टाइप-2 डायबिटीज क्यों होता है? जानें डायबिटीज को पहचानने के शुरुआती लक्षण, कारण, इलाज जैसी सभी जरूरी बातें

Updated at: Dec 01, 2020
टाइप-2 डायबिटीज क्यों होता है? जानें डायबिटीज को पहचानने के शुरुआती लक्षण, कारण, इलाज जैसी सभी जरूरी बातें

टाइप 2 डायबिटीज आपके लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ है। यानी कि आप इसके बारे में जान कर और कुछ डाइट टिप्स को फॉलो करके इसे कंट्रोल कर सकते हैं।

Pallavi Kumari
डायबिटीज़Written by: Pallavi KumariPublished at: Dec 01, 2020

डायबिटीज (Diabetes)लाइफस्टाइल से जुड़ी हुई बीमारी है। इसमें व्यक्ति के शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर इसे पचाने में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाता है। इसमें इंसुलिन की एक बड़ी भूमिका होती है। ये हमारे शरीर में बनने वाला एक हॉर्मोन है जो, हमारे ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। डायबिटीज में या तो हमारे शरीर में इंसुलिन बनता ही नहीं है या हमारे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं और शुगर उनमें स्‍टोर न होकर खून में मौजूद रहती है। इस तरीके से शरीर में ब्लड शुगर बढ़ता जाता है और ये डाबिटीज का कारण बनता है। पर क्या ये डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज  (Type 2 Diabetes) से अलग है? इसी बारे में जानने के लिए हमने डॉ. शैवाल एच. चंदालिया (Dr.Shaival H. Chandalia), सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजी, जसलोक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र से बात की।

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क्या है टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes)?

डॉ. शैवाल बताते हैं कि डाइप 2 डायबिटीज  (Type 2 diabetes) एक ऐसी कंडीशन है, जो कि हाई ब्लड ग्लूकोज के कारण होता है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है और इस स्थिति को इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance)कहा जाता है।  पैंक्रियाज इसमें इंसुलिन बनाता है पर ये ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होता है। इसके कई कारण होते हैं, जो टाइप 2 डायबिटीज को लगातार ट्रिगर करते हैं।

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का फर्क (difference between type 1 and 2 diabetes in hindi)

टाइप 1 डायबिटीज में  पैंक्रियाज से इंसुलिन प्रोडक्शन होना ही बंद हो जाता है। इसमें एब्सॉल्यूट इंसुलिन डिफिशिएंसी रहती है और टाइप 2 डायबिटीज में रिलेटिव इंसुलिन डिफिशिएंसी रहती है।टाइप 1 डायबिटीज को आप ऑटोइम्‍यून डायबिटीज भी कह सकते हैं। इसमें हमारा इम्यून सिस्टम इंसुलिन बनाने वाले  पैंक्रियाज की बीटा सेल्स पर हमला कर उन्‍हें खत्‍म कर देती हैं। इन बीटा कोशिकाओं के नष्ट होने के बाद, शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में असमर्थ हो जाता है। हालांकि अभी तक पता नहीं चल पाया है कि  इम्यून सिस्टम कभी-कभी शरीर की अपनी कोशिकाओं पर हमला क्यों करती है। यह आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के या कुछ स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों के कारण हो सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज के कारण (Causes of Type 2 Diabetes)

1.शरीर का इंसुलिन रेजिस्टेंस होना (insulin resistance)

इंसुलिन एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला हार्मोन है। आपकी पैंक्रियाज  इसे पैदा करता है। ये इंसुलिन आपके रक्तप्रवाह से ग्लूकोज को आपके पूरे शरीर में कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां इसका उपयोग ऊर्जा के लिए किया जाता है। अगर आपको टाइप 2 मधुमेह है, तो आपका शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है। आपका शरीर तब हार्मोन का कुशलता से उपयोग नहीं कर रहा है। यह आपके  पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने पर मजबूर करता है।

2.पैंक्रियाज की बीटा सेल्स का नुकसान

इंसुलिन रेजिस्टेंस  होने के कारण समय के साथ, यह आपके पैंक्रियाज में कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। आखिरकार, आपके पैंक्रियाज किसी भी इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं हो पाते। इस तरह अगर ये पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करते हैं या अगर आपका शरीर इसे कुशलता से उपयोग नहीं करता है, तो ग्लूकोज आपके ब्लड में बनता है और ये डायबिटीज बढ़ा देता है।

3.ग्लूकोज का अधिक प्रोडक्शन

कुछ लोगों में, टाइप 2 डायबिटीज का बड़ा कारण ये है कि उनके लिवर द्वारा बहुत अधिक मात्रा में ग्लूकोज का उत्पादन करना है। इसके पीछे लाइफस्टाल, खान-पान, खाने में शुगर की मात्रा और मोटापा आदि जैसे विभिन्न कारक होते हैं, जिससे शरीर में लगातार बड़ी मात्रा में  ग्लूकोज का उत्पादन होता रहता है।

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टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण (Type 2 Diabetes Symptoms)

टाइप 2 मधुमेह  (Type 2 diabetes) में, आपका शरीर आपकी कोशिकाओं में ग्लूकोज लाने के लिए इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है। इसके कारण शरीर के अलग-अलग अंगों में बढ़े हुए ब्लड शुगर के लक्षण नजर आते हैं।  टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण पहले हल्के और आसान होते हैं, पर समय के साथ ये गंभीर हो सकते हैं। शुरुआती लक्षणों की बात करूं, तो इसमें

  • -लगातार भूख लगना
  • -ऊर्जा की कमी महसूस करना
  • -थकान
  • -वजन घटना या बढ़ना
  • - ज्यादा प्यास लगना
  • -लगातार पेशाब आना
  • -त्वचा में खुजली
  • -नजर कमजोर होना

टाइप 2 मधुमेह के गंभीर लक्षण

अगर  आपका ब्लड शुगर लंबे समय से कम नहीं हो पा रहा है और बढ़ता जा रहा है, तो ये शरीर में कुछ गंभीर लक्षणों का कारण बन सकता है। जैसे कि 

  • -फंगल इंफेक्शन
  • -किसी भी घाव का बहुत धीरे-धीरे ठीक होना
  • -आपकी त्वचा पर काले धब्बों का दिखना
  • -पैर में दर्द का रहना
  • - पैरों का सुन्न होना

किन लोगों को ज्यादा होता है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा ?

  • -प्रीडायबिटीज लोगों को टाइप 2 डायबिटीज खतरा ज्यादा होता है।
  • -वजन का अधिक बढ़ना और मोटापा शरीर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को तेजी से बढ़ता है।
  • -पेट की चर्बी बहुत है, तो ये भी टाइप-2 डायबिटीज को बढ़ाता है।
  • -शारीरिक रूप से अगर आप एक्टिव नहीं हैं, तो ये टाइप-2 डायबिटीज को ट्रिगर करता है।
  • -45 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों में इसे होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • - गर्भावस्था के दौरान मधुमेह होना
  • -9 पाउंड से अधिक वजन वाले बच्चे को जन्म देने वाली माताओं को भी डायबिटीज का खतरा रहता है।
  • -पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (पीसीओएस) वाली महिलाओं को भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा रहता है।
  • -आनुवांशिक कारणों से भी टाइप-2 डायबिटीज के होने का खतरा ज्यादा रहता है।

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टाइप 2 डायबिटीज के लिए सही आहार (type 2 diabetes diet chart in hindi)

दिल को स्वस्थ और ब्लड शुगर के स्तर को सुरक्षित और स्वस्थ सीमा में रखने के लिए जरूरी है कि हम एक हेल्दी डाइट फॉलो करें। इसके लिए टाइप 2 डायबिटीज के मरीज को कुछ परहेज के साथ, एक सही डाइट प्लॉन फॉलो करना चाहिए।

  • -भोजन और नाश्ते को निर्धारित समय पर खाएं।
  • -विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ चुनें जो, पोषक तत्वों में उच्च और कैलोरी में कम हों।
  • -अधिक भोजन न करें।
  • -फूड लेबल को बारीकी से पढ़ें।
  • -खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों दोनों के कैलोरी को जान कर एक संतुलन में ही इसे लें।
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टाइप 2 डायबिटीज में क्या न खाएं ?

  • -संतृप्त या ट्रांस फैट से बना भारी भोजन न लें।
  • -ज्यादा मीट भी न लें।
  • - सफेद ब्रेड न लें।
  • -प्रोसेस्ड स्नैक्स न खाएं।
  • -शुगर लेस जूस लें।
  • -हाई फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स न लें।
  • -पास्ता या सफेद चावल न खाएं
  • -नमकीन खाद्य पदार्थों और तले हुए खाद्य पदार्थों से दूर रहें।

इन सबके अलावा दिल से स्वस्थ रखने के लिए ओमेगा -3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थों को खाने में शामिल करें। जैसे कि टूना और सार्डिन मछली। इसके अलावा डाइट में जैतून का तेल, मूंगफली का तेल और नट्स, जैसे बादाम और अखरोट आदि को शामिल करें।  डायबिटीज को लेकर एक बार और ध्यान में रखें कि मोटापा बिलकुल भी न बढ़ने दें। जितनी तेजी से आप मोटे होंगे, उतनी ही तेजी से आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ता चला जाएगा। इसलिए मोटापा कंट्रोल करने के लिए एक एक्टिव लाइफ्टाइल फॉलो करें। रोज 45 मिनट वॉकिंग करें और डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए योग करें।

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