं। इसलिए बच्चों का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो जाता है। उन्हें कुछ भी खिलाने या पिलाने की चीज साफ-सुथरी ही देनी चाहिए। बच्चों को किसी भी तरीके के संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है कि उन्हें बिलकुल साफ-सुथरे तरीके से रखा जाए। इसके साथ ही उन्हें घर से कम से कम निकालना चाहिए जिससे वो किसी भी संक्रमण का शिकार न हों।

बच्चों में टाइफाइड का कारण क्या हैँ ?

खानपान

किसी भी इंफेक्शन को फैलने के लिए हमारे शरीर के अंदर जाना होता है, ऐसे में इसका एक ही जरिया होता होता है वो है खानपान। खानपान के जरिए ही बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। दूषित पानी और खाना इसकी एक बड़ी वजह है जिससे अपने बच्चों का बचाव करना बहुत जरूरी होता है। बच्चे अक्सर बिना हाथ धोए खाना खा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों में टाइफाइड का खतरा बढ़ जाता है। घर ही नहीं बल्कि बच्चे स्कूल में भी बिना हाथ धोए खाना खा लेते हैं। जबकि आपको अपने बच्चों को बार-बार साबुन से हाथ धोने के लिए आदत देनी चाहिए, तभी वे लंबे समय तक बीमारियों से दूर रह सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें: टाइफाइड बुखार आपको लंबे समय तक रख सकता है अस्वस्थ, इन तरीकों से करें अपना बचाव

संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना

कई बीमारियां या इंफेक्शन ऐसे हैं जो एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकते हैं, टाइफाइड भी उन्हीं बीमारियों में से एक है। कई बार बच्चें उन लोगों के पास होते हैं जो लोग पहले से ही टाइफाइड बुखार से पीड़ित होते हैं। ऐसे में खांसी, कफ और छींक के कारण ये बच्चों में भी फैले का खतरा होता है। जबकि आपके बच्चों को किसी भी ऐसे व्यक्ति जो खांसी, जुकाम, बुखार और छींक जैसी समस्या से पीड़ित हो उससे अपनी दूरी बनाए रखनी चाहिए। इससे बच्चे में संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। 

हाथ न धोना

बच्चों में एक आदत और होती है कि जब वो टॉयलेट या फिर मल त्याग करने के बाद अक्सर बिना हाथ धोए अपने आपको या किसी दूसरी चीज को छू लेते हैं, जो टाइफाइड और अन्य इंफेक्शन का कारण बनती है। बच्चों को हमेशा आदत देनी चाहिए कि वो बाथरूम या फिर टॉयलेट से जब भी निकलें उन्हें साबुन से अच्छी तरह अपने हाथ धोने चाहिए। इससे वो किसी भी तरह के संक्रमण से आसानी से बचे रह सकते हैं। इसके साथ ही बड़ों को भी इस तरह की आदतें होनी चाहिए। 

बचाव 

साफ-सुथरा खानपान

अपने आपको स्वस्थ रखने का सबसे बेहतर तरीका और सबसे पहला तरीका ये होता है कि हमे कुछ भी खाने पीने से पहले साबुन से हाथ धोने चाहिए। आप इस तरह अपने खाने को हेल्दी रख सकते हैं और खुद को भी। इसके साथ ही बच्चों को ये भी बताएं कि वो बिना बात के मुंह में गंदे हाथ न डालें। आपने अक्सर देखा होगा बच्चे मुंह में हाथ डालते रहते हैं जो कि एक गंदी आदत होती है। बच्चों के साथ ही उनके माता-पिता को भी इस बात का खासा ध्यान रखना चाहिए कि जब वो अपने बच्चों को कुछ दें तो हाथ धो कर ही उन्हें कुछ खाने को दें या खिलाएं। 

इसे भी पढ़ें: टाइफाइड बुखार का काल है 1 चम्मच प्याज का रस, जल्द मिलेगी राहत

सभी पोषक तत्व दें

बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है जिसकी वजह से वो जल्दी बीमार हो जाते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए उन्हें सभी पोषण देने जरूरी हो जाते हैं। बच्चों को सभी हरी पत्तेदार सब्जियां और फल खिलाने की आदत डालनी चाहिए और रोजाना उन्हें एक ग्लास दूध पीना चाहिए। इससे बच्चों का इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है साथ ही सभी पोषक तत्वों की पूर्ति होने पर उन्हें किसी तरह की समस्या पैदा नहीं होती और वो लंबे समय तक स्वस्थ रहने में कामयाब होते हैं। 

टाइफाइड का टीका

बच्चों को टाइफाइड Typhoid) जैसी गंभीर बीमारी से दूर रखने के लिए टाइफाइड का टीका लगवाना बहुत जरूरी होता है। टाइफाइड से सुरक्षित रखने के लिए 9 से 12 महीने के बच्चें को टीके की पहली खुराक दे देनी चाहिए। इसके बाद दूसरी खुराक 2 साल के आसपास दिलवानी चाहिए और 4 साल के आसपास तीसरा टीका लगवाना बहुत जरूरी होता है। 

 

Read More Articles On Other Diseases In Hindi

 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK